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Tax Saving Tips: इनकम टैक्‍स रिटर्न भरने से पहले ये 6 बातें नोट कर लें, बचेगा खूब सारा पैसा, CA से समझें  

Tax Saving Tips before ITR Deadline: इनकम टैक्‍स रिटर्न की डेडलाइन नजदीक आ रही है. ऐसे में जरूरी है कि आप समय रहते रिटर्न फाइल कर दें. लेकिन उससे पहले टैक्‍स बचाने के तरीके भी जान लेना चाहिए. CA अमित कुमार ने 6 तरीके बताए हैं.

Tax Saving Tips: इनकम टैक्‍स रिटर्न भरने से पहले ये 6 बातें नोट कर लें, बचेगा खूब सारा पैसा, CA से समझें  
ITR Deadline नजदीक है, जानिए कैसे बचेगा आपका टैक्‍स
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

ITR Filing, Tax Saving Tips: इनकम टैक्‍स रिटर्न की आखिरी तारीख काफी नजदीक आ गई है. अगर आपने भी अब तक ITR नहीं भरा है तो आपके पास बहुत कम समय बचा है. इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट ने अब तक 31 जुलाई की डेडलाइन को आगे बढ़ाने का फैसला नहीं लिया है. गुरुग्राम में एक बड़े इंडस्ट्रियल ग्रुप में ACFO के तौर पर काम कर चुके CA अमित कुमार ने कहा कि पिछले कुछ सालों में ऐसा ट्रेंड देखा गया है कि आखिरी तारीख बढ़ाई गई है, लेकिन टैक्‍सपेयर्स की समझदारी इसी में है कि वे 31 जुलाई से पहले ITR फाइल कर दें. उन्‍होंने टैक्‍सपेयर्स के लिए टैक्‍स बचाने के तरीकों पर भी बात की. खासतौर पर उन्‍होंने 6 तर‍ह के डिडक्‍शन क्‍लेम करने के प्रावधानों के बारे में बताया.

ओल्‍ड टैक्‍स रिजीम वाले ऐसे बचा सकते हैं टैक्‍स

CA अमित कुमार ने बताया कि ओल्‍ड टैक्‍स रिजीम में 80C और NPS से बड़ा फायदा होता है. सेक्शन 80C के तहत PPF, EPF और ट्यूशन फीस पर 1.5 लाख रुपये तक की छूट ली जा सकती है. वहीं सेक्शन 80CCD(1B) में NPS के जरिए 50 हजार रुपये का अतिरिक्त डिडक्शन लिया जा सकता है. इस तरह कुल 2 लाख तक की छूट ली जा सकती है

उन्‍होंने हेल्थ, एजुकेशन और होम लोन ब्याज पर टैक्‍स छूट के बारे में भी बताया. बोले- 80D में हेल्थ इंश्योरेंस पर 1 लाख रुपये तक, जबकि 80E में एजुकेशन लोन ब्याज पर बिना सीमा के छूट ली जा सकती है. वहीं सेक्शन 24(B) में होम लोन ब्याज पर 2 लाख रुपये तक का लाभ लिया जा सकता है.

अमित कुमार ने दान पर छूट के बारे में भी बताया. उन्‍होंने बताया क‍ि सेक्शन 80G के तहत मान्यता प्राप्त संस्थाओं को दिए गए डोनेशन या दान पर 50% से 100% तक टैक्स डिडक्शन का दावा करने का विकल्प रहता है. सही जानकारी से टैक्‍सपेयर्स काफी बचत कर सकते हैं.

इन 6 बातों का ध्‍यान रखें टैक्‍सपेयर्स 

  • अगर आपने पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ), कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट, ईएलएसएस, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी), सुकन्या समृद्धि योजना, जीवन बीमा प्रीमियम, बच्चों की ट्यूशन फीस या होम लोन के मूलधन का भुगतान किया है, तो सेक्शन 80सी के तहत अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक की टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है. यह टैक्स बचाने का सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला प्रावधान है.
  • वहीं, अगर आपने नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में निवेश किया है, तो सेक्शन 80सीसीडी(1बी) के तहत 50,000 रुपए तक की अतिरिक्त टैक्स छूट मिल सकती है. यह छूट सेक्शन 80सी से अलग होती है. यानी 80सी और 80सीसीडी(1बी) को मिलाकर कुल 2 लाख रुपए तक की टैक्स बचत संभव है.
  • यदि आपने अपने, जीवनसाथी, बच्चों या माता-पिता के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली है, तो सेक्शन 80डी के तहत टैक्स छूट का लाभ मिल सकता है. यह छूट परिवार की स्थिति और वरिष्ठ नागरिकों के आधार पर 25,000 से 1 लाख रुपए तक हो सकती है. हालांकि, प्रीमियम का भुगतान बैंकिंग माध्यम से किया गया होना चाहिए.
  • इसके अलावा, उच्च शिक्षा के लिए लिया गया एजुकेशन लोन भी टैक्स बचाने में मदद करता है. सेक्शन 80ई के तहत एजुकेशन लोन पर चुकाए गए ब्याज की पूरी राशि पर निर्धारित अवधि तक टैक्स छूट मिलती है. इसमें किसी अधिकतम सीमा का प्रावधान नहीं है. हालांकि, यह छूट केवल ब्याज पर मिलती है, लोन के मूलधन पर नहीं.
  • वहीं, अगर आपने सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी संस्था, ट्रस्ट या राहत कोष में दान दिया है, तो सेक्शन 80जी के तहत 50 प्रतिशत या 100 प्रतिशत तक टैक्स छूट मिल सकती है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि दान किस संस्था को दिया गया है. डिडक्शन का दावा करने के लिए दान की रसीद और संबंधित संस्था का पंजीकरण विवरण सुरक्षित रखना जरूरी है.
  • इसके साथ ही, अगर आपने घर खरीदने के लिए होम लोन लिया है तो सेक्शन 24(बी) के तहत होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपए तक की टैक्स छूट का लाभ लिया जा सकता है. ध्यान रहे कि यह छूट केवल ब्याज पर मिलती है, जबकि होम लोन का मूलधन सेक्शन 80सी के तहत क्लेम किया जाता है.

फॉर्म 16, AIS और फॉर्म 26AS का मिलान जरूरी 

रिटर्न दाखिल करने से पहले फॉर्म 16, एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 26एएस का मिलान जरूर कर लें, ताकि आपकी आय और टैक्स कटौती की जानकारी में कोई अंतर न रहे. जिन डिडक्शन का दावा करना है, उनसे जुड़े सभी दस्तावेज और रसीदें अपने पास रखें. साथ ही, अपनी आय और निवेश के अनुसार सही टैक्स रिजीम का चयन करें. बैंक खाते, पैन, आधार और अन्य व्यक्तिगत जानकारी सही दर्ज करें. सबसे महत्वपूर्ण बात, आईटीआर दाखिल करने के बाद ई-वेरिफिकेशन जरूर पूरा करें, क्योंकि इसके बिना आपकी रिटर्न प्रक्रिया अधूरी मानी जा सकती है.

CA अमित कुमार ने कहा कि इनकम टैक्‍स रिटर्न भरना केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सही टैक्स प्लानिंग का भी हिस्सा है. यदि आप उपलब्ध टैक्स डिडक्शन का सही तरीके से लाभ उठाते हैं और सभी जरूरी दस्तावेजों का मिलान करके रिटर्न दाखिल करते हैं, तो न केवल अतिरिक्त टैक्स देने से बच सकते हैं बल्कि भविष्य में किसी भी तरह की टैक्स संबंधी परेशानी से भी दूर रह सकते हैं.

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