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'सदन में आचरण न्यायपूर्ण दिखना भी चाहिए', भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में बोले ओम बिरला

ओम बिरला ने कहा, "आधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया के युग में जनप्रतिनिधियों के प्रत्येक आचरण पर जनता की दृष्टि रहती है, इसलिए संसदीय शिष्टाचार और अनुशासन का पालन और भी अधिक आवश्यक हो गया है."

'सदन में आचरण न्यायपूर्ण दिखना भी चाहिए', भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में बोले ओम बिरला

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का आगाज करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय मर्यादा पर बड़ा संदेश दिया. उन्होंने साफ किया कि पीठासीन अधिकारी का पद राजनीति से ऊपर होता है, इसलिए उनका आचरण न केवल निष्पक्ष होना चाहिए, बल्कि जनता के बीच वैसा दिखना भी चाहिए.

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'सदन जितना अधिक चलेगा, उतनी ही अधिक सार्थक होगा'

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि, "सदन जितना अधिक चलेगा, उतनी ही अधिक सार्थक, गंभीर और परिणामोन्मुख चर्चा संभव होगी. विधायिका के माध्यम से जनता की आकांक्षाएं और आवाज शासन तक पहुंचती है और उनका समाधान होता है. ऐसे में राज्य विधानमंडलों की कार्यवाही का घटता समय सभी के लिए चिंताजनक है." सम्मेलन में 28 राज्यों, 3 केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के साथ 6 विधान परिषदों के पीठासीन अधिकारी हिस्सा ले रहे  हैं. 

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'चारों तरफ से सूचना का प्रवाह होता है'

ओम बिरला ने कहा कि, "आधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया के युग में जनप्रतिनिधियों के प्रत्येक आचरण पर जनता की दृष्टि रहती है, इसलिए संसदीय शिष्टाचार और अनुशासन का पालन और भी अधिक आवश्यक हो गया है. आज तकनीक के युग में जब चारों तरफ से सूचना का प्रवाह होता है, तब सदन की प्रामाणिकता बनाए रखना, हम सभी की महती जिम्मेदारी है."

उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन जैसे मंच लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ाते हैं. ये सम्मेलन आपसी समन्वय को मजबूत करते हैं और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाते हैं. इन सम्मेलनों से देशभर में नीतियों और कल्याणकारी उपायों में सामंजस्य स्थापित करने में भी सहायता मिलती है.

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों के रूप में यह हमारा कर्तव्य है कि सदन में विशेष रूप से नये और युवा सदस्यों को पर्याप्त अवसर प्रदान किए जाएं, ताकि विधानमंडल जनता की समस्याओं को उठाने का सबसे प्रभावी मंच बना रहे.

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बता दें तीन दिवसीय इस सम्मेलन में आगामी दो दिन पूर्ण सत्रों में विधायी प्रक्रियाओं में तकनीक का उपयोग, विधायकों का क्षमता-निर्माण तथा जनता के प्रति विधायिका की जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी.

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