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बिना रसीद चंदा, जेवरों का हिसाब नहीं, शिकायतों पर कहा जाता था- जाने दो, राम जी देख रहे हैं

राम मंदिर में हो रही गड़बड़ियों की जानकारी ट्रस्ट को काफी पहले से थी. लेकिन इस बात यह कहकर दबाता जाता रहा कि बात बाहर जाएगी यो बदनामी होगी. फिर कभी ये भी सोचा गया कि भगवान गड़बड़ी करने वालों को देख ही रहे हैं.

बिना रसीद चंदा, जेवरों का हिसाब नहीं, शिकायतों पर कहा जाता था- जाने दो, राम जी देख रहे हैं
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गजब कहानी सामने आई है.
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  • अयोध्या के राम मंदिर में दान और आभूषणों के लेखा-जोखा में गड़बड़ियों और शिकायतों की जानकारी थी.
  • ट्रस्ट ने बिना रसीद या कच्ची रसीद के नाम पर दान की चोरी के आरोपों को नजरअंदाज किया गया.
  • आभूषणों के हिसाब किताब में अनियमितताएं थीं, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए.
अयोध्या/लखनऊ:

Ram Mandir Donation Theft: अयोध्या के राम मंदिर में गड़बड़ियां थीं, गड़बड़ियों की शिकायतें थीं, इसे दुरुस्त करने का सुझाव था और ये बात लगभग सबको पता थी. गड़बड़ियों, शिकायतों और सुझावों के बीच इन जानकारियों को नजरअंदाज किया गया. जिम्मेदार लोगों को जब कुछ बताया जाता तो जवाब आता कि 'जाने दो, राम जी सब देख रहे हैं'. इसी भगवान भरोसे वाले रवैये की वजह से शुरू में जो छोटी गड़बड़ियां थीं, वो धीरे-धीरे बढ़ती चली गईं और आज नतीजा ये है कि पूरा ट्रस्ट शक के घेरे में है. 

कच्ची रसीद के नाम पर दान के पैसों की चोरी

दरअसल, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने अपने गठन की शुरुआत में ऑडिट से जुड़े कुछ विश्वसनीय लोगों से रोज़मर्रा का लेखा-जोखा देखने और सुझाव देने को कहा था. इन ऑडिटर्स ने बताया कि जो दान के पैसे आ रहे हैं, उसमें कुछ गड़बड़ियां हो रही हैं. बताया गया कि बिना रसीद के चंदा लिया जा रहा है, कुछ लोग कच्ची रसीद के नाम पर पैसे लेकर इधर-उधर कर रहे हैं. 

आभूषणों का भी कोई हिसाब नहीं, शिकायत के बाद भी 

आरोप ये भी लगा कि आभूषणों का कोई हिसाब ठीक से नहीं हो रहा है. इन सुझावों के बावजूद ट्रस्ट ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया. सूत्र बता रहे हैं कि जब किसी की शिकायत आती तो उसे बुलाकर “झिड़की” दे दी जाती लेकिन उन पर ना कार्रवाई होती और ना ही व्यवस्था के कोई बड़ा बदलाव करने की पहल ही दिखाई दी. 

समय बढ़ता गया और मंदिर बन कर तैयार हो गया. पहले मंदिर निर्माण के लिए चंदा आता था लेकिन प्राण प्रतिष्ठा के बाद भगवान के चरणों में चढ़ावा आने लगा. चंदा चढ़ावे में बदल गया लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट ने सिस्टम में कोई प्रोफ़ेशनल बदलाव नहीं किए. 

बदनामी का डर और भगवान के न्याय के भरोसे छोड़ दी गई गड़बड़ी

विश्व हिंदू परिषद के लोगों ने व्यवस्था में लगे लोगों का कारसेवकपुरम से जुड़ाव देखकर ये मान लिया था कि “थोड़ा-बहुत” तो ये लोग करेंगे ही लेकिन धीरे-धीरे गड़बड़ी थोड़ा से बहुत में बदल गई. कभी ये सोचा गया कि बात बाहर जाएगी यो बदनामी होगी तो कभी ये सोचा गया कि भगवान गड़बड़ी करने वालों को देख ही रहे हैं. 

यानी बदनामी और भगवान के न्याय के नाम पर गड़बड़ी होने दी गई लेकिन गड़बड़ लोगों पर कोई एक्शन नहीं हुआ. नतीजा ये रहा कि कार्रवाई ना होने से मन बढ़ता गया और उसका नतीजा आज सबके सामने है.

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लेखक के बारे में
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रनवीर सिंह
रिपोर्टर
रणवीर लगभग 18 वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। यूपी के गोरखपुर के रहने वाले रणवीर वर्तमान में एनडीटीवी के ब्यूरो चीफ पद पर लखनऊ में कार्यरत हैं। इन 1... और पढ़ें
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