- मौलाना अरशद मदनी ने जौहर यूनिवर्सिटी को गिराने की सरकार की कार्रवाई को गलत और अनुचित बताया
- उन्होंने कहा कि नफरत की आग बुझाने के लिए समाज में प्रेम और एकता का माहौल जरूरी है
- मदनी ने मदरसों की शिक्षा को सही ढंग से दिखाने और धर्म के बारे में गलतफहमियां दूर करने पर जोर दिया
जमीयत उलमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना सय्यद अरशद मदनी ने आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी को गिराए जाने को लेकर सरकार पर तंज कसा. उन्होंने लखनऊ में हुए एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि देश में आग बरस रही है. नफरत की आग लगाकर इस पर सियासत करना गलत है. हम इस मुल्क के लिए आजादी की लड़ाई लड़े. मुल्क के अंदर मुखालिफत बहुत पहले से ही चल रही थी. वे कहते हैं कि ओम नमः शिवाय ॐ सबसे बड़ा है, वही हम कहते हैं अल्लाह हुआकबार यानी अल्लाह सबसे बड़ा है. रामपुर में जिस तरह यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई हो रही है उसपर सियासत हो रही है, जिसके नाम पर यह यूनिवर्सिटी है वो जिंदा रहना चाहिए.
जौहर यूनिवर्सिटी को गिराना गलत
उन्होंने कहा कि सरकार अगर कहती है कि जौहर यूनिवर्सिटी को गिरा देना चाहिए तो यह गलत है. यूनिवर्सिटी में अगर कुछ गलत है तो जुर्माना जमा कराया जाए न कि उसको गिराया जाएं. इस देश में आज फिरका परस्त का काम किया जा रहा है. वन नेशन वन इलेक्शन भी एक सियासत है. ज्ञानवापी मामले पर सुप्रीम कोर्ट आपसी बातचीत से इस मसले को करने की बात कही, लेकिन इस फैसले का निस्तारण अदालत को करना चाहिए.
Lucknow, Uttar Pradesh: National President of Jamiat Ulema-e-Hind, Maulana Syed Arshad Madani says, "Whether in our villages, our cities, our markets, or our fields, we should help our neighbours, express love and affection, and stand with them in times of sorrow and hardship.… pic.twitter.com/DHDV0Nji2i
— IANS (@ians_india) July 18, 2026
नफरत की आग पर अपनेपन का पानी डालें
मौलाना मदनी ने कहा कि आप नफरत की आग को नफरत से नहीं मिटा सकते. नफरत की आग बुझाने के लिए प्यार और मोहब्बत का पानी बखेरना जरूरी है. इसलिए मैं तमाम मुसलमानों, तमाम हिंदुओं, तमाम सिख और ईसाई, तमाम बु्धिस्ट और हिंदुस्तान के हर शख्स से कहना चाहते हैं कि एक दूसरे के साथ प्यार, मोहब्बत का बर्ताव करें खास तौर पर मुसलमान के साथ, जो यहां बड़ी संख्या में हैं.
मदरसों की शिक्षा दिखाकर भ्रम दूर करें
उन्होंने मदरसा चलाने वालों से कहा कि अपने आस-पास के लोगों को अपने मदरसों में बुलाएं और उनको दिखाएं कि आप वहां क्या पढ़ते हैं, कुरान क्या कहती है. बहुत से लोग यह नहीं जानते. आपके धर्म के बारे में उन तक जो बातें पहुंची हैं, उनमें से ज्यादातर गलत हैं.
पड़ोसियों की मदद करनी चाहिए
मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि चाहे हमारे गांव हों, शहर हों, बाज़ार हों या खेत-खलिहान, हमें अपने पड़ोसियों की मदद करनी चाहिए, उनके प्रति प्यार और अपनापन दिखाना चाहिए और दुख-मुश्किल के समय उनके साथ खड़ा होना चाहिए. अगर कोई आपसे कड़वी बात भी कहे, तो उसे विनम्रता से सुनें. प्यार और हमदर्दी का यही मतलब है.
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