यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने शनिवार को जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पहले राम का नाम लेने पर ही प्रतिबंध था, अगर उनका नाम लो तो गोलियां चलती थीं. तब भगवान राम का भक्त अयोध्या नहीं जा सकता था. अब तो अयोध्या में रामभक्त के अलावा कोई रामद्रोही घुस ही नहीं सकता, ऐसी व्यवस्था कर दी गई है. आज अयोध्या चमक रही है, एक नई अयोध्या का मॉडल आपके सामने खड़ा हुआ है. हर व्यक्ति खुद को गौरव की अनुभूति करता है. आपके पूर्वज आपको आर्शीवाद दे रहे होंगे.
सीएम योगी शनिवार को गोंडा जिला विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास करने पहुंचे. इस दौरान उन्होंने जनसभा को भी संबोधित करते हुए पूर्व सरकारों पर जमकर निशाना साधा.
अब तो श्री अयोध्या धाम में राम भक्त के अलावा कोई 'रामद्रोही' घुस ही नहीं सकता... pic.twitter.com/lX0nTdAFGX
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) June 6, 2026
भाई-भतीजावाद ने नहीं होने दिया विकास
सीएम ने कहा कि गोंडा का विकास तुष्टिकरण की भेंट चढ़ गया, भाई-भतीजावाद की भेंट चढ़ गया. जहां सरयू मईया की असीम कृपा रहनी थी, वह जनपद पिछड़ता गया. एक समय ऐसा भी आ गया था कि गोंडा के नौजवानों के सामने भी पहचान का संकट आ गया था. जब भी बाहर जाते थे तो नाम सुनकर ही अन्य प्रदेश के लोग दस कदम की दूरी बना लेते थे.
पहले दुर्गा मूर्ति का विसर्जन नहीं हो पाता था- सीएम
सीएम ने आगे कहा कि मुझे याद है 2015-16 में इस गोंडा में भी दुर्गापूजा में भी दंगा करने का प्रयास हुआ था. मां दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन नहीं किया जाता था. पर्व, त्योहार के पहले उपद्रव शुरू हो जाते थे. 2017 के पहले सत्ता में बैठे लोग इन दंगाइयों को प्रश्रय देते हुए इनके सामने नतमस्तक रहते थे. और प्रदेश में महीनों कर्फ्यू रहते थे.
उत्सव में भंग डालने वाले का भविष्य स्वाहा
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पर्व त्योहार पर अब कोई व्यवधान नहीं डाल सकता. उत्सव के रंग में किसी ने भंग करने का प्रयास किया तो वर्तमान तो जाएगा ही, भविष्य भी स्वाहा हो जाएगा. अब कोई रंग में भंग डालने का काम नही कर सकता. पर्व त्योहार में कोई व्यवधान नहीं डाल सकता. डबल इंजन की सरकार की क्या ताकत होती है तो ताकत देखनी है तो 500 वर्षों में जो नहीं हुआ, वो अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के मंदिर के निर्माण के बाद वह होकर आ गया.
असुरक्षा के वातावरण में न निवेश होता है, न विकास होता है. पहचान का संकट अलग खड़ा होता है. बहन बेटियां असुरक्षित महसूस करती हैं. विकास में पिछले पायदान पर जब हमारी गिनती होती है तो सम्मान नहीं होता है.
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