- प्रयागराज में आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज पर जानलेवा हमला मामले में कोर्ट ने केस दर्ज करने का आदेश दिया
- आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद समेत अन्य के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी
- माघ मेला क्षेत्र में श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति यात्रा के दौरान रास्ता जाम कर हिंसक हमला करने का आरोप है
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेला क्षेत्र में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन आशुतोष ब्रह्मचारी माहाराज पर कथित जानलेवा हमला मामले में एसीजेएम कोर्ट ने परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने ये आदेश उनके दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए दिया. दरअसल मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष ब्रम्हचारी महाराज ने माघ मेला में मौनी अमावस्या के स्नान वाले दिन अपने ऊपर कथित रूप से जानलेवा हमले का आरोप लगाया था. आरोप के मुताबिक, उन पर यह हमला शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर के पास किया गया था.
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प्रयागराज कोर्ट में दाखिल किया था प्रार्थना पत्र
इस मामले में FIR दर्ज करने की मांग को लेकर उन्होंने प्रयागराज कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था. इसमें आशुतोष महाराज ने विपक्षीगण शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, मुकुंदानन्द ब्रम्हचारी, अरविन्द मिश्र समेत दर्जनों से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ संबंधित थाने पर FIR दर्ज कराये जाने के लिए कोर्ट में धारा 173 (4) बीएनएसएस के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया था.
मुक्ति यात्रा के दौरान रास्ता ब्लॉक करने का आरोप
प्रार्थी आशुतोष महाराज ने कोर्ट में अर्जी दायर कर कहा कि मौनी अमावस्या को माघ मेला क्षेत्र में श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति यात्रा का आयोजन किया गया था. यात्रा जैसे ही त्रिवेणी मार्ग पर स्थित विपक्षी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के पास पहुंची थी, विपक्षीगण द्वारा आम सार्वजनिक मार्ग पर जानबूझकर अवैध रूप से जाम लगा दिया गया. जिससे न केवल धार्मिक यात्रा और उससे संबंधित शांतिपूर्ण गतिविधियों बाधित हुई बल्कि सार्वजनिक आवागमन भी परी तरह से अवरूद्ध हो गया.
हिंसक हमला और बल प्रयोग का आरोप
उनके सेवादारों ने शांतिपूर्वक मार्ग देने का अनुरोध किया गया तो विपक्षीगण आक्रामक हो गए और सामूहिक रूप से उन पर हिंसक हमला कर दिया, इसमें कई लोग घायल भी हुए. उन्होंने कहा कि इस दौरान आपराधिक बल प्रयोग भी किया गया. वे लोग किसी तरह से जान बचाकर वहां से निकले. इस घटना के संबंध में 18 जनवरी को प्रयागराज के झूंसी थाने में तहरीर दी गई थी, वादी का मेडिकल भी कराया गया.मेडिकल रिपोर्ट में चोटें निकली थी.
शिकायत देने का दबाव, जान से मारने की धमकी
आशुतोष महाराज ने आरोप लगाया कि इस घटना के बाद 20 जनवरी को उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया और हत्या की धमकी भी दी गई. इसके बाद भी लगातार उन्हें धमकियां मिलीं. इन सभी घटनाओं की थाना झूंसी और एसपी माघ मेला तथा अन्य उच्च अधिकारियों को लिखित तहरीर, ई-मेल एवं व्हाट्सएप, डाक के माध्यम से दी गई थी, लेकिन कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया.
प्रार्थी आशुतोष महाराज ने पुलिस अधीक्षक, माघ मेला, प्रयागराज को हमले के संबंध में कई दस्तावेज सौंपे. कोर्ट ने प्रार्थनापत्र पर थाना औरअपर पुलिस उपायुक्त अपराध कमिश्नरेट, प्रयागराज से आख्या आहूत की थी. थाने द्वारा कोर्ट में दी गई आख्यानुसार प्रार्थनापत्र में दर्शाये गये आरोपों के संबंध में कोई भी अभियोग पंजीकृत नहीं था.
कोर्ट ने दिया मामला दर्ज करने का आरोप
एसीजेएम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा रामबाबू गुप्ता और अन्य बनाम यूपी स्टेट केस का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में हाईकोर्ट द्वारा पारित दिशा निर्देशों के प्रकाश में प्रश्नगत प्रकरण को परिवाद के रूप में पंजीकृत कराया जाना न्यायसंगत होगा.
कोर्ट ने आदेश दिया कि आवेदक द्वारा प्रस्तुत प्रार्थनापत्र बीएनएसएस की धारा 173 (4) के तहत परिवाद के रूप में दर्ज हो. वहीं आरोपियों को नोटिस जारी करते हुए पत्रावली बयान के लिए बीएनएसएस की धारा 223 के तहत 17 मार्च को पेश होने का आदेश दिया.
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