- कानपुर में बुलेट ट्रेन के लिए अलग स्टेशन बनाया जाएगा.
- सांसद ने बुलेट ट्रेन स्टेशन की जगह के बारे में दी जानकारी.
- दिल्ली-आगरा होते हुए डेढ़ घंटे में बुलेट ट्रेन पहुंचेगी कानपुर.
देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क यानी बुलेट ट्रेन परियोजना के विस्तार को लेकर रेलवे प्रशासन ने अपनी योजनाओं पर तेजी से काम करना शुरू कर दिया है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिल्ली-वाराणसी-गुवाहाटी (Northern Corridor) बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को मंजूरी दिए जाने के बाद अब इसके बुनियादी ढांचे को लेकर नई जानकारियां सामने आई हैं. इस हाई-स्पीड प्रोजेक्ट के तहत मौजूदा रेलवे स्टेशनों पर भीड़ और तकनीकी सीमाओं से बचने के लिए अलग से रेलवे स्टेशनों के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है.
कानपुर में कहां रुकेगी बुलेट ट्रेन?
कानपुर में प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर सुगबुगाहट तेज हो गई है. कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी ने इस प्रोजेक्ट को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत कानपुर में भी बुलेट ट्रेन के ठहराव के लिए एक अलग और अत्याधुनिक स्टेशन बनाए जाने के प्रस्ताव पर काम शुरू हो गया है.
सांसद ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने स्पष्ट रूप से यह पक्ष रखा है कि बुलेट ट्रेन का स्टेशन ऐसी जगह बनाया जाए, जहां कानपुर की जनता और आम नागरिकों को आवाजाही में अधिकतम सुविधा मिल सके. इसी सोच के साथ अटल घाट के समीप या शहर के भीतर टनल के जरिए स्टेशन बनाने के प्रस्ताव पर काम शुरू हो चुका है. साथ ही पूर्व के रूट में संशोधन करवाकर अब बुलेट ट्रेन को आगरा से सीधे कानपुर लाते हुए लखनऊ से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त किया गया है.

प्रस्तावित रूट के अनुसार, यह हाई-स्पीड ट्रेन दिल्ली से चलकर आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी और पटना होते हुए आगे पूर्वोत्तर (गुवाहाटी) की ओर जाएगी. अधिकारियों का मानना है कि शहर के मुख्य हिस्सों से अलग या नए स्थानों पर इन स्टेशनों के बनने से न केवल पारंपरिक रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों का दबाव घटेगा, बल्कि हाई-स्पीड ट्रेनों के संचालन में भी तकनीकी सुगमता बनी रहेगी.
क्या होंगी इस नई व्यवस्था की खास बातें?
बुलेट ट्रेन की पटरियां और तकनीकी मानक सामान्य ट्रेनों से पूरी तरह अलग होते हैं, इसलिए इसके संचालन के लिए अधिकांश शहरों में नए और अलग स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं. इस कॉरिडोर के पूरा होने के बाद यात्रियों के समय में भारी बचत होगी. अनुमानित समय के अनुसार, दिल्ली से आगरा का सफर सिर्फ 59 मिनट, दिल्ली से कानपुर 1 घंटे 45 मिनट और दिल्ली से वाराणसी की दूरी महज 3 घंटे 33 मिनट में तय की जा सकेगी.
रेलवे के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट में आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ 'मेक इन इंडिया' को प्राथमिकता दी जाएगी. ट्रैक के पिलर और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों को स्टैंडर्डराइज करके फैक्टरियों में तैयार किया जाएगा, ताकि निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा हो सके.
फिलहाल, इस परियोजना के विस्तृत सर्वे, अंतिम रूट की रूपरेखा और स्टेशनों की सटीक लोकेशन को लेकर तकनीकी अध्ययन चल रहा है, जिसके पूरा होने के बाद निर्माण कार्य की आधिकारिक समयसीमा स्पष्ट होगी.
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