उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जनपद में जमीन से जुड़े विवादों को जल्दी और ट्रांसपेरेंसी तरीके से सुलझाने के लिए धारा 34 (उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006) एक अहम प्रक्रिया है. इस धारा के जरिए जमीन के नामांतरण यानी मालिकाना हक बदलने की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाती है. यह प्रक्रिया खासतौर पर खरीद-बिक्री, दान, वसीयत या पारिवारिक बंटवारे जैसी परिस्थितियों में लागू होती है. धारा 34 के तहत सबसे पहले व्यक्ति को आवेदन करना होता है. आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज जैसे रजिस्ट्री की कॉपी, खतौनी (खाता विवरण), आधार कार्ड और पहचान पत्र जमा करने होते है. आवेदन करने के बाद संबंधित विभाग द्वारा इसकी जांच शुरू की जाती है. इसके बाद आवेदन दर्ज कर सूचना जारी की जाती है, ताकि इस प्रक्रिया की जानकारी अन्य संबंधित लोगों को भी मिल सके.
क्या है धारा 34 और दाखिल-खारिज
दाखिल-खारिज एक उर्दू शब्द है. दाखिल का मतलब नया नाम दर्ज करना और खारिज का मतलब पुराना नाम हटाना है. धारा 34 (UP Revenue Code 2006) एक अहम प्रक्रिया है. यह कानून किसी भी संपत्ति हस्तांतरण जैसे- खरीद, वसीयत, विरासत के बाद, 3 महीने के भीतर राजस्व रिकॉर्ड (खतौनी) में नए खरीदार का नाम दर्ज करने का प्रावधान करता है, क्योंकि सिर्फ रजिस्ट्री करा लेना काफी नहीं है. दाखिल-खारिज के बाद ही सरकारी रिकॉर्ड में आप जमीन के असली मालिक माने जाते हैं.
जनपद #चित्रकूट में भूमि संबंधी अभिलेखों को अद्यतन एवं पारदर्शी बनाने हेतु उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 34 के अंतर्गत नामांतरण (दाखिल-खारिज) की प्रक्रिया- ⤵️https://t.co/yAQF2fzI9c
— DM Chitrakoot (@ChitrakootDm) June 14, 2026
✔ आवेदन एवं दस्तावेज प्रस्तुत करें
✔ नामांतरण वाद दर्ज एवं सार्वजनिक सूचना
✔ आपत्ति… pic.twitter.com/60sIRFL8CK
इस संबंध में चित्रकूट के डीएम ने अपने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट किया है. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि चित्रकूट जनपद में जमीन के रिकॉर्ड को बिल्कुल सही और साफ-सुथरा रखने के लिए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 34 के तहत नामांतरण यानी दाखिल-खारिज कराया जाता है. अगर किसी को आपत्ति होती है, तो वह निश्चित समय के भीतर अपनी बात रख सकता है. आमतौर पर 30 दिन के अंदर आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं, जिससे सभी पक्षों को अपनी बात रखने का मौका मिलता है.
चित्रकूट में दाखिल-खारिज की पूरी प्रक्रिया
आवेदन- रजिस्ट्री के बाद, तहसीलदार के दफ्तर या vaad.up.nic.in पर ऑनलाइन आवेदन करें.
दस्तावेज- आवेदन के साथ पंजीकृत सेल डीड (रजिस्ट्री), खतौनी, आधार कार्ड और शपथ पत्र ऐड करें.
जांच
वेरिफिकेशन- तहसीलदार, पटवारी (लेखपाल) को मामले की जांच करने का निर्देश देते हैं.
नोटिस- अगर कोई आपत्ति है, तो उसे 30 दिनों के भीतर दर्ज करना होता है.
अंतिम आदेश- अगर, कोई विवाद नहीं है, तो तहसीलदार म्यूटेशन की अनुमति देते हैं और नया नाम खतौनी में दर्ज किया जाता है.
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