अगर आप भी म्यूचुअल फंड के जरिए गोल्ड या सिल्वर ETF (Exchange Traded Funds) में पैसा लगाते हैं, तो आपके लिए बड़ी और राहत भरी खबर है. शेयर बाजार के रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने गोल्ड और सिल्वर ETF के बदले रखे जाने वाले असली यानी फिजिकल सोने-चांदी की सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाए हैं. SEBI ने वॉल्ट संभालने वाली कंपनियों यानी 'वॉल्ट मैनेजर्स' के लिए नियम काफी सख्त कर दिए हैं, ताकि निवेशकों के सोने-चांदी की कस्टडी पूरी तरह सुरक्षित रहे.
वॉल्ट मैनेजरों के लिए नेट-वर्थ सीमा ₹75 करोड़ हुई
मार्केट रेगुलेटर ने वॉल्ट मैनेजर के लिए न्यूनतम नेट-वर्थ लिमिट बढ़ादी है. नए नियमों के तहत अब वॉल्ट मैनेजर बनने के लिए न्यूनतम नेट-वर्थ सीमा को ₹50 लाख से बढ़ाकर सीधे ₹75 करोड़ कर दिया गया है.इसके अलावा, इन कंपनियों पर बुलियन की सुरक्षित कस्टडी, प्योरिटी की जांच और सही हिसाब-किताब रखने की पूरी जिम्मेदारी होगी.
हालांकि अगर आपके डिमैट अकाउंट में गोल्ड या सिल्वर ETF हैं, तो ये जान लें कि SEBI के नए नियम के निवेशकों के ETF खरीदने, बेचने या डिमैट अकाउंट में रखने के तरीके में कोई बदलाव नहीं होगा. यह बदलाव उस फिजिकल गोल्ड और सिल्वर की सुरक्षा से जुड़ा है, जो इन ETF यूनिट्स के बैकएंड में रखा रहता है.
चोरी से लेकर साइबर अटैक तक सुरक्षा
वॉल्ट मैनेजरों को सोने-चांदी को कई तरह के जोखिमों से बचाने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने होंगे.. इनमें चोरी, सेंधमारी, आग, धोखाधड़ी, आतंकवाद और साइबर अटैक जैसे जोखिम शामिल हैं.बुलियन को उस इंस्ट्रूमेंट और संस्था के हिसाब से अलग-अलग रखना होगा, जिसके लिए वह रखा गया है. इससे अलग-अलग निवेश उत्पादों की संपत्ति की पहचान और हिसाब रखना आसान होगा.
गोल्ड की क्वालिटी पर भी नया नियम
पहले इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR) से जुड़े नियमों में ‘Gold Standards' का इस्तेमाल होता था. अब इसकी जगह ‘Bullion Delivery Standards' लाए जाएंगे.वॉल्ट मैनेजरों को तय जिम्मेदारियों वाला एक कॉम्प्लीएंस ऑपिसर भी नियुक्त करना होगा. इससे नियमों की निगरानी और जवाबदेही बढ़ेगी.
आपके ETF में रखा सोना-चांदी कैसे होगा सुरक्षित?
जब आप गोल्ड या सिल्वर ETF खरीदते हैं, तो आपको हाथ में सोना या चांदी नहीं मिलता. आपके डिमैट अकाउंट में ETF यूनिट्स होती हैं और म्यूचुअल फंड स्कीम के पास उनके पीछे रखा फिजिकल बुलियन होता है.
SEBI ने साल 2021 में Vault Managers Regulations बनाए थे. तब इनका मुख्य फोकस EGR के पीछे रखे गोल्ड पर था. इसमें वॉल्ट मैनेजर का रजिस्ट्रेशन, सुरक्षा, इंश्योरेंस, प्योरिटी की जांच, रिकॉर्ड और मिलान जैसे नियम शामिल थे.अब SEBI ने इस दायरे को गोल्ड और सिल्वर ETF और बुलियन डेरिवेटिव्स तक बढ़ा दिया है.
निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा?
निवेशकों के लिए सबसे खास बात यह है कि ETF खरीदने-बेचने की प्रक्रिया नहीं बदलेगी. ये बदलाव मुख्य रूप से उस फिजिकल बुलियन की कस्टडी, सुरक्षा और रिकॉर्ड-कीपिंग में है, जो ETF के पीछे रखा जाता है.
SEBI की 215वीं बोर्ड बैठक में इन बदलावों को मंजूरी दी गई है. SEBI का कहना है कि मजबूत नियमों से इन बुलियन आधारित निवेश उत्पादों में निवेशकों की सुरक्षा और भरोसा बढ़ाने में मदद मिलेगी.नए नियमों को लागू करने के लिए रेगुलेटर अलग से जरूरी सर्कुलर जारी करेगा.
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