संभल जिले के कोतवाली क्षेत्र स्थित जगत मोहल्ले में 1978 के दंगों के 47 साल बाद प्रशासन ने तीन परिवारों को उनके बाग वापस सौंप दिए. यह परिवार दंगों के बाद अपना घर बेचकर पलायन कर गए थे. घटना को लेकर प्रशासन ने संबंधित इलाके में जांच की और परिवारों को उनका अधिका दिलवाया है.
दरअसल, यह मामला संभल के जगत मोहल्ले का है, जहां डीएम और एसपी पुलिस टीम के साथ उस इलाके में पहुंचे. यहां पर पहले तीन परिवारों का बाग था, लेकिन बाद में स्कूल का निर्माण कर दिया गया. डीएम ने स्कूल के संचालक डॉ. शाहवेज से जमीन के कागजात मांगे, लेकिन वे पूरी जमीन के कागज पेश नहीं कर पाए. वहीं, परिवार के सदस्य इन दावों को फर्जी बताते हुए इसके खिलाफ थे.
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पुलिस और प्रशासन की टीम ने 10,000 स्क्वायर फीट जमीन को कब्जा मुक्त करवा लिया. मंगलवार को भी एएसपी, एसडीएम और राजस्व विभाग की टीम ने 15,000 स्क्वायर फीट जमीन से 10,000 स्क्वायर फीट भूमि कब्जा मुक्त कराई.
यह मामला उस समय का है जब 1978 के दंगों के बाद रामभरोसे, नन्नूमल और तुलसीराम का पूरा परिवार अपने घर बेचकर पलायन कर गया था. ये परिवार चंदौसी, नरौली और मुरादाबाद जैसे स्थानों पर जाकर रहने लगे थे. इन परिवारों ने राजस्व विभाग और पुलिस से भी इस मामले की शिकायत की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. इसके बाद, परिवारों ने सीएम पोर्टल पर भी शिकायत दी, लेकिन वहां से भी कोई न्याय नहीं मिला.
लंबे इंतजार के बाद प्रशासन ने अब उनके अधिकार बहाल किए हैं, हालांकि लड़ाई लड़ने वाले रामभरोसे, नन्नूमल और तुलसीराम की अब मृत्यु हो चुकी है. अब उनके परिवारों को कब्जा दिलवाया गया है. डीएम राजेंद्र पेंसिया ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, "इस स्कूल के पीछे की भूमि आज भी कागजों में बाग के नाम से दर्ज है और अभी तक किसी के नाम से कोई दाखिल खारिज नहीं हुआ है."
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