पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में लगे 7 न्यायिक अधिकारियों के करीब 9 घंटे तक घेराव और बंधक बनाए जाने के मामले की जांच अब नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) करेगी. सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद गुरुवार देर शाम केंद्रीय चुनाव आयोग ने मामला एनआईए को सौंपने का फैसला किया. उधर मालदा पुलिस ने गुरुवार को घटना से संबंधित 10 एफआईआर दर्ज की और 19 लोगों की गिरफ्तारी का दावा किया.
चीफ जस्टिस का बेहद कड़ा रुख
चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने गुरुवार सुबह मामले की सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने की घटना सबूत है कि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है. चीफ जस्टिस ने घटना की जांच सीबीआई या एनआई से कराने के निर्देश दिए थे.
9 घंटे तक न्यायिक अधिकारियों का घेराव
बता दें, मालदा जिले के कालियाचक में 7 न्यायिक अधिकारियों को उस वक्त भीड़ ने घेराव करते हुए बंधक बना लिया था, जब वह वोटर लिस्ट से मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामलों की सुनवाई कर रहे थे. इन न्यायिक अधिकारियों में तीन महिलाएं भी थीं. भीड़ में वो लोग शामिल थे, जिनके नाम वोटर लिस्ट से कट गए थे.
रात 1 बजे पुलिस ने बचाकर निकाला
करीब 9 घंटे तक घेराव के बाद अधिकारियों को बचाया जा सका था. रात 1 बजे भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा और अधिकारियों को बचाकर निकाला. जब अधिकारियों को बचाकर ले जाया जा रहा था, उस वक्त भी उनके काफिले पर हमले का प्रयास किया गया था. कालियाचक ब्लाक 1 के पास नेशनल हाइवे जाम कर दिया था. प्रशासन के दखल के बाद रास्ता खुल पाया था.
3 घंटे तक CJI खुद बचाने में जुटे रहे
मालदा में हालात कितने भयावह थे, इसका अंदाजा सुप्रीम कोर्ट के आदेश से लगाया जा सकता है. इसमें पूरी घटना का ब्यौरा देते हुए बताया गया है कि रात को 11 बजे सूचना मिलने के तुरंत बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत एक्टिव हो गए थे और 3 घंटे तक लगातार निर्देश देते हुए न्यायिक अधिकारियों को भीड़ से छुड़ाने के प्रयास में जुटे रहे. लेकिन पश्चिम बंगाल के अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे थे. रात 1.44 बजे जाकर हालात सामान्य हो पाए. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए गुरुवार सुबह के लिए सुनवाई तय कर दी.
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने CJI को बताया
मालदा की घटना को लेकर CJI सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने सात पेज का आदेश जारी किया है. इसमें घटना का ब्यौरा देते हुए लिखा गया है कि बुधवार देर रात हमारे पास कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का वॉट्सऐप मैसेज आया, जिसमें बताया गया कि सात न्यायिक अधिकारियों, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं, को मलकाह जिले के कालियाचक क्षेत्र में BDO कार्यालय में असामाजिक तत्वों ने घेर लिया है. यह घेराव लगभग 3:30 बजे शुरू हुआ था, जिसके बाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल ने तुरंत राज्य प्रशासन को सूचित किया और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की. हालांकि ऐसा लगता है कि इस मामले में 8:30 बजे तक प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई.
सहयोग नही कर रहे थे अफसर
सुप्रीम कोर्ट के सूत्रों के मुताबिक, बुधवार देर रात करीब 11 बजे घटना के संबंध में CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची को कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का वॉट्सएप मैसेज आया था. उन्होंने दोनों जजों को मालदा की घटना की जानकारी दी. उसके बाद से ही CJI सूर्य कांत ने मामले की निगरानी शुरू की और जरूरी दिशानिर्देश दिए. यहां तक कि उनके पास बार-बार सूचना आ रही थी कि पश्चिम बंगाल के अफसर इस मामले में सहयोग नहीं कर रहे हैं. CJI लगातार हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के संपर्क में थे और जानकारी ले रहे थे.
रात 2 बजे तक CJI ने खुद मॉनीटर किया
चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने इस घटना पर खुद संज्ञान लिया था और रात 2 बजे तक खुद मॉनीटर करते रहे थे. पश्चिम बंगाल के डीजीपी, कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के साथ ग्रुप कॉल करके उन्होंने खुद निर्देश दिए थे. गुरुवार सुबह सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने पश्चिम बंगाल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई. कहा था कि दोपहर 3.30 बजे की घटना के बाद रात 11 बजे तक घटनास्थल पर डीएम या एसएसपी नहीं पहुंचे थे. मुझे आधी रात को आदेश देना पड़ा.
अधिकारियों को अवमानना का नोटिस
चीफ जस्टिस सूर्य कांत का कहना था कि बंगाल सबसे राजनीतिक ध्रुवीकरण वाला राज्य है. ये घटना दिखाती है कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है. यह कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि ऐसा लगता है कि यह एक योजनाबद्ध और प्रेरित कदम था. सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के चीफ सेक्रेटरी दुष्यंत नरिआला, डीजीपी सिद्ध नाथ गुप्ता, होम सेक्रेटरी संघमित्र घोष के अलावा मालदा के डीएम और एसएसपी को भी नोटिस जारी करके पूछा है कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला क्यों न चलाया जाए.
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