विज्ञापन

कूकाबुरा गेंद, स्पिन ट्रैक, अलग हाईट के स्पिनर...कैसे भारत के संकटमोचक बने देवदत्त पडिक्कल, बचपन के कोच ने बताया

जहां अभ्यास मैच में जायसवाल, पंत जैसे धाकड़ दहाई का आंकड़ा पार नहीं कर पाए, वहीं देवदत्त पडिक्कल जो दो साल से टेस्ट टीम से बाहर हैं, उन्होंने नाबाद शतक जड़ा.

कूकाबुरा गेंद, स्पिन ट्रैक, अलग हाईट के स्पिनर...कैसे भारत के संकटमोचक बने देवदत्त पडिक्कल, बचपन के कोच ने बताया
How Devdutt Padikkal Prepare for Test Series vs Sri Lanka

शनिवार के कोलंबो के नोंडेस्क्रिप्ट्स क्रिकेट क्लब ग्राउंड में श्रीलंका इलेवन के खिलाफ वार्म-अप गेम मुकाबले में भारतीय टीम के लिए देवदत्त पडिक्कल ने नाबाद शतक जड़ा. साई सुदर्शन के चोटिल हैं और उनके सीरीज से बाहर होने की खबरें हैं, ऐसे में देवदत्त पडिक्कल ने अपनी इस पारी से गॉल में होने वाले पहले टेस्ट में इंडिया की प्लेइंग इलेवन के लिए अपनी दावेदारी जरूरत मजबूत की है. पडिक्कल दो साल से टीम इंडिया से बाहर हैं. लेकिन वह लगातार अपनी प्रदर्शन से दरवाजा खटखटा रहे हैं. श्रीलंका के खिलाफ उड़ान भरने से पहले इस आरसीबी स्टार ने अपने बचपन के कोच के साथ काफी समय बिताया और बेंगलुरु में खास ट्रेनिंग की. 

देवदत्त पडिक्कल ने अपने बचपन के कोच मोहम्मद नसीरुद्दीन के साथ मिलकर बेंगलुरु में श्रीलंकाई स्पिन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्पिन ट्रैक पर ट्रेनिंग की. दोनों ने लंकाई स्पिन अटैक का मुकाबला करने के लिए एक प्लान बनाया. कूकाबुरा गेंदों से उन पिचों पर अभ्यास किया, जहां काफी टर्न मिलता था. न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए नसीरुद्दीन ने कहा,"देवदत्त ने केएससीए महाराजा ट्रॉफी T20 के बाद मुझसे संपर्क किया. जहां उन्होंने इंडिया A के लिए सिर्फ एक मैच खेला था. श्रीलंका जाने से पहले रेड बॉल से ट्रेनिंग शुरू करना चाहते थे."

बाएं हाथ के इस खिलाड़ी ने श्रीलंका A के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने 67 और 94 रन बनाए, लेकिन टेस्ट सीरीज से पहले वह अपने खेल को और बेहतर करना चाहते थे. पडिक्कल,"उस समय उनके लिए यह मायने नहीं रखता था कि उन्हें इलेवन में जगह मिलती है या नहीं. वह सबसे अच्छे तरीके से तैयारी करना चाहते थे और अगर मौका मिलता है तो तैयार रहना चाहते थे."

नसीरुद्दीन ने आगे बताया,"इसलिए, हमने नॉर्मल लाल गेंदों से ट्रेनिंग शुरू की. लेकिन फिर हमें ट्रेनिंग में कूकाबुरा गेंदों का इस्तेमाल करने का आइडिया आया क्योंकि श्रीलंका में टेस्ट मैचों के लिए उनका इस्तेमाल होता है. इसलिए, उन्होंने वे गेंदें खरीदीं और हमने उनसे प्रैक्टिस करना शुरू कर दिया."

