- कानपुर देहात के मंगलपुर थाना क्षेत्र में प्रेम कहानी की शुरुआत नुमाइश में हुई और शादी थाना के मंदिर में हुई
- 21 वर्षीय शीलू और 20 वर्षीय सरस्वती ने अपनी मर्जी से बिना दबाव के शादी करने का फैसला किया
- शुरुआत में लड़की पक्ष ने इस रिश्ते को लेकर असमंजस और असमर्थता जताई थी लेकिन बाद में सहमति बनी
कहते हैं कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपते. जब प्यार परवान चढ़ता है, तो उसे न तो समाज की बंदिशें रोक पाती हैं और न ही परिवार की नाराजगी. कुछ ऐसा ही फिल्मी और रोमांचक नजारा कानपुर देहात के मंगलपुर थाना क्षेत्र में देखने को मिला, जहां एक प्रेम कहानी की शुरुआत मेलों की चकाचौंध (नुमाइश) में हुई और उसका सुखद अंत पुलिस थाने के मंदिर में जयमाला के साथ हुआ.

यह कहानी शुरू हुई थी कुछ समय पहले क्षेत्र में लगी एक नुमाइश (प्रदर्शनी) से. जैतीपुर के रहने वाले 21 वर्षीय शीलू पुत्र जगमोहन और जुरिया गांव की 20 वर्षीय सरस्वती पुत्री राम कुमार की नजरें इसी नुमाइश की भीड़ में टकराई थीं. मेलों की रंगीन रोशनी में शुरू हुई बातचीत कब प्यार में बदल गई, इसका पता शायद उन्हें भी नहीं चला. दोनों ने एक-दूसरे के साथ जीने-मरने की कसमें खा लीं.
प्रेम कहानी बिना विलेन के पूरी नहीं होती. यहां भी अड़चनें आईं. बताया जाता है कि शुरुआत में लड़की पक्ष सरस्वती के परिजन इस रिश्ते को लेकर कुछ असमंजस में थे और थोड़ी असमर्थता जताई थी. लेकिन शीलू और सरस्वती का इरादा पक्का था. दोनों बालिग थे और अपने फैसले पर अडिग रहे. अंततः बच्चों की जिद और मोहब्बत के आगे बड़ों की नाराजगी को झुकना पड़ा.

मामला मंगलपुर थाने पहुंचा. लेकिन यहां कोई एफआईआर नहीं लिखी गई, बल्कि दो दिलों का मिलन लिखा गया. 22 फरवरी की शाम, थाने का माहौल बदला-बदला सा था. प्रेमी युगल ने पुलिस के सामने एक लिखित समझौता पत्र पेश किया.
समझौता पत्र में दोनों ने साफ शब्दों में लिखा- हम एक-दूसरे से बेइंतहा मोहब्बत करते हैं. हम बालिग हैं, अपना अच्छा-बुरा समझते हैं और बिना किसी दबाव के, पूरे होशो हवास में 22 फरवरी से पति-पत्नी के रूप में साथ रहने का फैसला कर रहे हैं.
इसके बाद, पुलिस की मौजूदगी और परिजनों की रजामंदी के बीच थाना परिसर में स्थित मंदिर में दोनों ने भगवान को साक्षी मानकर शादी रचाई. पुलिस की वर्दी यहां सुरक्षा कवच बन गई, और मंदिर की घंटी शहनाई.

मंगलपुर थाने के एस.एस.आई. कमलेश यादव ने बताया कि कानूनन दोनों शीलू और सरस्वती बालिग हैं. भारतीय संविधान उन्हें अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने का अधिकार देता है. दोनों पक्षों की आपसी सहमति के बाद उन्होंने साथ रहने का निर्णय लिया है और पुलिस ने उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की है.
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