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आदिवासियों के जूतों पर सियासत; चरण पादुका योजना को लेकर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और BJP आमने-सामने, ये है विवाद

छत्तीसगढ़ की चरण पादुका योजना को लेकर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं. तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए खरीदे जाने वाले सेफ्टी शू के टेंडर पर कांग्रेस ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, जबकि सरकार योजना को आदिवासी हित में बता रही है.

आदिवासियों के जूतों पर सियासत; चरण पादुका योजना को लेकर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और BJP आमने-सामने, ये है विवाद
छत्तीसगढ़ की चरण पादुका योजना पर सियासत तेज, जूता खरीदी के टेंडर को लेकर कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने

छत्तीसगढ़ में आदिवासी तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए संचालित चरण पादुका योजना एक बार फिर चर्चा में है. जंगलों में काम करने वाले आदिवासियों को जूते-चप्पल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना को लेकर अब राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. जहां राज्य सरकार इसे आदिवासी हित और सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल बता रही है, वहीं कांग्रेस ने जूतों की खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए सवाल उठाए हैं. करीब 12 लाख हितग्राहियों तक पहुंचने वाली इस योजना के तहत इस वर्ष बड़ी संख्या में जूतों की खरीदी की तैयारी चल रही है. आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि योजना का वास्तविक लाभ आदिवासी संग्राहकों तक किस रूप में पहुंच रहा है.

जूता खरीदी के टेंडर पर शुरू हुआ विवाद

सत्र 2026-27 के लिए चरण पादुका योजना के अंतर्गत तेंदूपत्ता संग्राहकों को जूते वितरित किए जाने हैं. इसके लिए जारी निविदा में लगभग साढ़े 12 लाख जोड़ी जूतों की आपूर्ति का प्रावधान किया गया है. विवाद की शुरुआत टेंडर में शामिल "सेफ्टी-शू" की शर्त को लेकर हुई है. कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रावधान के जरिए विशेष कंपनियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, जबकि सरकार इन आरोपों को निराधार बता रही है.

Charan Paduka Yojana Chhattisgarh: क्यों है चरण पादुका योजना में विवाद?

Charan Paduka Yojana Chhattisgarh: क्यों है चरण पादुका योजना में विवाद?

कांग्रेस ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा, "जब रमन सरकार थी, तब उस समय चरण पादुका घोटाला करते थे, इसीलिए हमारी सरकार ने जूता की जगह सीधे राशि संग्राहकों के खाते में डालना शुरू किया. साय सरकार ने फिर से संग्राहकों के जूता खरीदी में भ्रष्टाचार करने के लिए नगदी की जगह जूता देना शुरू किया. इस बार संग्राहकों को जो जूता दे रहे, उसमें सेफ्टी-शू देने का टेंडर निकाले हैं. यह मध्यप्रदेश के एक वरिष्ठ नेता के रिश्तेदार को फायदा पहुंचाने सेफ्टी-शू का क्लास डाला गया है. कांग्रेस का कहना है कि योजना के नाम पर अनावश्यक खरीदी और वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है.

Charan Paduka Yojana Chhattisgarh: तेंदूपत्ता संग्रहण

Charan Paduka Yojana Chhattisgarh: तेंदूपत्ता संग्रहण

क्या है चरण पादुका योजना?

चरण पादुका योजना की शुरुआत वर्ष 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में की गई थी. इस योजना का उद्देश्य तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले आदिवासी परिवारों को जंगलों में काम के दौरान सुरक्षा प्रदान करना था. शुरुआत में योजना केवल पुरुष संग्राहकों के लिए थी, लेकिन वर्ष 2008 में महिलाओं को भी इसमें शामिल कर लिया गया. योजना के तहत तेंदूपत्ता संग्राहकों को जूते-चप्पल उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि उन्हें जंगल में कांटों, पत्थरों और जहरीले जीव-जंतुओं से सुरक्षा मिल सके.

