- पिछले पंद्रह वर्षों में सोने ने औसतन नौ से दस प्रतिशत सालाना रिटर्न दिया है, जो निवेशकों के लिए आकर्षक है.
- फिजिकल सोने में मेकिंग चार्ज 10 से 25 प्रतिशत तक होता है, जिससे निवेश की लागत बढ़ जाती है.
- गोल्ड ईटीएफ ने डिजिटल माध्यम से सोने में निवेश को आसान, पारदर्शी और सुरक्षित विकल्प के रूप में पेश किया है.
Gold Investment Tips: भारत में सोने को सिर्फ एक कीमती धातु ही नहीं, बल्कि मुसीबत के वक्त का सबसे बड़ा सहारा और सुरक्षित निवेश माना जाता है. आज भी देश का एक बड़ा वर्ग सोने के गहनों, सिक्कों या ईंटों के रूप में ही पैसे लगाना पसंद करता है.
इसकी वजह सिर्फ ज्यादा मुनाफा कमाना नहीं है, बल्कि इससे सांस्कृतिक परंपराएं, सालों पुराना भरोसा और लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई है. हालांकि, अब गोल्ड ईटीएफ भी एक बहुत आसान, पारदर्शी और सुरक्षित विकल्प के तौर पर उभरा है.
जानें सोना कैसे हैं मुनाफे में भी आगे
अगर लंबे समय के लिए देखा जाए, तो सोने ने हमेशा निवेशकों की जेब भरी है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 15 सालों में सोने ने हर साल औसतन 9 से 10 फीसदी तक का तगड़ा रिटर्न दिया है. वहीं, पिछले 10 सालों में तो इसका प्रदर्शन और भी शानदार रहा है, जहां निवेशकों को सालाना करीब 12 फीसदी के आसपास रिटर्न मिला है. यही कारण है कि जब भी शेयर बाजार में उथल पुथल मचती है, लोग आंख बंद करके सोने पर ही अपना भरोसा जताते हैं.
जानिए सोने में छिपे हुए खर्चे
निवेशकों को सोना खरीदते वक्त कुछ व्यावहारिक और वित्तीय पहलुओं का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. दरअसल, ज्वेलरी खरीदते वक्त 10 से लेकर 25 प्रतिशत तक मेकिंग चार्ज देना पड़ता है. यह पैसा आपकी मूल निवेश लागत को बढ़ा देता है. इसके अलावा, फिजिकल गोल्ड को घर में रखने पर चोरी का डर रहता है, जबकि लॉकर के लिए अलग से किराया देना पड़ता है. साथ ही, शुद्धता को लेकर भी जोखिम बना रहता है.
लिहाजा, जब आप सोने की ज्वेलरी बेचने जाते हैं, तो मेकिंग चार्ज और टूट-फूट के नाम पर कटौती की जाती है, जिससे निवेशक को बाजार के वास्तविक मूल्य का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है.
गोल्ड ईटीएफ बना स्मार्ट निवेश
भारत में साल 2007 में शुरुआत होने के बाद से गोल्ड ईटीएफ ने सोने में पैसे लगाने के तरीके को बेहद आसान और पारदर्शी बना दिया है. इसे आप ठीक वैसे ही समझ सकते हैं जैसे शेयर बाजार में शेयर्स खरीदे और बेचे जाते हैं. कोई भी निवेशक अपने डीमैट अकाउंट के जरिए लाइव मार्केट रेट्स पर इसे मिनटों में खरीद या बेच सकता है.
सोना ने हमेशा दिया है बंपर रिटर्न
अगर 10 से 15 साल की तुलना करें, तो गोल्ड ईटीएफ ने फिजिकल गोल्ड जितना ही रिटर्न दिया है. हालांकि, इसे मैनेज करने के लिए कंपनियां 0.3 से एक प्रतिशत तक का सालाना फंड मैनेजमेंट चार्ज लेती है. हालांकि, यह आभूषणों पर लगने वाले भारी-भरकम मेकिंग चार्ज के मुकाबले न के बराबर है. सबसे अच्छी बात यह है कि ईटीएफ 99.5 प्रतिशत शुद्ध 24 कैरेट सोने के बैकअप पर आधारित होता है, इसलिए इसमें न तो मिलावट का झंझट रहता है और न ही चोरी या लॉकर में सुरक्षित रखने की चिंता.
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दोनों ही विकल्पों की अपनी खास जगह और जरूरत है. अगर आप सिर्फ लंबे समय के लिए संपत्ति जोड़ना चाहते हैं और बिना किसी झंझट के सुरक्षित निवेश देखना चाहते हैं, तो गोल्ड ETF एक पारदर्शी और कम लागत वाला बेहतरीन जरिया है. इसके विपरीत, अगर घर में शादी-ब्याह की तैयारी है, गहने बनवाने हैं या किसी को तोहफा देना है, तो फिजिकल गोल्ड लेना ही ज्यादा सही और व्यावहारिक होता है.
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