बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती के अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निष्कासित किए जाने और अपनी सुरक्षा को लेकर दिए बयान के बाद एक बार फिर लोगों को गेस्ट हाउस कांड याद आ गया. गेस्ट हाउस कांड के कुछ ही समय बाद मुलायम सरकार बर्खास्त हो गई थी और मायावती को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी. तब मायावती अपनी सुरक्षा को लेकर इतनी चिंतित थीं कि वो शपथ लेने के बाद राजभवन से बाहर नहीं निकलीं और वहीं रात गुजारी.
मायावती ने शपथ लेने के बाद राज्यपाल से कहा कि अभी मैं बाहर नहीं निकलना चाहती और वो रातभर वहीं रुक गईं. उन्होंने शनिवार को ही कहा था कि महिला होने की वजह से उन्हें अपनी सुरक्षा संबंधी चिंता है और इसीलिए वो अपने सबसे छोटे भाई आनन्द कुमार को मजबूरी में अपने साथ रखती हैं.

क्या है लखनऊ का गेस्ट हाउस कांड?
दो जून 1995 को लखनऊ में गेस्ट हाउस कांड हुआ था. उस समय उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन की सरकार थी. सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे. किसी बात से नाराज होकर बसपा ने इस सरकार से अपना समर्थन वापस लेने का फैसला किया था. मायावती अपने समर्थकों के साथ लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस में बैठक कर रही थीं. इसकी भनक जब सपा को लगी तो उसके कुछ विधायक और अन्य नेता वहां पहुंच गए. उन्होंने मायावती और अन्य बसपा नेताओं पर हमले की कोशिश की. नारेबाजी और बसपा नेताओ के साथ मारपीट की. कहा ये भी जाता है कि मायावती के साथ भी बदतमीजी की गई थी. उन्होंने खुद को एक कमरे में बंद कर अपने आप को बचाया था. मायावती के समर्थन में वहां कुछ बीजेपी नेता भी पहुंचे. बाद में मुलायम सिंह यादव की सरकार गिर गई थी. यह घटना यूपी की राजनीति में गेस्ट हाउस कांड के नाम से मशहूर है. इसे उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक काला अध्याय माना जाता है.

सपा-बसपा की दोश्ती और दुश्मनी
इसके बाद सपा और बसपा रेल की दो पटरियों की तरह हो गए. दोनों ने 2019 से पहले तक कोई समझौता नहीं किया. साल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सपा और बसपा ने हाथ मिलाया. यह तब हुआ जब सपा की कमान अखिलेश यादव के हाथ में आई. इसके लिए अखिलेश बसपा प्रमुख मायावती के पास गए थे. इस घटना के करीब ढाई दशक बाद मायावती ने 2019 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव के लिए मैनपुरी में वोट मांगा था. ये सभी नेता मैनपुरी में एक रैली में शामिल हुए थे. कहा यह भी जाता है कि अखिलेश यादव के कहने पर मायावती ने 26 फरवरी, 2019 को सुप्रीम कोर्ट से गेस्ट हाउस कांड से जुड़ा मामला वापस ले लिया था. सपा बसपा का यह गठबंधन मायावती के लिए ठीक रहा. उनकी लोकसभा में सीटों की संख्या शून्य से 10 तक पहुंच गई. लेकिन सपा की वहीं की वहीं रही. इस लोकसभा चुनाव के बाद बसपा ने सपा से अपना गठबंधन तोड़ लिया.

परिवारवाद के आरोप पर मायावती का जवाब
परिवारवाद के आरोप पर बसपा अध्यक्ष ने कहा कि मेरे अविवाहित होने के नाते मुझे मजबूरी में, अपने सगे भाई-बहनों में से एक को अपने साथ रखने की जरूरत पड़ी है, जो मेरी देखभाल के साथ-साथ मेरी पूरी निगरानी में पार्टी की अहम जिम्मेदारियों को भी काफी लंबे समय से निभा रहे हैं, हालांकि इसका लाभ अब उनके परिवार के लोग भी उठाएं, ये पार्टी व मूवमेन्ट के हित में सही नहीं होगा.
मायावती ने कहा कि अब बहुजन समाज पार्टी में भतीजों को कोई पद नहीं मिलने वाला है. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि भविष्य में उनकी भतीजी दीपिका आनंद को पार्टी में कोई जिम्मेदारी मिल सकती है, वो भी उनकी कार्य क्षमता पर निर्भर करेगा.

उन्होंने कहा कि कांशीराम जिस तरह परिवारवाद के खिलाफ रहे, उनकी शिष्या होने के नाते मैं भी उस पर डटी हूं, और इस पर अमल करके भी दिखाया है. यदि मैं महिला नहीं होती, तो मैं मान्यवर कांशीराम की तरह ही अपने भाई-बहनों में से किसी को भी अपने साथ नहीं रखती.
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