भूपेश सरकार में बंद, साय सरकार में फिर शुरू

साल 2018 में सत्ता परिवर्तन के बाद भूपेश बघेल सरकार ने चरण पादुका योजना बंद कर दी थी और कुछ मामलों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से सहायता देने का विकल्प अपनाया गया. विष्णुदेव साय सरकार ने जून 2025 में योजना को फिर से शुरू किया. सरकार का दावा है कि इससे दूरस्थ वन क्षेत्रों में काम करने वाले लाखों आदिवासियों को सीधा लाभ मिलेगा.

Charan Paduka Yojana Chhattisgarh: तेंदूपत्ता संग्राहक

Charan Paduka Yojana Chhattisgarh: तेंदूपत्ता संग्राहक

बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को बताया राजनीतिक

बीजेपी विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा, कांग्रेस की जब सरकार थी तब उन्होंने चरण पादुका योजना बंद कर दी थी, उन्हें आदिवासी महिला और भाइयों की कोई चिंता नहीं थी तपती धूप में कांटों के बीच में तेंदूपत्ता बिन जाते हैं उनके लिए रमन सिंह की सरकार में योजना शुरू की गई थी, जिसे उन्होंने बंद कर दिया अब फिर से जब योजना चालू की गई है तो उन्हें सिर्फ आरोप लगाना है. उनके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं है. बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस मुद्दाविहीन राजनीति कर रही है और आदिवासियों के हित में चलाई जा रही योजना को बदनाम करने की कोशिश कर रही है.

हितग्राहियों ने बताए जमीनी सुझाव

राजनीतिक बहस के बीच योजना के वास्तविक हितग्राहियों की राय भी सामने आ रही है. तेंदूपत्ता संग्राहक सीताराम का कहना है, "योजना अच्छी है, लेकिन मेरा सुझाव है कि जिन परिवारों के एक से अधिक सदस्य तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य करते हैं, उन्हें प्रत्येक सदस्य के पैर के अनुसार अलग-अलग आकार (साइज) के जूते उपलब्ध कराए जाएं. कई बार एक ही साइज के जूते मिलने से सभी सदस्यों के लिए उनका उपयोग संभव नहीं हो पाता, जिससे योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पाता. यदि प्रत्येक पात्र संग्रहणकर्ता को उसकी सही साइज के जूते दिए जाएं, तो जंगलों में काम करने के दौरान उन्हें अधिक सुविधा, सुरक्षा और आराम मिलेगा तथा योजना का उद्देश्य भी प्रभावी ढंग से पूरा होगा."

Charan Paduka Yojana Chhattisgarh: चरण पादुका योजना में उठ रहे सवाल

Charan Paduka Yojana Chhattisgarh: चरण पादुका योजना में उठ रहे सवाल

योजना के बेहतर क्रियान्वयन की मांग

वहीं तेंदूपत्ता संग्रहक कामू बैगा ने कहा, "वर्तमान में यह योजना लगभग ठप पड़ी हुई है. जबकि प्रदेश में आदिवासी समाज का मुख्यमंत्री होने के बावजूद अब तक तेंदूपत्ता संग्राहकों को इस योजना का लाभ सही से नहीं मिल रहा है. बदलते समय और तकनीक को देखते हुए सभी तेंदूपत्ता संग्राहकों का एक स्मार्ट कार्ड बनाया जाए, जिससे उन्हें मिलने वाली सभी सरकारी योजनाओं की जानकारी और लाभ सीधे एवं पारदर्शी तरीके से मिल सके. उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकार को शीघ्र पहल करनी चाहिए."

सियासत के बीच सबसे अहम सवाल

चरण पादुका योजना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं. एक ओर कांग्रेस टेंडर प्रक्रिया और जूता खरीदी पर सवाल उठा रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी इसे आदिवासी हितों से जुड़ी कल्याणकारी योजना बता रही है. हालांकि इस पूरे विवाद के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या योजना का लाभ सही समय पर और सही तरीके से उन लाखों तेंदूपत्ता संग्राहकों तक पहुंच पा रहा है, जिनकी सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर यह योजना शुरू की गई थी. आने वाले दिनों में टेंडर प्रक्रिया, वितरण व्यवस्था और हितग्राहियों की प्रतिक्रिया इस बहस की दिशा तय करेगी.

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