केंद्र सरकार जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट, जेप्टो, अमेजॉन, फ्लिपकार्ट (Zomato, Swiggy, Blinkit, Flipkart) समेत तमाम प्लेटफॉर्म के डिलीवरी ब्वॉयज, ओला-उबर (Ola, Uber) कैब ड्राइवर को सोशल सिक्योरिटी यानी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना चाहती है. इसके लिए सरकार ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत बनाए गए ड्राफ्ट में प्रस्ताव किया है. बता दें कि सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 समेत चार नए लेबर कोड्स 21 नवंबर, 2025 को नोटिफाई किए गए थे.
साल में कम से कम 90 दिन काम करना जरूरी
श्रम मंत्रालय ने ऐप-आधारित डिलीवरी पार्टनर, कैब ड्राइवर और फ्रीलांसर जैसे अस्थायी कामगारों (गिग वर्कर) को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए साल भर में कम-से-कम 90 दिन काम करने का प्रस्ताव रखा है.
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत बनाए गए नए मसौदा नियमों में यह प्रस्ताव रखा गया है. यह मसौदा 31 दिसंबर को जारी किया गया है और इस पर हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं.
मसौदा नियमों के मुताबिक,
- यदि कोई अस्थायी या ऑनलाइन मंच से जुड़ा कामगार किसी एक कंपनी या ऐप के साथ पिछले वित्त वर्ष में कम-से-कम 90 दिन काम करता है, तो वह सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए पात्र माना जाएगा.
- अगर इस अवधि में वह एक से अधिक ऐप या कंपनियों के साथ काम करता है, तो कुल मिलाकर उसे न्यूनतम 120 दिन काम करना होगा.
- मंत्रालय ने साफ किया है कि किसी दिन चाहे जितनी भी कमाई हुई हो, यदि उस दिन काम किया गया है तो उसे एक कार्यदिवस माना जाएगा.
- अगर कोई डिलीवरी पार्टनर या कैब ड्राइवर किसी दिन ऐप के जरिये एक भी ऑर्डर या सफर को पूरा करता है, तो वह दिन उसके कामकाजी दिन के रूप में गिना जाएगा.
- यहां तक कि यदि कोई व्यक्ति एक ही दिन में तीन अलग-अलग ऐप के लिए काम करता है, तो उसे तीन दिन का काम माना जाएगा.
कौन-से गिग वर्कर्स शामिल होंगे?
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कहा कि ऐसे सभी गिग वर्कर इसमें शामिल होंगे, जिन्हें कंपनियां सीधे या किसी दूसरी सहयोगी कंपनी या एजेंसी के जरिये काम पर रखती हैं. हर कंपनी को अपने साथ जुड़े अस्थायी कामगारों की जानकारी नियमित रूप से सरकारी पोर्टल पर अद्यतन करनी होगी. जानकारी अद्यतन नहीं होने पर कामगार को सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल पाएगा.
नए नियमों के तहत, 16 साल या उससे अधिक उम्र के हर अस्थायी कामगार को 'आधार' जैसे दस्तावेजों के आधार पर एक निर्धारित पोर्टल पर अपना पंजीकरण करना होगा. पंजीकरण के बाद उन्हें एक डिजिटल पहचान पत्र मिलेगा, जिसे पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकेगा.
गिग वर्कर के लिए एक अलग सामाजिक सुरक्षा कोष बनाया जाएगा, जिसमें कंपनियों से लिया गया योगदान जमा होगा. यदि कोई कंपनी तय समय पर यह योगदान जमा नहीं करती है, तो उसे हर महीने एक प्रतिशत ब्याज भी देना होगा.
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