छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के एक युवा किसान ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक खेती में भी बेहतर करियर और शानदार आय की संभावनाएं मौजूद हैं. एमबीए की पढ़ाई पूरी करने और निजी क्षेत्र में लाखों रुपये के पैकेज का अवसर मिलने के बावजूद मोहित पवार ने नौकरी की बजाय खेती को चुना. उन्होंने अपनी पैतृक भूमि पर हाईटेक पॉलीहाउस स्थापित कर गुलाब की व्यावसायिक खेती शुरू की और आज वे सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं. धमतरी जिले के ग्राम खरतुली में एक एकड़ भूमि पर विभिन्न रंगों के गुलाब उगाए जा रहे हैं, जिनकी सप्लाई छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा, झारखंड और अन्य राज्यों तक की जा रही है. आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन ने उन्हें लाखों रुपये की आय दिलाई है.
लाखों की नौकरी छोड़ खेती को बनाया करियर
धमतरी निवासी मोहित पवार ने पुणे से एमबीए की पढ़ाई पूरी की थी. शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें निजी क्षेत्र में आकर्षक वेतन पैकेज पर नौकरी का अवसर भी मिला, लेकिन उन्होंने कृषि क्षेत्र में कुछ नया करने का फैसला किया. उनकी पैतृक एक एकड़ जमीन ग्राम खरतुली में लंबे समय से खाली पड़ी थी. इसी जमीन को उपयोग में लाकर उन्होंने आधुनिक बागवानी की दिशा में कदम बढ़ाया.

Rose Farming: गुलाब की खेती से लाखों की कमाई
65 लाख के ऋण से तैयार किया हाईटेक पॉलीहाउस
मोहित पवार ने बैंक से लगभग 65 लाख रुपये का ऋण लेकर पॉलीहाउस और आवश्यक ढांचे का निर्माण कराया. अप्रैल 2025 में उन्होंने गुलाब की खेती शुरू की. शुरुआती महीनों में तकनीकी जानकारी और पौधों के रखरखाव से जुड़ी चुनौतियों के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ, लेकिन उन्होंने प्रबंधन और मार्केटिंग रणनीति में सुधार करते हुए खेती को सफल बनाया.
एक एकड़ में लगाए 33 हजार गुलाब के पौधे
पॉलीहाउस में करीब 33 हजार उन्नत गुणवत्ता वाले गुलाब के पौधे लगाए गए हैं. ये पौधे विशेष रूप से पुणे से मंगाए गए हैं. यहां लाल, पीले, सफेद और अन्य रंगों के गुलाबों का उत्पादन किया जा रहा है. फूलों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पूरे पॉलीहाउस का तापमान नियंत्रित रखा जाता है.

Rose Farming: गुलाब के बंच
8 से 9 मजदूर करते हैं देखभाल
गुलाबों की नियमित देखरेख के लिए मोहित ने 8 से 9 कर्मचारियों को रोजगार दिया है. ये कर्मचारी पौधों की कटिंग, छंटाई, पैकिंग और रखरखाव का काम करते हैं. प्रतिदिन सुबह फूल तोड़े जाते हैं और उनकी ग्रेडिंग तथा पैकिंग के बाद विभिन्न बाजारों के लिए भेजा जाता है.
धमतरी से झारखंड और ओडिशा तक सप्लाई
पॉलीहाउस से प्रतिदिन हजारों गुलाब के फूल तैयार होकर बाजारों में भेजे जाते हैं. फूलों की सप्लाई धमतरी, रायपुर, भुवनेश्वर, रांची, झारखंड और ओडिशा के विभिन्न शहरों तक की जा रही है. बस परिवहन के माध्यम से फूल एजेंटों तक पहुंचाए जाते हैं, जहां से आगे बाजारों में बिक्री होती है.
सीजन के अनुसार तय होती है कीमत
मोहित पवार के अनुसार एक बंच में 20 स्टिक होती हैं. बाजार में एक बंच की कीमत सामान्य दिनों में लगभग 60 रुपये से शुरू होकर मांग और सीजन के अनुसार 400 रुपये तक पहुंच जाती है. शादी और आयोजन के मौसम में फूलों की मांग बढ़ने से आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है. इसके अलावा कटिंग और छंटाई के दौरान निकलने वाले फूलों के टुकड़ों को भी किलो के हिसाब से बेचा जाता है. इनकी कीमत 100 से 400 रुपये प्रति किलो तक मिलती है.

Rose Farming MBA Farmer Success Story: मोहित पवार
इजरायली ड्रिप सिस्टम से सिंचाई
खेती में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है. सिंचाई के लिए इजरायली ड्रिप सिस्टम लगाया गया है, जिससे पानी की बचत के साथ पौधों को आवश्यक नमी मिलती रहती है. प्रतिदिन लगभग 350 से 400 लीटर पानी का उपयोग किया जाता है. साथ ही पौधों को रासायनिक खाद से दूर रखते हुए जैविक तरीकों को प्राथमिकता दी जा रही है.
सालाना 15 से 20 लाख रुपये की आय
मोहित पवार के अनुसार गुलाब की इस खेती से सालाना 15 से 20 लाख रुपये तक की आय हो रही है. बैंक ऋण की किस्त, मजदूरी, खाद, रखरखाव और अन्य खर्च निकालने के बाद भी अच्छी शुद्ध बचत हो रही है. राज्य सरकार से मिलने वाली सब्सिडी भी इस व्यवसाय को और मजबूत बना रही है.
युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहे मोहित
मोहित पवार की सफलता यह दिखाती है कि आधुनिक तकनीक, बाजार की समझ और दृढ़ संकल्प के साथ कृषि क्षेत्र में भी शानदार करियर बनाया जा सकता है. धमतरी का यह युवा किसान आज उन युवाओं के लिए मिसाल बन गया है, जो नौकरी और खेती के बीच नए अवसर तलाश रहे हैं.
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