- लैंबोर्गिनी कार से टक्कर मारने वाले शिवम मिश्रा को पुलिस ने चार दिन बाद गिरफ्तार किया था और जमानत मिल गई थी
- अदालत ने पुलिस की 14 दिन की रिमांड की मांग खारिज कर 20 हजार रुपये के बॉन्ड पर शिवम मिश्रा को जमानत दे दी थी
- पुलिस की जांच में तीन बड़ी लापरवाहियां सामने आईं, जिनके कारण केस कमजोर हुआ और आरोपी को जमानत मिली है
उत्तर प्रदेश के कानपुर में रविवार को लैंबोर्गिनी कार से कई लोगों टक्कर मारने वाले आरोपी शिवम मिश्रा को कोर्ट से जमानत मिल गई है. दुर्घटना के चार दिन बाद गुरुवार सुबह ही शिवम मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार किया था. पुलिस ने उसे मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया था. पुलिस ने 14 दिन की रिमांड मांगी थी लेकिन अदालत ने इसे खारिज करते हुए शिवम को जमानत दे दी. शिवम के वकील अनंत शर्मा ने बताया कि कोर्ट ने 20 हजार के बॉन्ड पर उसे जमानत दे दी है.
शिवम मिश्रा को जिस तरह से गिरफ्तार किया गया और उसके बाद उसे कुछ ही घंटों में जमानत भी दे दी गई, इस पर कई सारे सवाल खड़े हो रहे हैं. सबसे ज्यादा सवाल पुलिस की जांच पर खड़े हो रहे हैं. पुलिस की तीन बड़ी लापरवाहियां सामने आई हैं, जिस कारण केस कमजोर हुआ और शिवम मिश्रा को जमानत मिल गई.
पुलिस की 3 लापरवाहियां!
- 8 फरवरी को कानपुर में दिनदहाड़े लैंबोर्गिनी कार ने कई लोगों को टक्कर मार दी थी. चश्मदीदों ने बताया था कि कार तेज रफ्तार में थी और इसे शिवम मिश्रा ही चला रहा था. चश्मदीदों ने यह भी दावा किया था कि वह नशे में था लेकिन जब हादसा हुआ तो उसका मेडिकल नहीं करवाया गया.
- जब कोई गंभीर चोट नहीं थी तो पुलिस ने शिवम को तुरंत गिरफ्तार क्यों नहीं किया? बाउंसर उसे कैसे ले गए? वह किस चीज का इलाज करवाता रहा? और तो और, वह किस अस्पताल में था, ये भी पुलिस को पता नहीं चला. उसे कानपुर से दिल्ली भी भेज दिया गया.
- अगर ये गंभीर प्रकृति का अपराध नहीं था तो पुलिस ने उसे गिरफ्तारी के तुरंत बाद कोर्ट में पेश क्यों किया? पूछताछ क्यों नहीं की? अगर गंभीर प्रकृति का अपराध नहीं था तो पुलिस ने उसकी 14 दिन की रिमांड क्यों मांगी थी?
क्या है पूरा मामला?
8 फरवरी को कानपुर में तेज रफ्तार लैंबोर्गिनी कार ने कई लोगों को टक्कर मारी. गनीमत रही कि किसी की मौत नहीं हुई. टक्कर के बाद लोगों ने कार को घेर लिया. इसी बीच शिवम मिश्रा के बाउंसर आ गए और उन्होंने सुरक्षा घेरा बना लिया. इस घटना के अगले ही दिन ड्राइवर मोहन ने दावा किया कि गाड़ी वह चला रहा था. हालांकि, पुलिस ने चश्मदीदों के बयान के आधार पर शिवम को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया.
कानपुर की कोर्ट में शिवम मिश्री की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट नरेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि पुलिस ने गिरफ्तारी के सही कारण दर्ज नहीं किए थे, खासकर तब जब अपराधों में 7 साल से कम की सजा का प्रावधान हो. उन्होंने कोर्ट में दलील रखी कि ये गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों का उल्लंघन है.
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