Train Travel Tips: 'दिल्ली से पटना जाने के लिए मैंने नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस में पहले से टिकट करा रखी थी. एक रात पहले मेरी तबीयत खराब लग रही थी. अगली सुबह ट्रेन थी. मैं किसी तरह निकल पड़ा. आनंद विहार से सुबह करीब 8 बजे खुली. करीब 11:50 बजे तक इटावा से ट्रेन खुली तो थोड़ी ही देर में मेरी तबीयत और बिगड़ने लगी. फीवर और बॉडीपेन से मेरी हालत खराब हो रही थी. मैंने रेलवे के हेल्पलाइन नंबर 139 पर मदद मांगी और कानपुर में ट्रेन रुकने के बाद डॉक्टर मेरे पास थे. उन्होंने चेकअप किया और 3 टैबलेट की 2 खुराक दवा दी. मेरी वजह से ट्रेन 2 मिनट ज्यादा भी रोकनी पड़ी. मैंने डॉक्टर साहब को और रेलवे को थैंक्स कहा. थोड़ी देर बाद मेरी तबीयत में सुधार होने लगा था.' रेलवे की इस खास सुविधा के बारे में सहकर्मी निलेश कुमार ने ये अनुभव साझा किया.
ट्रेन में सफर के दौरान तबीयत बिगड़ जाए तो आप भी रेलवे से ये मदद ले सकते हैं. महज एक कॉल कर के या फिर ट्रेन में मौजूद TTE से आग्रह कर आप ट्रेन में डॉक्टर बुला सकते हैं. डॉक्टर ऑन बोर्ड की इस सुविधा के लिए चार्ज भी बहुत मामूली है, जिसकी बाकायदा रसीद भी दी जाती है. पूरी प्रक्रिया समझ लेते हैं इस रिपोर्ट में.
रेलवे की है ऑनबोर्ड मेडिकल सहायता सेवा
भारतीय रेलवे से यात्रा करते समय कई बार यात्रियों को अचानक पेट दर्द, सीने में दर्द, उल्टी या जी घबराने जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ जाता है. ऐसी स्थिति में सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि चलती ट्रेन में तुरंत इलाज कैसे मिले. यात्रियों की इस परेशानी को समझते हुए भारतीय रेलवे ऑनबोर्ड मेडिकल सहायता प्रदान करता है. इस सुविधा के तहत सूचना मिलते ही अगले सबसे नजदीकी बड़े स्टेशन पर रेलवे की मेडिकल टीम आपकी सीट तक पहुंच जाती है. अगर आपके या आपके किसी सहयात्री की कभी सफर के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ जाए, तो नीचे बताए गए तरीके से इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं.
ट्रेन में डॉक्टर बुलाने के 4 सबसे आसान तरीके
- 139 हेल्पलाइन पर कॉल करें: यह रेलवे का ऑल इन वन इमरजेंसी नंबर है. इस नंबर पर कॉल करके अपनी पसंदीदा भाषा चुनें और मेडिकल असिस्टेंट विकल्प का चयन करें.
- TTE या ऑनबोर्ड स्टाफ को सूचित करें: अपने कोच के टीटीई , ट्रेन गार्ड या पैंट्री कार स्टाफ को तुरंत बताएं. वे सीधे रेलवे कंट्रोल रूम को वायरलेस या मैसेज भेजकर अलर्ट करते हैं.
- रेल मदद ऐप या वेबसाइट: अपने फोन में RailMadad ऐप खोलें या वेबसाइट पर जाएं और Medical Assistance सेक्शन में जाकर अपनी शिकायत दर्ज करें.
- सोशल मीडिया X पर पोस्ट करें: अपनी समस्या, PNR नंबर, ट्रेन नंबर और सीट संख्या लिखकर @RailMinIndia और @RailwaySeva को टैग करते हुए पोस्ट करें.
मदद मांगते समय ये जानकारी देना है जरूरी
- PNR नंबर, इससे ही आपकी लाइव ट्रेन लोकेशन और सीट का पता चलता है.
- ट्रेन का नाम और नंबर
- कोच और सीट या बर्थ संख्या का पूरा डिटेल
- मरीज की मौजूदा स्थिति जैसे सीने में दर्द, तेज बुखार, उल्टी, बेहोशी या चोट की जानकारी.
सूचना मिलते ही एक्टिव हो जाती है रेलवे की मेडिकल टीम
- सूचना मिलते ही रेलवे कंट्रोल रूम अलर्ट जारी करता है और ट्रेन के रूट पर पड़ने वाले अगले सबसे नजदीकी स्टेशन के रेलवे अस्पताल/मेडिकल टीम को सूचित करता है.
- मेडिकल टीम, अटेंडेंट और जरूरी लाइफ सेविंग दवाइयों के साथ ट्रेन के आने से पहले ही प्लेटफॉर्म पर तैयार रहती है.
- जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर रुकती है, डॉक्टर सीधे आपके कोच में आपकी सीट तक पहुंचते हैं और मरीज की जांच कर दवाइयां देते हैं.
- अगर मरीज की हालत बहुत गंभीर होती है जैसे हार्ट अटैक, तो ट्रेन को उन स्टेशनों पर भी इमरजेंसी के रूप में रोका जा सकता है, जहां उसका आधिकारिक स्टॉपेज नहीं होता.
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जरूरत पड़ने पर अस्पताल में कराया जाता है भर्ती
- ऑनबोर्ड डॉक्टर सेवा के लिए रेलवे आपसे 100 की निश्चित कंसल्टेशन फीस लेता है. डॉक्टर की ओर से इलाज के बाद आपको इसकी आधिकारिक रसीद दी जाती है.
- First Aid के दौरान दी जाने वाली सामान्य दवाएं अक्सर मुफ्त होती हैं, लेकिन विशेष या अतिरिक्त जीवनरक्षक दवाओं का खर्च अलग से देना पड़ सकता है.
- अगर मरीज की स्थिति गंभीर है और ऑनबोर्ड इलाज से सुधार नहीं हो रहा है, तो स्टेशन पर पहले से तैयार एम्बुलेंस के जरिए मरीज को नजदीकी रेलवे अस्पताल, बड़े सरकारी या निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया जाता है.
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