पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की सामाजिक कल्याण योजनाओं को लेकर एक बेहद सख्त और बड़ा एलान किया है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र और जरूरतमंद लोगों को ही मिलेगा. उन्होंने साफ किया कि भारतीय नागरिक न होने वाले लोगों को किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा. इसके अलावा, जिन लोगों ने दो से अधिक बार शादी की है यानी तीन या उससे ज्यादा शादियां की हैं, वे भी इन योजनाओं के लिए पात्र नहीं होंगे.
शुभेंदु सरकार का बड़ा ऐलान
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जो लोग सरकार द्वारा चलाए जाने वाले टीकाकरण कार्यक्रमों या आपातकालीन टीकाकरण से इनकार करते हैं, उन्हें भी सरकारी लाभ नहीं मिलेगा. इसके साथ ही जिन परिवारों ने अपने बच्चों का नाम सरकारी स्कूलों से हटाकर कुछ धार्मिक शिक्षण संस्थानों में दाखिला कराया है, उन्हें मिलने वाले सरकारी भत्ते और कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से बाहर रखा जाएगा.
जो नीतियों का पालन नहीं करते, उन्हें सुविधाओं का लाभ भी नहीं
मुख्यमंत्री के नए दिशानिर्देशों के अनुसार, जिन लोगों ने दो से ज्यादा शादियां की हैं या जो अपने बच्चों को वैक्सीन लगवाने से इनकार करते हैं, उन्हें अब राज्य की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा. इसके अलावा, सरकारी स्कूलों को छोड़कर कुछ खास धार्मिक शिक्षण संस्थानों का रुख करने वाले परिवारों और गैर-भारतीय नागरिकों को भी इन योजनाओं के दायरे से बाहर रखने की घोषणा की गई है.
यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री ने ऐसी शर्तों का जिक्र किया है. 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में उन्होंने सवाल उठाया था कि जो लोग सरकार की स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी नीतियों का पालन नहीं करते, उन्हें सरकारी आर्थिक सहायता क्यों दी जाए.
अन्नपूर्णा योजना के लिए टीकाकरण और स्कूल का ब्योरा अनिवार्य
1 जुलाई को सरकार की प्रमुख अन्नपूर्णा योजना की समीक्षा बैठक के दौरान भी मुख्यमंत्री ने कहा था कि जो परिवार अपने बच्चों को सरकार द्वारा निर्धारित जरूरी टीके नहीं लगवाते हैं, वे योजना का लाभ पाने के पात्र नहीं होंगे. अन्नपूर्णा योजना के 11 पन्नों वाले आवेदन फॉर्म में एक पूरा पेज बच्चों के टीकाकरण से जुड़ी जानकारी के लिए रखा गया है. इसमें आवेदकों को अपने अधिकतम चार बच्चों के टीकाकरण की स्थिति बतानी होती है. साथ ही यह भी जानकारी देनी होती है कि बच्चे किस तरह के स्कूल में पढ़ते हैं, जैसे सरकारी स्कूल, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल, निजी स्कूल या मदरसा.
इसके अलावा परिवार के मुखिया को यह भी बताना होता है कि वह पहले से किन सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहा है और उससे कितनी आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहा है. हालांकि, पश्चिम बंगाल में टीकाकरण को लेकर झिझक देश के औसत से कम है. राज्य में बच्चों के टीकाकरण की दर लगभग 92.3% से 99.4% के बीच है. अधिकांश टीकाकरण सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के माध्यम से किया जाता है और 96.3% से 99.1% बच्चों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के जरिए टीके लगाए जाते हैं.
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