- सीएम योगी ने कहा कि वंदे मातरम का विरोध करने वालों को पार्टी से बाहर करने और कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है
- योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के आचरण को अस्वीकार्य करार देते हुए सदन में उनकी गैरमौजूदगी पर टिप्पणी की
- उन्होंने कहा कि प्रदेश का सामाजिक और आर्थिक माहौल पहले से खराब था और इसकी झलक सदन की अभिभाषण में भी दिखी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वंदे मातरम को गाने को लेकर शुरू हुए विवाद और अलग-अलग दलों के द्वारा इसका विरोध करने को लेकर सदन में एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने सदन में बोलते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर सीधा निशाना साधा है. सीएम योगी ने वंदे मातरम का विरोध करने वालों को नसीहत देते हुए सदन में कहा कि ये वो लोग हैं जो बाबर की कब्र में सजदा का समर्थन करते हैं और वंद मातरम का विरोध करते हैं. माफियाओं की कब्र में फतिया पढ़ने के लिए जाते हैं. कांग्रेस और सपा के नेता भी बोल रहे हैं.
यूपी विधानसभा में CM योगी ने कहा, 'वंदे मातरम का अपमान कोई नहीं कर सकता है और जो विरोध करता है उसका कान पकड़ कर बाहर करना चाहिए' #CMYogi pic.twitter.com/6mL0pgNCwK
— NDTV India (@ndtvindia) February 13, 2026
सीएम योगी ने आगे कहा कि ये लोग कह रहे हैं कि वंदे मातरम नहीं गाएंगे. हिंदुस्तान का खाएंगे लेकिन वंदे मातरम नहीं गाएंगे. आपकी पार्टी के ही नेताओं ने कहा है. समाजवादी पार्टी के एक सांसद ने कहा है. कांग्रेस के भी एक सांसद ने कहा है. अगर आप ऐसे सांसदों के बयान का विरोध करते हैं तो मैं आपका स्वागत करता है. पार्टी में ये लागू होना चाहिए, जैसे की हम कह सकते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में कोई भी वंदे मातरम का अपमान नहीं कर सकता. उसी तरह कांग्रेस और दूसरी पार्टियों में भी ये नियम बनना चाहिए. और जो व्यक्ति वंदे मातरम का विरोध करता है उसे कान पकड़कर और धक्का मारकर पार्टी से बाहर करना चाहिए. समाजवादी पार्टी को भी इस बात की घोषणा करना चाहिए. वंदे मातरम का जो विरोध करेगा उसे वही जाना चाहिए जहां उसे वंदे मातरम के स्वर का विरोध करने वाला मिलता हो. हिंदुस्तान की धरती पर तो उसे रहने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए.
सदन में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अचानक प्रदेश का परसेप्शन खराब नहीं हुआ था. यही आचरण था, जिस आचरण से बिटिया घबराती थी और व्यापारी कारोबार समेटता था.उसकी एक झलक अभिभाषण के दौरान भी यहां पर देखने को मिल रही थी और वह किसी भी स्थिति में मुझे नहीं लगता है कि प्रदेश का कोई भी व्यक्ति उसको स्वीकारेगा.आपकी बात व्यवहारिक थी और आप व्यवहारिक बात बोलने का प्रयास भी करते हैं, अलग विषय है कि आपके हाथ बंधे हुए हैं, लेकिन आपकी बातों को सुनकर के मुझे ये चीजें लग रही थीं, मैं आपकी सभी बातों का जवाब भी दूंगा, और जो ग़ालिब ने भी कहा था, कि...
ग़ालिब उम्र भर मैं ये भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी और आईना साफ़ करता रहा.
इस बात को लेकर मुझे यही लगा कि आप इसीलिए सदन में उपस्थित नहीं हुए थे क्योंकि आपके नियंत्रण से बाहर समाजवादी पार्टी के सदस्य रहे होंगे.इसलिए आपने कहा होगा कि अब इन उच्छृंखलों के बीच में रहने से अच्छा है कि हम स्वयं बाहर रहें, लेकिन आचरण जो भी था वो अच्छा नहीं था.वो अच्छा आचरण नहीं था और उस अच्छे आचरण की दृष्टि से आज इस सदन की अभिभाषण की शुरुआत मैं यहीं से करता हूं.आप सनातन की बात कर रहे थे,सनातन धर्म के सबसे बड़े व्याख्या कार हैं वो महर्षि वेदव्यास जी हैं,उन्होंने वेदों को लिपिबद्ध करके आने वाली पीढ़ी को दिया.
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