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This Article is From Jan 07, 2026

EPF की सैलरी लिमिट पर सुप्रीम कोर्ट ने दी 4 महीने की डेडलाइन, जानें लाखों कर्मचारियों के लिए क्यों है ये गुड न्यूज

EPFO Update: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और EPFO को साफ कहा है कि EPF की वेतन सीमा को लेकर चार महीने के अंदर फैसला लिया जाए. अगर सरकार और EPFO वेतन सीमा बढ़ाने का फैसला लेते हैं, तो यह नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी राहत होगी.

EPF की सैलरी लिमिट पर सुप्रीम कोर्ट ने दी 4 महीने की डेडलाइन, जानें लाखों कर्मचारियों के लिए क्यों है ये गुड न्यूज
EPF wage ceiling: कोर्ट ने माना कि लंबे समय से वेतन सीमा में बदलाव न होने की वजह से बहुत से कर्मचारी EPF के दायरे से बाहर हो गए हैं.
नई दिल्ली:

नौकरी करने वाले लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है. अगर आपकी सैलरी 15 हजार रुपये से थोड़ी भी ज्यादा है और आप EPF यानी पीएफ के फायदे से बाहर रह गए हैं, तो आपके लिए ये अच्छी खबर है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और EPFO को सख्त निर्देश दिया है कि अगले 4 महीने के भीतर ईपीएफ की वेतन सीमा (Wage Ceiling) को बढ़ाने पर अंतिम फैसला लिया जाए. यह वही सीमा है जो पिछले 11 साल से नहीं बदली गई है. कोर्ट का यह आदेश उन लाखों कर्मचारियों के लिए उम्मीद की किरण है जो पिछले 11 साल से इस नियम के बदलने का इंतजार कर रहे हैं.अब सवाल यह है कि क्या सरकार इसे बढ़ाएगी और क्या अब ज्यादा कर्मचारियों को पीएफ का फायदा मिलेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और EPFO को निर्देश दिया है कि वे EPF स्कीम के तहत वेतन सीमा बढ़ाने या नहीं बढ़ाने पर चार महीने में फैसला करें. यह आदेश एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया. कोर्ट ने माना कि लंबे समय से वेतन सीमा में बदलाव न होने की वजह से बहुत से कर्मचारी EPF के दायरे से बाहर हो गए हैं.

11 साल से क्यों नहीं बदली लिमिट?

फिलहाल EPF के लिए वेतन सीमा 15 हजार रुपये महीना है.  जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी + डीए  15,000 रुपये तक है, उनके लिए पीएफ का हिस्सा कटना अनिवार्य है. यह सीमा सितंबर 2014 से अब तक नहीं बदली गई है. इस दौरान महंगाई और न्यूनतम वेतन (Minimum Wage) कई गुना बढ़ा है और लोगों की आमदनी में भी बदलाव आया है. इसके बावजूद EPF की सीमा वही की वही है. इसका नतीजा यह हुआ कि जिन लोगों की सैलरी 15 हजार से थोड़ी भी ज्यादा है,या  मामूली वेतन वृद्धि होते ही कर्मचारी EPF के दायरे से बाहर रह जाते हैं.

इस नियम की वजह से लाखों नौकरीपेशा लोग पीएफ जैसी सोशल सिक्योरिटी स्कीम से वंचित हो गए हैं. EPF का मकसद रिटायरमेंट के बाद सुरक्षा देना है, लेकिन मौजूदा सीमा के चलते बहुत से कर्मचारी इस फायदे से बाहर हैं. याचिका में कहा गया कि यह तरीका न तो ठीक है और न ही आज के समय के हिसाब से सही बैठता है.

क्या है एक्सपर्ट्स की मांग? 

यह जनहित याचिका डॉक्टर नवीन प्रकाश नौटियाल ने दाखिल की थी. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया कि 15,000 की लिमिट आज के दौर में बिल्कुल तर्कसंगत नहीं है. इसका न तो महंगाई से कोई लेना देना है और न ही बढ़ते न्यूनतम वेतन से. जबकि कई एक्सपर्ट और संसद की समितियां पहले ही कह चुकी हैं कि EPF की वेतन सीमा समय समय पर बढ़नी चाहिए.

