- राम मंदिर में वीआईपी दर्शन के लिए कोई स्पष्ट मानक नहीं, लेकिन ट्रस्ट के करीबी खास दर्शन कराते थे
- मंदिर परिसर में सुरक्षा के कई स्तर थे, लेकिन ट्रस्ट के करीबी अपने प्रभाव से अपनों को खास दर्शन कराते थे
- राम मंदिर में वीआईपी दर्शन के लिए दर्शन से कम से कम चौबीस घंटे पहले फॉर्म भरना आवश्यक होता है
अयोध्या के राम मंदिर के कथित चंदा और चढ़ावा चोरी के मामले में अब कई तरह के आरोप लग रहे हैं. एक आरोप मंदिर में वीआईपी दर्शन को लेकर भी है. कहा जा रहा है कि वीआईपी दर्शन का कोई मानक नहीं था. ट्रस्ट के करीबियों के हाथ में इतनी ताकत दे दी गई कि जिसको चाहें वीआईपी बना दें और मंदिर ले जाकर पूजा पाठ करा दें. यानी दर्शन का अलग किस्म का इको-सिस्टम चलाया जा रहा था.
आम आदमी को कराए जाते थे खास दर्शन
राम मंदिर की व्यवस्था में लगे टिन्नू यादव जैसे लोग पूरी व्यवस्था को अपने हाथ में रखकर चला रहे थे. राम मंदिर परिसर में सुरक्षा के कई घेरे हैं, इसमें स्थानीय पुलिस, पीएसी, एसएसएफ, सीआरपीएफ और एनएसजी कमांडो के अलावा दो निजी कंपनियों के सिक्योरिटी गार्ड्स हैं. इतनी सारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ट्रस्ट के सदस्यों से जुड़े लोगों के एक इशारे पर कोई भी आम आदमी खास बनकर रामलला के दर्शन कर लेता था.
वीआईपी दर्शन के लिए फॉर्म भरना जरूरी
अयोध्या के राम मंदिर में पैसे देकर वीआईपी दर्शन की सुविधा नहीं है. यहां या तो आम आदमी की तरह लाइन में लगकर भगवान के दर्शन की व्यवस्था है या फिर लोकल प्रशासन, पुलिस, मंदिर ट्रस्ट या सिक्योरिटी से जुड़े लोग अपने करीबियों या सच में वीआईपी का सुलभ दर्शन सुनिश्चित कराते हैं. इसके लिए एक फॉर्म बनाया गया है. इस फॉर्म को दर्शन से कम से कम 24 घंटे पहले भरकर देने पर उसकी बाकायदा एंट्री रजिस्टर की जाती है और उसके बाद प्रोटोकॉल दर्शन हो पाता है.
ज्यादातर मंदिरों में खास दर्शन आम बात
सुलभ दर्शन व्यवस्था के तौर पर फॉर्म भरकर एंट्री कराने के नियम के बीच राम मंदिर की व्यवस्था में लगे प्राइवेट कर्मचारी अपने प्रभाव की वजह से अपनों को मंदिर परिसर में एंट्री कराते थे. सुरक्षाकर्मी जानते थे कि अमुक व्यक्ति के कहे को मानना ही होता है, इसलिए वो फ्रिस्किंग यानी शरीर की जांच करते और कोई आपत्तिजनक चीज न मिलने पर एंट्री की अनुमति दे देते थे. ये कोई नई या अनोखी बात नहीं है. देशभर के ज्यादातर मंदिरों में ये होता है लेकिन अब चूंकि विवाद बढ़ गया है तो सवाल उठाए जा रहे हैं.
चढ़ावा लेकर कराए स्पेशल दर्शन
सवाल उठ रहे हैं, इसकी वजह ये है कि जो वीआईपी बनाकर अपनों के नाम पर श्रद्धालुओं को मंदिर के अंदर ले जाते हैं, उन पर आरोप है कि इन्हीं कथित वीआईपी लोगों से बिना रसीद के चंदा/चढ़ावा ले लिया जाता था. जब आरोप बढ़े तो कई ऐसे किरदार सामने आए जो ये दावा कर रहे हैं कि उन्होंने रुपए, आभूषण रामलला के चरणों के भेंट दिया लेकिन उनको रसीद बाद में भेजे जाने की बात कह कर टाल दिया गया. यही वजह है कि अब विवाद बढ़ा तो विवाद के साथ-साथ आरोप भी बढ़ गए हैं.
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