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बसों में GPS सिस्टम और SOS बटन कैसे करता है काम, सभी राज्यों में सरकार ने किया है अनिवार्य

असम में राज्य परिवहन निगम की बसों में इंटेलिजेंस ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया जाएगा. यूपी, राजस्थान, हरियाणा और तमिलनाडु जैसे राज्यों में बसों में GPS और पैनिक बटन लगाने का निर्देश दिए गए हैं.

बसों में GPS सिस्टम और SOS बटन कैसे करता है काम, सभी राज्यों में सरकार ने किया है अनिवार्य
GPS और SOS बटन बस में जरूरी
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

भारत सरकार ने देश के सभी राज्यों में पब्लिक और कमर्शियल बसों में GPS और व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया है. इसके तहत असम में यात्रियों की सुरक्षा के उद्देश्य से राज्य परिवहन निगम की बसों में इंटेलिजेंस ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लगाया जाएगा. रियल टाइम मॉनिटरिंग से अधिकारियों को बसों के बेड़े की आवाजाही पर नजर रखने, कामकाज में देरी का पता लगाने और सड़क पर होने वाली घटनाओं पर ज्यादा असरदार तरीके से कार्रवाई करने में भी मदद मिल सकती है.

वहीं यूपी, राजस्थान, हरियाणा और तमिलनाडु जैसे राज्यों में बसों में GPS और पैनिक बटन लगाने का निर्देश दिए गए हैं. राजस्थान रोडवेज बस में लाइव लोकेशन और ओवरस्पीड की निगरानी के लिए GPS सिस्टम लगाए जा रहे हैं. हरियाणा में GPS और GPRS सिस्टम अनिवार्य किया गया है. तमिलनाडु में  आधुनिकीकरण अभियान के तहत सभी TNSTC बसों में जीपीएस डिवाइस लगाए जा रहे हैं.

GPS सिस्टम क्या है?

GPS एक सेटेलाइट बेस्ड नेविगेशन सिस्टम है जो वाहन की सटीक स्थिति, रफ्तार और दिशा को ट्रैक करती है. इससे बसों कि रियल टाइम ट्रैकिंग हो सकती है. परिवहन विभाग 24 घंटे बस पर नजर रख सकती है कि वह किस रूट पर है और कहां चल रही है. अगर ड्राइवर तय रूट से अलग बस ले जाता है या ओवर स्पीड गाड़ी चला रहा है तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देता है. GPS डेटा की मदद से यात्री मोबाइल ऐप के जरिए देख सकते हैं कि उनकी बस कितनी देर में स्टॉप पर पहुंचने वाली है. अब हर ट्रेन में भी GPS सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है.

SOS बटन क्या है?

SOS बटन बसों के अंदर यात्रियों और ड्राइवर की सीट के पास लगा एक आपातकालीन सुरक्षा बटन होता है. इससे आपातकालीन अलर्ट जैसे बस में कोई दुर्घटना, छेड़खानी, मेडिकल इमरजेंसी या कोई संदिग्ध घटना होती है तो यात्री इस बटन को दबा सकते हैं. बटन दबाते ही तुरंत पुलिस नियंत्रण कक्ष और राज्य परिवहन विभाग के मुख्य कमांड सेंटर को एक अलर्ट चला जाता है. अलर्ट के साथ ही बस की लाइव लोकेशन भी पुलिस के पास पहुंच जाती है, जिससे नजदीकी PCR वैन तुरंत मदद के लिए मौके पर भेजी जा सकती है. 

GPS और SOS बटन दोनों कॉम्बिनेशन जरूरी है, बिना GPS के केवल SOS बटन दबाने से यह पता नहीं चल पाएगा की आपातकालीन स्थिति किस जगह पर है. SOS बटन दबाने पर GPS सिस्टम से ही बस का सटीक भौगोलिक लोकेशन पुलिस को भेजता है. तभी फंसे यात्रियों तक मदद पहुंचाई जा सकती है. 

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