लेकिन यह समस्या के सिर्फ एक हिस्से से निपटना था. लंकाई स्पिनरों को उनके घर पर रोकना एक मुश्किल काम है, इसलिए, देवदत्त और नसीरुद्दीन ने बेंगलुरु में लंकाई पिचों को फिर से बनाने का फैसला किया. नसीरुद्दीन ने कहा,"हमने अपनी ट्रेनिंग के लिए अलग-अलग पिचों का इंतज़ाम किया क्योंकि उन्हें वहां ज़्यादा स्पिन का सामना करना पड़ेगा. टर्न वाली पिच के अलावा, हमने अपने सेशन के दौरान अलग-अलग तरह के स्पिनरों के लिए भी इंतज़ाम किया."

उन्होंने कहा,"हमने अलग-अलग हाइट के लेफ्ट-आर्म और ऑफ-स्पिनर बुलाए और उन्होंने हर दिन लगभग तीन घंटे उनके खिलाफ बैटिंग की. वह लंका जाने से पहले कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहते थे."

नसीरुद्दीन ने पिछले दो सालों में बैटिंग में कुछ छोटे-मोटे बदलाव करके पडिक्कल की मदद भी की है. उन्होंने कहा,"टेस्ट लेवल पर, असल में, सभी फॉर्मेट में सफल होने के लिए उसके पास हमेशा टेक्निक और सब्र था. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने आखिरी टेस्ट (नवंबर 2024 में पर्थ में) के बाद, उसने अपने स्टांस पर काम किया, थोड़ा और नीचे रहकर, और गेंद के करीब खेलकर और नतीजे सबके सामने हैं."

लेकिन क्या टीम इंडिया से दूर रहने के कारण 26 साल का यह खिलाड़ी फ्रस्ट्रेट हो गया? इस पर नसीरुद्दीन ने कहा,"बिल्कुल नहीं. उसके अंदर बहुत पेशेंस है, जो अपने खेल पर कड़ी मेहनत करने को तैयार रहता है. ऑस्ट्रेलिया के उस टूर के बाद उसे साफ पता था कि उसे किन एरिया में काम करने की ज़रूरत है और उसने वैसा ही किया. अब आप फर्क देख सकते हैं."

नसीरुद्दीन घरेलू क्रिकेट में अपने ज़बरदस्त फॉर्म की बात कर रहे थे, जहां उसने छह मैचों में 60 से ज़्यादा के एवरेज से 543 रन बनाए थे. वे 428 रन, जिसमें दो सेंचुरी शामिल हैं, 85 के एवरेज से चार मैचों में आए, जिनमें उसने कर्नाटक की कप्तानी की थी. उनके शतकों में से एक 85 गेंदों पर 120 रन था, जिसमें कर्नाटक ने मोहाली में रणजी ट्रॉफी एलीट ग्रुप B के एक ज़रूरी मैच में पंजाब के खिलाफ़ सिर्फ़ 28 ओवर में 250 रन बनाए थे.

"वह अब ज़्यादा मैच्योर क्रिकेटर और इंसान हैं. कर्नाटक की कप्तानी ने भी उनके लिए कमाल कर दिया है क्योंकि अब वह फ़ैसले लेने में और भी बेहतर हो गए हैं." "मैंने उनसे पूछा था कि क्या कप्तानी की वजह से उन पर कोई प्रेशर है. लेकिन उन्होंने कहा कि वह उस ज़िम्मेदारी का मज़ा ले रहे हैं. बिल्कुल भी बोझ नहीं." नसीरुद्दीन ने कहा,"वह यह पक्का करते हैं कि सारा प्रेशर और उम्मीदें मैदान के बाहर रहें और अपने काम पर ध्यान दें." उन्हें यह सब गॉल में फिर से करना होगा. शायद, उसके बाद भी.

यह भी पढ़ें: चोटिल होती खिलाड़ियों की लिस्ट, अब खुद एक्शन में BCCI, लक्ष्मण से होंगे सवाल?

यह भी पढ़ें: 'टीम के लिए नहीं, देश के लिए खेलना' वर्ल्ड कप से पहले 1975 के चैंपियन खिलाड़ियों ने हॉकी टीम को दिया संदेश

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Devdutt Babunu Padikkal, India, Cricket
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com