उत्तर प्रदेश के झांसी में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. प्रेमनगर थाना क्षेत्र में सक्रिय एक संगठित साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन आरोपी अभी फरार हैं. पुलिस के अनुसार यह गिरोह लंबे समय से देशभर में साइबर ठगी से जुड़े लेनदेन को संचालित कर रहा था और 56 बैंक खातों के माध्यम से करीब 403 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन कर चुका है. जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य पढ़ाई कर रहे छात्र हैं, जो साइबर अपराध से अर्जित रकम को फ्रीज होने से बचाने के लिए USDT में बदलकर विदेशी हैंडलरों के पास भेज देते थे.
प्रेमनगर से संचालित हो रहा था नेटवर्क
झांसी पुलिस साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है. इसी क्रम में प्रेमनगर थाना पुलिस और साइबर सेल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक यह संगठित गिरोह झांसी से संचालित हो रहा था और देश के विभिन्न राज्यों में हुए साइबर अपराधों से जुड़े धन के लेनदेन में भूमिका निभा रहा था. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन और हिसाब-किताब से जुड़े रजिस्टर बरामद किए हैं. इन दस्तावेजों में कथित तौर पर लेनदेन और खातों से जुड़ी जानकारी दर्ज थी.
आज दिनांक 28.08.2026 को थाना प्रेमनगर की साइबर सेल टीम द्वारा प्रभावी कार्यवाही करते हुए 06 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। अभियुक्तगण द्वारा साइबर ठगी की धनराशि को यूएसडीटी में परिवर्तित कर विदेशी हैंडलर को उपलब्ध कराया जाता था, जिससे धनराशि को फ्रीज होने से बचाया जा सके तथा… pic.twitter.com/eSDmKgjDEE
— Jhansi Police (@jhansipolice) August 28, 2026
56 खातों से जुड़ीं 325 शिकायतें
पुलिस के अनुसार गिरोह 56 बैंक खातों का संचालन कर रहा था. इन खातों के संबंध में देशभर से 325 साइबर शिकायतें दर्ज हैं. जांच में यह भी सामने आया कि इन खातों के जरिए कुल 403 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया. अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क साइबर ठगी से प्राप्त धन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने और उसे छिपाने का काम करता था. इसी वजह से मामलों की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच की जा रही है.

Cyber Fraud Bust Jhansi: झांसी पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के साथ
USDT में बदलकर विदेशी हैंडलरों तक पहुंचाते थे रकम
पुलिस का कहना है कि गिरोह साइबर अपराध से प्राप्त रकम को बैंक खातों में रखने के बजाय उसे तुरंत क्रिप्टोकरेंसी USDT में परिवर्तित कर देता था. इससे रकम को फ्रीज होने से बचाया जा सकता था और उसे आसानी से विदेशी हैंडलरों तक पहुंचाया जाता था. जांच एजेंसियों को शुरुआती पूछताछ में विदेशी कनेक्शन के संकेत भी मिले हैं. पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क का संचालन किन देशों से जुड़े हैंडलरों के माध्यम से किया जा रहा था.
छात्र निकले गिरोह के सदस्य
मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में कई छात्र शामिल हैं. पुलिस के अनुसार कोई इंटरमीडिएट कर रहा है तो कोई ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा है. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने इस तरह के साइबर नेटवर्क की कार्यप्रणाली दूसरे गिरोहों से सीखी थी और बाद में झांसी में अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया.
चाइनीज गेम है; पूरे देश से 325 साइबर शिकायतें : पुलिस
सहायक पुलिस अधीक्षक अरीबा नोमान ने बताया कि 'झांसी में प्रेमनगर थाने की साइबर सेल टीम ने बड़ी कार्रवाही की है. जिसमें 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. जिसमें दीपक वर्मा उर्फ सत्यम, अदनान हुसैन, आदिल हुसैन, जान पाल अभिषे चौधरी और अर्चित श्रीवास्तव नाम के आरोपी शामिल हैं. यह साइबर क्राइम से आने वाली रकम को यूएसडीटी में बदलकर एक फॉरेन हैंडलर दिया करते थे. जिससे वह पैसे फ्रीज न हो सके. इस क्राइम में कुल 56 खाते हैं जिसमें पूरे देश से 325 साइबर शिकायतें हैं. जिमसें धोखाधड़ी का कुल 403 करोड एमाउंट है, जिसका इन्होंने उन सभी खातों में लेन-देन किया है. इसमें तीन आरोपी अरमान, अर्श और मोहम्मद फैज फरार चल रहे हैं. यह 9 लोगों का गिरोह था जो प्रेमनगर से चलता था. इनके पास से 7 मोबाइल फोन और रजिस्ट्रर है, जिसमें हिसाब रखते थे. इनमें मुख्य आरोपी दीपक वर्मा उर्फ सत्यम है. यह यू मनी नाम से एक एप संचालित करता था. यह पैनल की तरह चलता है. जिससे वह आसानी से लेन-देन कर लेता था. यह गेम चाइनीज हैं. इनमें अधिकतर साउथ-ईस्ट एशियन कंट्री के हेंडलर मिलते हैं. यह भी छात्र हैं. जिनमें कोई इंटरमीडिएट कर रहा है तो कोई ग्रेजुएशन. इस गैंग ने दूसरे गैंगों से सीखा और अब झांसी में कर रहे थे.'
फरार आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और साइबर नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों की जानकारी जुटाई जा रही है. वहीं फरार चल रहे तीन आरोपियों की तलाश के लिए दबिश दी जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि मामले में डिजिटल साक्ष्यों, बैंक खातों, मोबाइल डेटा और विदेशी कनेक्शन की भी जांच की जाएगी, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके.
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