रेलवे बोर्ड की ओर से जारी ताजा अपडेट के अनुसार, प्रोजेक्ट के लिए बांसी से इकौना तक 120 किमी लंबे हिस्से में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इस रूट के बनने से श्रावस्ती, बलरामपुर, उतरौला, डुमरियागंज और बांसी के यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा. फिलहाल, खलीलाबाद से बहराइच जाने वाले यात्रियों को कोई सीधा रेल मार्ग उपलब्ध न होने की वजह से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
ट्रेनों से जाने के लिए यात्रियों को पहले खलीलाबाद से गोंडा जंक्शन जाना पड़ता है और फिर वहां से बहराइच के लिए दूसरी ट्रेन या बस पकड़नी पड़ती है. इस चक्कर में लगभग 5 से 6.5 घंटे बर्बाद हो जाते हैं. वहीं, कार या बस से NH-27 होते हुए गोंडा होकर लगभग 195 से 205 किलोमीटर का सफर तय करने में करीब 5 घंटे का समय लगता है.
240 किमी नई ब्रॉडगेज लाइन के बाद 2 से 2.5 घंटे में होगा सफर
इस प्रोजेक्ट के पूरा हो जाने पर 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार क्षमता वाली इस सीधी रेल लाइन पर एक्सप्रेस ट्रेनें दौड़ेंगी, तो खलीलाबाद से बहराइच की दूरी महज 2 से 2.5 घंटे में पूरी हो जाएगी. इससे यात्रियों के 3 से 3.5 घंटे की समय की बचत होगी.
4940 करोड़ का बजट
पूर्वी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती और पिछड़े जिलों को जोड़ने वाले इस 240 किमी लंबे प्रोजेक्ट को स्पेशल रेलवे प्रोजेक्ट के रूप में अधिसूचित किया गया है. 4,940 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर मार्च 2026 तक 1,525 करोड़ खर्च हो चुके हैं. वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 686 करोड़ रुपये के बजट का विशेष प्रावधान किया गया है.
3 चरणों में होगा निर्माण
- पहला चरणः खलीलाबाद से बांसी - 54 किमी के इस हिस्से में मिट्टी भराई , छोटे-बड़े पुलों के निर्माण और नए रेलवे स्टेशनों का ढांचा तैयार करने का काम शुरू हो गया है.
- दूसरा चरणः बांसी से इकौना - 120 किमी के इस 120 किलोमीटर लंबे सेक्शन में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है.
- तीसरा चरणः इकौना से बहराइच - 66 किमी के इस आखिरी चरण में भी भूमि अधिग्रहण का काम उन्नत स्तर पर पहुंच गया है.
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श्रावस्ती, बलरामपुर, डुमरियागंज और बांसी को सीधी कनेक्टिविटी
इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह उत्तर प्रदेश के ऐसे जिलों और तहसील मुख्यालयों को सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ेगा, जो दशकों से रेल सेवा से वंचित थे. इसके निर्माण होने के बाद अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र श्रावस्ती सीधे रेल मार्ग से जुड़ जाएगा, जिससे देश-विदेश के पर्यटकों की आवाजाही बेहद आसान होगी. वहीं, बलरामपुर, उतरौला, डुमरियागंज, बांसी और बहराइच के लोगों के लिए गोरखपुर या राजधानी लखनऊ आना-जाना आधा समय रह जाएगा. साथ ही रेल कनेक्टिविटी सुधरने से तराई क्षेत्र में नए व्यापारिक गलियारे बनेंगे, माल ढुलाई आसान होगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार व आर्थिक विकास के नए दरवाजे खुलेंगे.
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