- हाईकोर्ट के आदेश पर कानपुर में क़ब्र खोदकर निकाली गई महिला की लाश.
- मौत के 12 दिन बाद कब्र से निकली लाश, क्या खुलेगा कायनात की मौत का राज.
- हत्या या आत्महत्या तीन डॉक्टरों का पैनल करेगा पोस्टमार्टम वीडियोग्राफी के साथ.
उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक झकझोर देने वाला और बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है. यहाँ बाबू पुरवा इलाके में एक नवविवाहिता की संदिग्ध मौत के बाद, इलाहाबाद हाई कोर्ट के सख्त आदेश पर 12 दिन पहले दफनाई गई लाश को दोबारा कब्र खोदकर बाहर निकाला गया है. इस कार्रवाई के दौरान कब्रिस्तान में भारी पुलिस बल और मजिस्ट्रेट मौजूद रहे, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. यह पूरी घटना अब आत्महत्या और दहेज हत्या की कानूनी जंग के बीच उलझ गई है.
क्या है पूरा मामला?
मृतका कायनात की शादी करीब 18 महीने पहले (डेढ़ साल पूर्व) कानपुर के बाबू पुरवा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बगाही इलाके में हुई थी. शादी के बाद सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन बीते 15 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में कायनात की मौत हो गई.
मौत के बाद ससुराल पक्ष के लोगों ने दावा किया कि कायनात ने 'फांसी लगाकर आत्महत्या' की है. जल्दबाजी में कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए शव को बगाही कब्रिस्तान में दफना दिया गया था.
मायके पक्ष का आरोप: "यह आत्महत्या नहीं, हत्या है"
कायनात की मौत की खबर मिलते ही उसके मायके वाले सन्न रह गए. उन्होंने ससुराल पक्ष की आत्महत्या वाली थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया. परिजनों का सीधा और साफ आरोप है कि कायनात ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसकी दहेज के लिए गला दबाकर हत्या की गई है और सबूत मिटाने के लिए शव को आनन-फानन में दफना दिया गया.
स्थानीय स्तर पर उचित कार्रवाई न होते देख, इंसाफ के लिए पीड़ित परिवार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. कोर्ट ने मामले की गंभीरता और मायके पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद शव को दोबारा कब्र से निकालकर निष्पक्ष जांच कराने के कड़े आदेश दिए.
हाई कोर्ट के आदेश पर प्रशासनिक एक्शन
हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में शुक्रवार को प्रशासनिक अमला हरकत में आया. उन्नाव के एसडीएम रामदेव निषाद और भारी पुलिस फोर्स की निगरानी में बगाही कब्रिस्तान में खुदाई शुरू की गई. 12 दिन बाद जब कायनात का शव कब्र से बाहर निकाला गया, तो वहाँ मृतका के बिलखते परिजनों के अलावा भारी संख्या में स्थानीय लोग इकट्ठा हो गए.
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्नाव पुलिस के साथ-साथ बाबू पुरवा थाना पुलिस और अतिरिक्त पीएसी बल तैनात रहा.
डॉक्टरों का विशेष पैनल और वीडियोग्राफी
प्रशासन ने इस मामले में पूरी पारदर्शिता बरतने का फैसला किया है. उन्नाव एसडीएम रामदेव निषाद ने मीडिया को बताया कि "माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में शव को कब्र से निकलवाया गया है. मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में पूरी विधिक प्रक्रिया अपनाई गई है. डॉक्टरों के विशेष पैनल से दोबारा पोस्टमार्टम कराया जाएगा ताकि मौत के सही कारणों का सटीक पता चल सके. इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी ताकि कोई संदेह न रहे."
"हार नहीं मानेंगे, सच सामने आएगा"
कब्रिस्तान में मौजूद मृतका की बहन रूबी ने रोते हुए अपना आक्रोश व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि "मेरी बहन ने आत्महत्या नहीं की, उसे दहेज के राक्षसों ने मिलकर मारा है. हमें पहले दिन से ही उनकी नीयत पर शक था, इसलिए हमने हार नहीं मानी और कोर्ट गए. आज मेरी बहन की कब्र खुदी है, हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है. पोस्टमार्टम के बाद सच पूरी दुनिया के सामने आ जाएगा."
आगे क्या होगा?
पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर दोबारा पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. अब सबकी नजरें डॉक्टरों के पैनल द्वारा तैयार की जाने वाली नई पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं. यह रिपोर्ट ही तय करेगी कि कायनात के गुनहगार सलाखों के पीछे जाएंगे या नहीं. इलाके में इस घटना को लेकर तनाव और शोक का माहौल बना हुआ है.
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