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This Article is From Jan 17, 2017

मैं इस जीत से खुश नहीं, मगर ये लड़ाई जरूरी थी: चुनाव आयोग के फैसले के बाद NDTV से अखिलेश

मैं इस जीत से खुश नहीं, मगर ये लड़ाई जरूरी थी: चुनाव आयोग के फैसले के बाद NDTV से अखिलेश
  • नेताजी मेरे पिता हैं. ये रिश्‍ता बदल नहीं सकता- अखिलेश यादव
  • कल जैसे ही फैसला आया, मैं नेताजी के पास आशीर्वाद लेने गया था- अखिलेश
  • अखिलेश बोले- कांग्रेस के साथ अलायंस का फैसला एक-दो दिन में हो जाएगा.
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लखनऊ: चुनाव आयोग द्वारा समाजवादी पार्टी का चुनाव चिह्न 'साइकिल' अखिलेश के नेतृत्व वाली सपा को देने के फैसले के बाद अखिलेश यादव ने कहा है कि 'नेताजी मेरे पिता हैं. ये रिश्‍ता बदल नहीं सकता. ये (जीत) मेरे लिए खुशी की बात नहीं है, मगर ये लड़ाई भी जरूरी थी'. अखिलेश ने एनडीटीवी से बातचीत में यह बात कही.

इसी बीच अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह यादव से मिलने पहुंचे. बताया जा रहा है कि मुलायम अपने उम्‍मीदवार नहीं उतारेंगे. 30-40 सीटों को लेकर दोनों के बीच बातचीत होगी. करीबियों का कहना है कि मुलायम 'मान' गए हैं.

इससे पूर्व अखिलेश ने कहा कि कल जैसे ही फैसला आया, लोग जश्‍न मनाने में लग गए थे, लेकिन मैं नेताजी के पास आशीर्वाद लेने गया था.
 
कांग्रेस के साथ गठबंधन करने को लेकर चल रहे कयासों को लेकर उन्‍होंने आगे कहा कि कांग्रेस के साथ अलायंस का फैसला एक-दो दिन में हो जाएगा, जिसकी लखनऊ में औपचारिक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस करेंगे. उन्‍होंने कहा कि मेरी और नेताजी (मुलायम सिंह यादव) की लिस्‍ट में 90 प्रतिशत नाम कमोबेश एक हैं. वक्‍त कम है, इसलिए फौरन प्रचार में जाना है.

उल्‍लेखनीय है कि समाजवादी पार्टी में मुलायम और अखिलेश के बीच जारी जंग में सोमवार को चुनाव आयोग से मुलायम गुट को करारा झटका लगा. आयोग ने सोमवार को पार्टी के चुनाव चिह्न 'साइकिल' अखिलेश के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी को देने का फैसला सुनाया.
 चुनाव आयोग द्वारा जारी आदेश पर मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी के अलावा दो अन्य चुनाव आयुक्तों के भी हस्ताक्षर हैं. आयोग ने अपने आदेश में कहा, 'आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार के बाद यह पाया कि अखिलेश खेमा ही असली समाजवादी पार्टी है और वह ही पार्टी के नाम तथा चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 के मुताबिक साइकिल चुनाव चिह्न के इस्तेमाल के हकदार हैं.'

आयोग के फैसले से बेहद खुश अखिलेश के करीबी और उनके चाचा रामगोपाल यादव ने कहा, 'चुनाव आयोग ने सही निर्णय लिया इसलिए कि दूसरे खेमे (मुलायम सिंह यादव खेमा) के पास चुनाव चिह्न पाने के लिए जरूरी दस्तावेजी ताकत नहीं थी.'

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