'किसी भी समझौते में भारतीय किसानों के हितों से समझौता नहीं किया गया है. गेहूं, चावल, मक्का जैसी संवेदनशील फसलों पर दरवाजा बंद है, चावल उत्पादन में भारत आज दुनिया में नंबर-1 है और चीन से आगे निकल चुका है. ऐसे में किसानों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई आयात स्वीकार ही नहीं किया गया है', भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को ये स्पष्टीकरण दिया.
राजस्थान के जयपुर में एक विशेष कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते हुए सेब के आयात को लेकर उठाए गए सवालों पर कृषि मंत्री ने अहम तथ्य पेश किए. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत को हर साल लगभग 5.5 लाख मीट्रिक टन सेब की जरूरत होती है, जो तुर्की और ईरान जैसे देशों से अभी आयात किया जा रहा है.
कृषि मंत्री ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील लागू होने के बाद,
राहुल गांधी ने लगाए थे आरोप
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील की वजह से सोयाबीन और मक्का पर भी बुरा असर पड़ने का आरोप लगते हुए किसानों का हित कमज़ोर होने का आरोप लगाया है. लेकिन कृषि मंत्री ने इन आरोपों को भी ख़ारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि सोयाबीन और मक्का पर भी कोई रियायत नहीं दी गई है.
कांग्रेस नेताओं द्वारा उठाये गए सवालों पर पलटवार करते हुए शिवराज सिंह ने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में 20 अरब डॉलर के कृषि उत्पादों का आयात होता था जिसमें डेयरी उत्पाद भी शामिल थे. लेकिन मोदी सरकार दूध, घी, दही, पनीर सहित किसी भी डेयरी उत्पाद के आयात को अनुमति नहीं देगी जिससे दूध उत्पादक किसानों को कोई नुकसान हो.
कपास के आयात पर राहुल गांधी के आरोपों पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा,
कृषि मंत्रालय के मुताबिक जीरा, मेथी, इसबगोल जैसी राजस्थान में पैदा होने वाली मसाला फसलों सहित भारतीय मसालों पर आयात को अनुमति नहीं दी गयी है, बल्कि इन मसालों का निर्यात जीरो फीसदी ड्यूटी पर अमेरिका जैसे बाजारों में बढ़ाने की व्यवस्था की गई है जिससे किसानों को फायदा हो.
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