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किराएदार ही फ्लैट का बॉस है, मकान मालिक भी नहीं कर पाएंगे मनमानी, जानें अपने ये 5 बड़े हक

क्या आपका मकान मालिक भी बात-बात पर घर खाली करने की धमकी देता है? रेंट रूल्स आने के बाद अब मकान मालिक अपनी मनमानी नहीं कर सकते. इस खबर में जानें किराएदारों के वो 5 अधिकार, जो आपको हर परेशानी से बचाएंगे.

किराएदार ही फ्लैट का बॉस  है, मकान मालिक भी नहीं कर पाएंगे मनमानी, जानें अपने ये 5 बड़े हक
किरायदारों के लिए रेंट एग्रीमेंट कराना बहुत जरूरी है. इसके बिना किराएदार अपने कानूनी आधिकारों का इस्तेमाल नही कर सकते.
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बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, नोएडा, में किराए के लिए घर ढूंढना किसी जंग जीतने से कम नहीं है, घर तो चलिए एक बार को अच्छा जल्दी मिल भी जाए पर असली जंग मकान मालिक के नियम और शर्तों से शुरू होती है. जैसे रात 10 बजे के बाद एंट्री नहीं, बिना पूछे दोस्त नहीं आ सकते और अगले महीने से किराया 20% बढ़ेगा. ऐसे में अगर आप भी किराए के मकान में रहते हैं, तो ये डॉयलाग्स आपके लिए नए को कतई नहीं होंगे.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि लॉ के अनुसार आप सिर्फ एक किराएदार नहीं, बल्कि उस घर के टेंपरेरी मालिक हैं? जी, एडवोकेट के अनुसार रेंट रूल्स किराएदारों को ऐसे दमदार राइट्स देते हैं, जिसके बाद मकान मालिक अपनी मनमानी बिल्कुल नहीं चला सकते. तो चलिए एक्सपर्ट से जानते हैं किराएदारों के वो 5 बड़े अधिकार, जो हर रेंटर को पता होने चाहिए.

1. बिना रेंट एग्रीमेंट सब बेकार

एडवोकेट राकेश उपाध्याय ने जोर देते हुए कहा कि बिना रेंट एग्रीमेंट के किसी भी घर में शिफ्ट ना हों. इसके अलावा रेंट एग्रीमेंट में किराया, सिक्योरिटी मनी, और रहने का पीरियड साफ-साफ लिखा होना चाहिए. 11 महीने का एग्रीमेंट दोनों साइड को लीगल प्रोटेक्शन देता है. अगर मकान मालिक बीच में मुकरता है, तो ये एग्रीमेंट आपका सबसे बड़ा हथिार बनता है.

2. जब मन चाहे नहीं बढ़ेगा किराया

अमूमन देखा जाता है कि मकान मालिक साल के बीच में ही किराया बढ़ाने की मांग करने लगते हैं. एडवोकेट राकेश के अनुसार, नियम कहते हैं कि एग्रीमेंट के पीरियड के दौरान मकान मालिक बीच में किराया नहीं बढ़ा सकता. किराया बढ़ाने के लिए कम से कम 3 महीने पहले लिखित में नोटिस देना जरूरी है.

3. घर में एंट्री के लिए किरायेदार की मंजूरी जरूरी

अगर आपके मकान मालिक कभी भी आपके फ्लैट का ताला खुलवाकर अंदर आ जाते हैं, तो ये पूरी तरह से लॉ के खिलाफ है. कानून के अनुसार आपकी प्राइवेसी आपका अधिकार है. मकान मालिक को घर को देखने या मरम्मत के लिए आने से कम से कम 24 घंटे पहले आपको इसके बारे में बताना जरूरी होता है.

4. सिक्योरिटी डिपॉजिट का हिसाब

मकान खाली करते समय अक्सर सिक्योरिटी मनी को लेकर लड़ाई-झगड़े होते हैं. एडवोकेट राकेश उपाध्याय ने कहा कि रिहायशी घरों के लिए मकान मालिक ज्यादा से ज्यादा 2 महीने का किराया ही एडवांस या सिक्योरिटी के तौर पर ले सकते हैं. और हां एक जरूरी बात कि घर खाली करने के बाद, बिना किसी नुकसान के, ये अमाउंट तुरंत लौटाना होगा.

5. नहीं कटेगा बिजली-पानी का कनेक्शन

इन दिनों किराएदार को एक समस्या से अमूमन दो चार होना पड़ता है कि छोटे सी किसी बात पर विवाद होने या किराया देरी से मिलने पर मकान मालिक बिजली या पानी का कनेक्शन तुरंत बंद कर देते हैं. ऐसी स्थिति पर एक्सपर्ट ने कहा कि मकान मालिक कानूनन ऐसा नहीं कर सकते. अगर वो बिजली या पानी की सप्लाई बंद करते हैं, तो किराएदार पास पूरा हक है वो रेंट अथॉरिटी या कोर्ट के पास जाए. शिकायत करने पर मकान मालिक पर बड़ा जुर्माना लग सकता है.

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