एक्सपर्ट्स और संसद की समितियां सुझाव दे चुकी हैं कि इस सीमा को बढ़ाकर 21,000 रुपये या 25,000 रुपये किया जाना चाहिए. अगर ऐसा होता है, तो पीएफ के दायरे में आने वाले कर्मचारियों की संख्या करोड़ों में बढ़ जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन का मतलब

सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन का मतलब कोर्ट ने इस मामले को अब और लटकाने की गुंजाइश नहीं छोड़ी है. सरकार को 4 महीने में यह बताना होगा कि वह इस सीमा को क्यों नहीं बढ़ा रही है या फिर इसे कब से लागू किया जा रहा है. ईपीएफओ (EPFO) की एक कमेटी पहले ही इसे बढ़ाने की सिफारिश कर चुकी है, बस अब सरकार की मुहर का इंतजार है.

न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा कि वर्तमान में EPFO की वेतन सीमा ₹15,000 प्रतिमाह है, जबकि केंद्र सरकार और देश के विभिन्न राज्यों द्वारा अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी इससे अधिक है. ऐसे में बड़ी संख्या में कर्मचारी EPFO जैसी सामाजिक सुरक्षा योजना के लाभ और संरक्षण से वंचित रह जाते हैं.

यह याचिका नवीन प्रकाश नौटियाल, एक शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा दायर की गई थी. याचिकाकर्ता की ओर से वकील प्रणव सचदेवा और नेहा राठी ने पक्ष रखा.

EPFO की अपनी रिपोर्ट में क्या कहा गया?

दिलचस्प बात यह है कि EPFO की एक सब कमेटी पहले ही वेतन सीमा बढ़ाने की सिफारिश कर चुकी है. साल 2022 में इस कमेटी ने कहा था कि ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों को EPF में शामिल किया जाना चाहिए. इस रिपोर्ट को EPFO के सेंट्रल बोर्ड ने जुलाई 2022 में मंजूरी भी दे दी थी, लेकिन अब तक इस पर कोई अमल नहीं हुआ.

हर तीन से पांच साल में वेतन सीमा बढ़ाने की सलाह

लोकसभा की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी भी इस मुद्दे पर सवाल उठा चुकी है. समिति ने कहा था कि अगर सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों को भी सोशल सिक्योरिटी स्कीम का फायदा नहीं मिलेगा तो ऐसी योजनाओं का मतलब ही खत्म हो जाता है. समिति ने हर तीन से पांच साल में वेतन सीमा बढ़ाने की सलाह दी थी.

नौकरीपेशा लोगों के लिए क्यों खास है ये फैसला

अगर EPF की वेतन सीमा बढ़ती है तो लाखों नए कर्मचारी पीएफ के दायरे में आ सकते हैं. इससे उनकी सैलरी से पीएफ कटेगा, लेकिन बदले में रिटायरमेंट के लिए एक मजबूत फंड तैयार होगा. साथ ही नौकरी बदलने या रिटायर होने के बाद आर्थिक सुरक्षा भी मिलेगी.

वेतन सीमा बढ़ने से आपको क्या होगा फायदा? 

अगर सरकार इस सीमा को 15,000 से बढ़ाकर 21,000 या 25,000 करती है, तो इसके दो बड़े फायदे होंगे..

  • आपकी सैलरी से पीएफ कटेगा, जिसमें कंपनी का भी योगदान होगा. यानी ज्यादा बचत होगी और रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा फंड तैयार होगा.
  • ईपीएफ के साथ-साथ कर्मचारी को ईपीएस (EPS) पेंशन और ईडीएलआई (EDLI) बीमा का लाभ भी  मिलने लगेगा.

यह फैसला उन लोगों के लिए सबसे अहम है जो प्राइवेट सेक्टर में कम वेतन पर काम करते हैं. पीएफ न केवल बचत का जरिया है, बल्कि यह टैक्स बचाने और जरूरत पड़ने पर जैसे घर बनाने या बीमारी में पैसा निकालने की सुविधा भी देता है. अगर सरकार और EPFO वेतन सीमा बढ़ाने का फैसला लेते हैं, तो यह नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी राहत होगी. खासकर उन लोगों के लिए जिनकी सैलरी 15 हजार से थोड़ी ज्यादा है और जो अब तक EPF से बाहर हैं.

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