आम आदमी को महंगे इलाज से राहत दिलाने के लिए संसद की एक स्थायी समिति (Parliamentary Panel) ने कई सिफारिशें की हैं. यदि इन प्रस्तावों को पूरी तरह लागू किया जाता है, तो प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी फीस पर लगाम लगेगी. साथ ही स्वास्थ्य सेवाएं और दवाएं काफी हद तक सस्ती हो जाएंगी.
समिति ने सिफारिश की है कि प्राइवेट अस्पतालों में कमरों के चार्ज तय करने के लिए एक सिस्टम बनाया जाए. इसके तहत अस्पतालों को भर्ती करने से पहले अपने सभी शुल्क पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करने होंगे, और ओवर-बिलिंग व बीमा विवादों के समाधान के लिए एक स्वतंत्र ओम्बुडमैन नियुक्त किया जाएगा. कैंसर की दवाएं होंगी सस्ती और मुनाफे पर लगाम का भी प्रावधान है.
वहीं दूसरी ओर सरकारी स्वास्थ्य बीमा दावों के निपटारे के लिए 30 दिन की सख्त समयसीमा तय करने की सिफारिश की गई है. तय समय सीमा में भुगतान न होने पर अस्पतालों को पेनल्टी और ब्याज चुकाना होगा. देश के करीब 40 करोड़ असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए 4,000 से 6,000 रुपये सालाना प्रीमियम पर एक स्वैच्छिक बीमा योजना लाने की सिफारिश की गई है, जिसमें ओपीडी और डायग्नोस्टिक कवरेज भी मिलेगा.
1. प्राइवेट अस्पतालों में रूम के किराए पर लगे कैपिंग (सीमा)
- फिक्स रेट: समिति ने मांग की है कि प्राइवेट अस्पतालों में कमरों के चार्ज तय करने के लिए तुरंत एक कानूनी तंत्र (Legal Mechanism) बनाया जाए.
- पारदर्शिता: अस्पतालों के लिए यह अनिवार्य किया जाए कि वे मरीज को भर्ती करने से पहले ही अपने सभी शुल्कों (Tariffs) की सूची सार्वजनिक करें.
- फास्ट-ट्रैक ओम्बडमैन: अत्यधिक बिलिंग और बीमा (Insurance) से जुड़े विवादों की त्वरित जांच के लिए एक स्वतंत्र ओम्बडमैन नियुक्त करने की सिफारिश की गई है.
2. स्वास्थ्य सेवाओं पर जीरो-रेटेड जीएसटी (0%)
वर्तमान में स्वास्थ्य सेवाएं 'जीएसटी से मुक्त' (GST Exempt) हैं, लेकिन समिति ने इन्हें 'जीरो-रेटेड जीएसटी' के दायरे में लाने की सिफारिश की है.
इससे अस्पतालों को भारी पूंजीगत खर्च (Capital Outlays) और महंगे उपकरणों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ मिलेगा, जिससे अंततः इलाज का खर्च कम हो सकता है.
3. मेडिकल टूरिज्म से गरीबों के इलाज की क्रास-सब्सिडी
जिन कॉर्पोरेट अस्पताल चेन को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) या रियायती दरों पर जमीन का लाभ मिला है, उन्हें विदेशी मरीजों से होने वाली कमाई का एक हिस्सा घरेलू गरीब मरीजों के मुफ्त या सस्ते इलाज के लिए उपयोग करना होगा.
4. दवाइयों और फार्मेसी पर कड़ा एक्शन
कैंसर और अन्य जीवन रक्षक दवाओं पर अनुचित ट्रेड मार्जिन (मार्जिन प्रॉफिट) को सीमित करने के लिए मल्टी-सेक्टरल ऑडिट के आदेश का प्रस्ताव है. एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) को रोकने के लिए काउंटर से सीधे एंटीबायोटिक्स बेचने पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाएगा. वहीं मानव खाद्य श्रृंखला में दवा प्रतिरोध (Drug Resistance) को रोकने के लिए पशुधन और सी-फूड प्रोसेसिंग में 19 विशिष्ट एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल पर अनिवार्य प्रतिबंध लगाया जाएगा.
5. ग्रामीण क्षेत्रों में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर
प्राइवेट अस्पतालों को देश के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में बुनियादी ढांचा स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु एक समर्पित हेल्थकेयर कैपिटल एक्सपेंडिचर फंड, आसान ऋण (Soft Loans) और टैक्स हॉलिडे देने की सिफारिश की गई है.
6. इंश्योरेंस क्लेम को लेकर नियम
सरकारी स्वास्थ्य बीमा दावों के निपटारे के लिए 30 दिन की सख्त समयसीमा तय की गई है. यदि भुगतान में देरी होती है, तो अस्पतालों को अनिवार्य रूप से पेनल्टी सहित ब्याज का भुगतान करना होगा. देश के करीब 40 करोड़ असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए 4,000 रुपये से 6,000 रुपये प्रति वर्ष की प्रीमियम दर पर एक मानकीकृत और स्वैच्छिक बीमा योजना की सिफारिश की गई है. इसमें ओपीडी (OPD) और डायग्नोस्टिक कवरेज भी शामिल होगा.
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