- प्रयागराज के माघ मेले में 6 साल के बाल राम श्रीश बाहुबली महाराज ने भक्ति और धर्म का संदेश दिया.
- श्रीश महाराज ने भगवद्गीता के श्लोकों का धाराप्रवाह उच्चारण कर साधु-संतों और श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया.
- उन्होंने योगी सरकार की माघ मेले की व्यवस्थाओं की प्रशंसा करते हुए महाकुंभ जैसी सुविधाएं मिलने की बात कही.
प्रयागराज के संगम तट पर चल रहे माघ मेले में इन दिनों अध्यात्म और भक्ति की धारा बह रही है. साधु-संतों के अलग-अलग रंग इस मेले की शोभा बढ़ा रहे हैं. इसी बीच छह साल के बाल राम श्रीश बाहुबली महाराज ने अपनी मौजूदगी से सबका ध्यान खींच लिया है. श्रृंगवेरपुर धाम से आए श्रीश महाराज भगवान राम के बाल रूप में संगम की रेती पर दर्शन दे रहे हैं.
भगवद्गीता के श्लोकों का धाराप्रवाह उच्चारण कर श्रीश महाराज साधु-संतों और श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य धर्म का प्रचार करना और सनातन धर्म के प्रति लोगों को जागरूक करना है. श्रीश महाराज रोज मां गंगा की पूजा करते हैं और राम की वेशभूषा में बच्चों को संदेश देते हैं कि वे माता-पिता की बात मानें और गुरु का सम्मान करें.
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योगी की हुई तारीफ
माघ मेले की व्यवस्थाओं को लेकर उन्होंने योगी सरकार की सराहना की और कहा कि महाकुंभ जैसी सुविधाएं दी गई हैं.
बाल राम श्रीश बाहुबली महाराज पहले भी सुर्खियों में रहे हैं. अयोध्या में रामलला मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान उन्होंने भगवान राम के बाल रूप में दर्शन दिए थे. वे तमाम श्लोक कंठस्थ जानते हैं और कई बार सीएम योगी के मंच पर शिव तांडव सुनाकर सम्मानित हो चुके हैं.
प्रेमानंद महाराज का किया था समर्थन
बता दें कि संत प्रेमानंद महराज पर की गई टिप्पणी के बाद श्रृंगवेरपुर धाम प्रयागराज के रहने वाले छह साल के बालक राम श्रीश बाहुबली महाराज उनके समर्थन में भी उतरे थे. उन्होंने कहा था कि प्रेमानंद महाराज जी राधा नाम का जप करते हैं, जिनकी कृपा से किडनी खराब होने के बावजूद भी वे जीवित हैं. सीएम योगी आदित्यनाथ के मंच पर उनके बाहुबली श्रीश महाराज ने शिव तांडव सुनाया था. इसके बाद सीएम ने इन्हें सम्मानित भी किया था.
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2024 में सुर्खियों में आए थे
प्रयागराज के जिस श्रृंगवेरपुर धाम से श्रीश महाराज आए हैं, कहा जाता है कि उसका भगवान राम से बेहद गहरा नाता है. राजा दशरथ ने यहीं पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था और भगवान राम के बाल सखा निषादराज यहीं के रहने वाले थे. मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने यहीं राजसी वेशभूषा का त्याग किया था. उनके वनवासी जीवन की शुरुआत यहीं से हुई थी और केवट ने यहीं से उन्हें गंगा नदी पार कराकर चित्रकूट की सीमा में प्रवेश कराया था. छह साल के श्रीश बाहुबली महाराज 2024 में भी सुर्खियों में आए थे जब अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान भगवान राम के बाल रूप में लोगों को दर्शन देने पहुंचे थे. श्रीश महाराज भले ही छह साल की उम्र के हो लेकिन हर बात का फर्राटेदार तरीके से जवाब देते हैं.
श्रीश महाराज ने कहा, 'भारत विश्व गुरु बनेगा, सनातन का मान-सम्मान पूरी दुनिया में बढ़ेगा.' उन्होंने अपनी बात गीत के रूप में भी सुनाई.
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