- इलाहाबाद हाई कोर्ट नेबंदरों के आतंक से निपटने के लिए कार्य योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया
- न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने अगली सुनवाई 6 अप्रैल को तय की
- गाजियाबाद के विनीत शर्मा और अन्य द्वारा दायर जनहित याचिका में बंदरों की बढ़ती संख्या का मुद्दा बनाया गया है
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बंदरों के आतंक के संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इस संबंध में गठित जिला स्तरीय समिति को इस समस्या पर नियंत्रण के लिए कार्य योजना और उपाय पेश करने का निर्देश दिया है.
न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने उक्त निर्देश पारित करते हुए इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई की तिथि छह अप्रैल तय की.गाजियाबाद के विनीत शर्मा और एक अन्य व्यक्ति द्वारा दायर इस जनहित याचिका में बंदरों की बढ़ती संख्या, मानव-बंदर के बीच बढ़ते टकराव आदि जैसे मुद्दे उठाए गए हैं.
अदालत ने 17 फरवरी को अपने आदेश में कहा, “प्रस्तावित अध्ययन को देखते हुए हमारा आदेश है कि अधिकारी, जिला गाजियाबाद और मथुरा में मौजूद व्यवस्था के तहत कार्य योजना से इस अदालत को अगली सुनवाई से पहले या सुनवाई के दिन अवगत कराएं.”
सुनवाई के दौरान, अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कहा कि बंदरों की संख्या जानने और उन क्षेत्रों की पहचान करने के लिए एक व्यवस्थित क्षेत्रीय सर्वेक्षण की जरूरत है, जहां इनकी संख्या अधिक है. उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि मौजूदा व्यवस्था के तहत जिला स्तरीय समिति द्वारा इस समस्या पर नियंत्रण के लिए हर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
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