चौराहों और अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में लगे ट्रैफिक सिग्नल यातायात को सुचारू रखने और लोगों को ट्रैफिक नियमों का पालन कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि रात के समय कई जगहों पर ट्रैफिक सिग्नल सामान्य रूप से काम नहीं करता है? उनकी जगह सिर्फ पीली या लाल बत्ती ब्लिंक करती दिखाई देती है. हालांकि, ज्यादातर लोग इस पर ध्यान नहीं देते, लेकिन कई लोगों ने रात में ट्रैफिक लाइट को ब्लिंक करते जरूर देखा होगा. आखिर ऐसा क्यों होता है, यहां जानते हैं...
कब बंद कर दी जाती हैं ट्रैफिक सिगनल की लाइट्स
रात करीब 10 बजे ट्रैफिक सिगनल की लाइट्स बंद की जाती हैं, जो सुबह 6 बजे तक बंद रहती हैं. हालांकि, इस बात पर भी ध्यान दें कि इस दौरान भले ही ग्रीन और रेड लाइट बंद रहती हैं, लेकिन ट्रैफिक सिगनल पर ऑरेंज लाइट ब्लिंक करती रहती हैं. ताकि गाड़ी की स्पीड बनी रहे. इस दौरान भीं हमें ट्रैफिक के सभी नियमों का पालन करना होता है. क्योंकि भले ही ट्रैफिक लाइट्स बंद हों, लेकिन कैमरे ऑन रहते हैं, ऐसे में यात्रायत के नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लग सकता हैं.
क्यों बंद कर दी जाती हैं ट्रैफिक की लाइट
रात के समय गाड़ियां दिन की तुलना में कम चलती हैं. इसलिए देर रात अनावश्यक रुकावट और ईंधन की बर्बादी को रोकने से बचाने के लिए लाइट्स बंद या फ्लैशिंग मोड पर कर दी जाती हैं.
गाड़ी की स्पीड का रखना होता है ध्यान
ट्रैफिक पुलिस और सिगनल लाइट्स न होने की वजह से रात के समय कुछ लोग तेज स्पीड से गाड़ी चलाकर ले जाते हैं. लेकिन उन्हें इस बात पर गौर करने की जरूरत होती है कि भले ही ट्रैफिक लाइट्स बंद हों, लेकिन कैमरे बंद नहीं हुए होते हैं. ऐसे में आपका चालान रात के समय भी कट सकता है.
ट्रैफिक लाइट बंद होने के बावजूद भी आपको अपनी गाड़ी की स्पीड लिमिट में रखने की जरूरत होती है. हाइवे पर आप 100 से 120 किमी प्रति घंटे की स्पीड पर गाड़ी रख सकते हैं. वहीं, शहरी इलाकों में गाड़ी की स्पीड 70 किमी प्रति घंटे से कम रखने की जरूरत होती है.
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