Akhilesh Yadav vs Yogi Adityanath: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तंज कसने का कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं देते. चाहे बात विकास की हो या तस्वीरों की, अखिलेश अपनी 'टिप्पणी' से सियासी पारा चढ़ा ही देते हैं. ताजा मामला गोरखपुर के इको पार्क का है, जहां मुख्यमंत्री की एक तस्वीर को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर 'दहाड़' लगा दी है.
कबाड़ से बना शेर और मुख्यमंत्री की मुस्कान
दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को गोरखपुर में राप्ती नदी के तट पर बने 'इको पार्क' का लोकार्पण किया. इस पार्क की खास बात यह है कि यहां कबाड़ (स्क्रैप) से सुंदर कलाकृतियां और मूर्तियां बनाई गई हैं. इसी भ्रमण के दौरान सीएम योगी ने लोहे के कबाड़ से बनी एक शेर की मूर्ति के पास खड़े होकर फोटो खिंचवाई. देखते ही देखते यह तस्वीर इंटरनेट पर वायरल हो गई, लेकिन सपा सुप्रीमो को इस शेर की 'बनावट' कुछ रास नहीं आई.
‘नक़ली शेर' के साथ मुस्कान
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) April 24, 2026
असली देखें तो हो जाएं धड़ाम
लगता है कोरोना काल का शेर है, तभी ‘बाल-अयाल' इतने लंबे हैं।
शेर बनाना ही था तो क़ायदे का बनाते और इसके लिए सपाकाल में बनी इटावा की लायन सफ़ारी ही देख आते। pic.twitter.com/0Q0copnKmg
'नकली शेर' पर अखिलेश की तीखी नसीहत
तस्वीर को लपकते हुए अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी शैली में मुख्यमंत्री पर तंज कस दिया. उन्होंने शेर के मॉडल पर चुटकी लेते हुए लिखा, "नकली शेर के साथ मुस्कान, असली देखें तो हो जाएं धड़ाम." अखिलेश ने केवल तंज ही नहीं कसा, बल्कि शेर के डिजाइन पर मजे लेते हुए इसे 'कोरोना काल' का शेर करार दे दिया. उन्होंने कटाक्ष किया कि लगता है लॉकडाउन की वजह से इसके बाल और अयाल इतने लंबे हो गए हैं कि यह पहचान में ही नहीं आ रहा.
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'इटावा सफारी' की याद दिलाकर साधा निशाना
अखिलेश यादव ने इस मौके का इस्तेमाल अपनी सरकार के दौरान बनी 'इटावा लायन सफारी' की ब्रांडिंग के लिए भी किया. उन्होंने मुख्यमंत्री को सुझाव देते हुए कहा कि अगर शेर बनाना ही था तो कायदे का बनाते. इसके लिए उन्हें सपा शासनकाल में बनी इटावा की लायन सफारी जाकर असली बब्बर शेरों को देखना चाहिए था, ताकि उन्हें पता चले कि शेर कैसा दिखता है?
यूपी की सियासत में 'प्रतीकों' की जंग
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अखिलेश यादव इस तरह के ट्वीट के जरिए बार-बार यह संदेश देने की कोशिश करते हैं कि वन्यजीव संरक्षण और मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में उनकी सरकार का काम ज्यादा 'असली' और प्रभावी था. फिलहाल, कबाड़ का यह शेर गोरखपुर के पार्क में खामोश खड़ा है, लेकिन यूपी की डिजिटल सियासत में इसकी वजह से गर्जना हो रही है.
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