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'गेहूं, चावल, मक्का और डेयरी पर दरवाजा बंद', कृषि मंत्री शिवराज बोले- किसी कीमत पर अमेरिका से आयात नहीं 

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील में किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं हुआ है, संवेदनशील फसलों पर आयात प्रतिबंधित है. सेब आयात में अमेरिका से सीमित कोटा रखा गया है, जिससे घरेलू उत्पादकों को नुकसान नहीं होगा, राहुल गांधी के आरोपों को कृषि मंत्री ने खारिज किया.

'गेहूं, चावल, मक्का और डेयरी पर दरवाजा बंद', कृषि मंत्री शिवराज बोले- किसी कीमत पर अमेरिका से आयात नहीं 

'किसी भी समझौते में भारतीय किसानों के हितों से समझौता नहीं किया गया है. गेहूं, चावल, मक्का जैसी संवेदनशील फसलों पर दरवाजा बंद है, चावल उत्पादन में भारत आज दुनिया में नंबर-1 है और चीन से आगे निकल चुका है. ऐसे में किसानों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई आयात स्वीकार ही नहीं किया गया है', भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को ये स्पष्टीकरण दिया. 

राजस्थान के जयपुर में एक विशेष कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते हुए सेब के आयात को लेकर उठाए गए सवालों पर कृषि मंत्री ने अहम तथ्य पेश किए. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत को हर साल लगभग 5.5 लाख मीट्रिक टन सेब की जरूरत होती है, जो तुर्की और ईरान जैसे देशों से अभी आयात किया जा रहा है. 

कृषि मंत्री ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील लागू होने के बाद,

'यदि इसमें से मात्र 1 लाख मीट्रिक टन सेब अमेरिका से आयात किया जाता है और उस पर आयात मूल्य ₹80 प्रति किलो के ऊपर ₹25 शुल्क जोड़कर कोटा तय किया जाए तो यह भारत के सेब उत्पादकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा, बल्कि तुर्की से लेने के बजाय कहीं और से लेने का मामूली बदलाव मात्र है'.

राहुल गांधी ने लगाए थे आरोप 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील की वजह से सोयाबीन और मक्का पर भी बुरा असर पड़ने का आरोप लगते हुए किसानों का हित कमज़ोर होने का आरोप लगाया है. लेकिन कृषि मंत्री ने इन आरोपों को भी ख़ारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि सोयाबीन और मक्का पर भी कोई रियायत नहीं दी गई है.

कांग्रेस नेताओं द्वारा उठाये गए सवालों पर पलटवार करते हुए शिवराज सिंह ने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में 20 अरब डॉलर के कृषि उत्पादों का आयात होता था जिसमें डेयरी उत्पाद भी शामिल थे. लेकिन मोदी सरकार दूध, घी, दही, पनीर सहित किसी भी डेयरी उत्पाद के आयात को अनुमति नहीं देगी जिससे दूध उत्पादक किसानों को कोई नुकसान हो.

कपास के आयात पर राहुल गांधी के आरोपों पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा,

'घरेलू उत्पादन के मुकाबले उद्योगों की जरूरत अधिक होने से उद्योगों को कुछ कपास आयात करना पड़ता है जिससे कपड़ा उद्योग चल सके, रोजगार बढ़े और निर्यात बढ़े. भारत का टेक्सटाइल निर्यात विभिन्न उत्पादों को मिलाकर लगभग 4 लाख करोड़ रुपये का है जिसे 45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने की क्षमता है और इसके फलस्वरूप अंततः लाभ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ही मिलेगा'.

कृषि मंत्रालय के मुताबिक जीरा, मेथी, इसबगोल जैसी राजस्थान में पैदा होने वाली मसाला फसलों सहित भारतीय मसालों पर आयात को अनुमति नहीं दी गयी है, बल्कि इन मसालों का निर्यात जीरो फीसदी ड्यूटी पर अमेरिका जैसे बाजारों में बढ़ाने की व्यवस्था की गई है जिससे किसानों को फायदा हो.

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