देश में कार, बाइक समेत वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. मौजूदा समय में देश में 30.48 करोड़ गाड़ियां हैं, जिनमें करीब 56 फीसदी यानी 16.54 करोड़ गाड़ियों का इंश्योरेंस ही नहीं कराया गया है. हो सकता है इनमें वे गाड़ियां भी शामिल हों, जिनका इंश्योरेंस फेल हो गया हो. अगर आपकी भी कार या बाइक इन 16.54 करोड़ वाहनों में शामिल है, तो कभी भी आपकी गाड़ी का चालान कट सकता है. ऐसे में बेहतर है कि आप चालान कटने से पहले अपनी गाड़ी का इंश्योरेंस करवा लें.
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने एक सड़क दुर्घटना मुआवजा विवाद की सुनवाई के दौरान आदेश दिया है कि बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों (Uninsured Vehicles) का चालान काटा जाए.
शीर्ष अदालत ने अब से नई कारों के लिए 4 साल और नए दोपहिया वाहनों (Two Wheelers) के लिए 6 साल का थर्ड पार्टी मोटर व्हीकल इंश्योरेंस (Third Party Insurance) लेना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया है.
देश में 56% गाड़ियों के पास नहीं है बीमा
सुप्रीम कोर्ट ने वित्त संबंधी स्थायी समिति (2024-25) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भारत में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत कानूनी बाध्यता होने के बावजूद लोग नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं.
हालत ये है कि इस वक्त देश की सड़कों पर चलने वाली कुल 30.48 करोड़ गाड़ियों में से 16.54 करोड़ यानी लगभग 56% गाड़ियां बिना किसी इंश्योरेंस के चल रही हैं.
कोर्ट ने ये भी कहा कि दुर्घटना की स्थिति में जब गाड़ी का बीमा नहीं होता, तो पीड़ित या उनके परिवारों को मुआवजा पाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाइयों में दर-दर भटकना पड़ता है. इसी को देखते हुए कोर्ट ने कारों के लिए 4 साल और दोपहिया वाहनों के लिए 6 साल के लॉन्ग टर्म थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का आदेश जारी किया है.
नई तकनीक से कटेगा ऑटोमेटिक चालान
अनिवार्य बीमा व्यवस्था का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केवल पेट्रोल पंपों तक सीमित रहने के बजाय कई डिजिटल और आधुनिक निर्देश दिए हैं.
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सड़कों पर लगे ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरों को सीधे केंद्रीय VAHAN डेटाबेस से जोड़ा जाएगा. जैसे ही कोई अनइंश्योर्ड गाड़ी कैमरे के सामने से गुजरेगी, उसका अपने आप ई चालान जनरेट हो जाएगा.
ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को ऐसे डिजिटल ऐप या डिवाइस दिए जाएं, जिनसे वे मौके पर ही किसी भी वाहन के रियल टाइम इंश्योरेंस स्टेटस को तुरंत चेक कर सकें और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई कर सकें.
पेट्रोल पंप पर ताकते रह जाएंगे मुंह
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण और सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय को एक विशेष पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है. इस प्रोजेक्ट के तहत वाहनों के इंश्योरेंस स्टेटस को सीधे पेट्रोल पंपों से जोड़ा जाएगा.
दरअसल, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने अपने ताजा फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी वाहन का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस वैलिड नहीं होगा, तो उसे पेट्रोल पंप पर तेल देने से मना कर दिया जाएगा.
यह कदम सड़कों पर बिना बीमे के दौड़ रहीं गाड़ियों के मालिकों को तुरंत अपना इंश्योरेंस रिन्यू कराने के लिए मजबूर करेगा. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी इस कदम का स्वागत किया है.
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सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से जुड़े एक सड़क दुर्घटना मुआवजा विवाद की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें अदालत ने दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित वित्तीय सुरक्षा देने के उद्देश्य से पूरे मोटर इंश्योरेंस तंत्र में सुधार का आदेश दिया है.
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