EPS-95 Minimum Pension Hike: देश के लाखों पेंशनर्श अपनी मांगों को लेकर पिछले काफी समय से लगातार आवाज उठा रहे हैं.लेकिन अब देश के करीब 81 लाख पेंशनर्श के सब्र का बांध अब टूट चुका है.जिसके बाद वह आज यानी 9 मार्च 2026 से दिल्ली के जंतर-मंतर पर तीन दिनों के लिए विरोध प्रदर्शन शुरू करने जा रहे हैं.बढ़ती महंगाई के इस दौर में मात्र ₹1,000 की मिनिमम पेंशन पा रहे पेंशनर्श का कहना है कि अब इस रकम में घर चलाना तो दूर दवाइयों का खर्च उठाना भी मुमकिन नहीं है .आइए जानते हैं क्या-क्या हैं पेंशनर्स की मांगें ...
जंतर-मंतर पर 'करो या मरो' का ऐलान
आज से शुरू हुआ यह प्रदर्शन 9, 10 और 11 मार्च तक यानी लगातार तीन दिनों तक चलेगा. देश भर के अलग-अलग राज्यों से आए करीब 81 लाख पेंशनर्श इस 'करो या मरो' आंदोलन में हिस्सा ले रहे हैं. इसमें प्राइवेट सेक्टर, सरकारी पीएसयू, मिलों और मीडिया संस्थानों के रिटायर कर्मचारी शामिल हैं.
इन बुजुर्गों का कहना है कि अपनी मेहनत की कमाई का हिस्सा दशकों तक या 30-35 साल तक पीएफ (EPF) में योगदान देने के बाद भी उन्हें औसतन सिर्फ ₹1,171 महीना मिल रहा है, जो उनके साथ नाइंसाफी है.इसी नाइंसाफी के खिलाफ आज से तीन दिनों के लिए पेंशनर्स ने दिल्ली में डेरा डाल दिया है.
क्या हैं पेंशनर्स की 4 बड़ी मांगें?
पेंशनर्स ने सरकार के सामने अपनी मांगें बहुत स्पष्ट रखी हैं...
- न्यूनतम पेंशन ₹7,500 हो यानी अभी मिलने वाली ₹1,000 की मिनिमम पेंशन को बढ़ाकर ₹7,500 किया जाए.
- महंगाई भत्ता (DA) मिले. पेंशन को महंगाई के साथ जोड़ा जाए ताकि जैसे-जैसे चीजें महंगी हों, पेंशन भी बढ़े.
- मुफ्त मेडिकल सुविधा हो जिसमें पेंशनर्श और उनके जीवनसाथी (पति/पत्नी) को मुफ्त इलाज मिले.
- सुप्रीम कोर्ट के 4 नवंबर 2022 के फैसले के मुताबिक, सभी पात्र कर्मचारियों को समान रूप से हायर पेंशन का लाभ दिया जाए. साथ ही, जो लोग इस स्कीम से बाहर रह गए हैं, उन्हें भी ₹5,000 की पेंशन दी जाए.
क्यों बढ़ रहा है पेंशनर्स गुस्सा?
पेंशनर्स कमांडर अशोक राउत के नेतृत्व में आंदोलन कर रहे हैं. उनका आरोप है कि सरकार बिना किसी योगदान वाली कई योजनाओं में पेंशन दे रही है, लेकिन जिन्होंने जिंदगी भर अपनी कमाई का हिस्सा जमा किया, उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है.
उनका दावा है कि कम पेंशन और इलाज की कमी के कारण देश भर में हर रोज 200 से 250 बुजुर्ग पेंशनर्स समय से पहले दम तोड़ रहे हैं.
पेंशन की रकम बढ़ाने पर सरकार का क्या कहना है?
पेंशनर्स जहां इसे हक की लड़ाई बता रहे हैं, वहीं सरकार का क्या रुख है ये भी जान लीजिए.. सरकार का तर्क है कि पेंशन फंड (EPS-95) नियोक्ताओं और सरकार के सीमित योगदान से चलता है. हालिया समीक्षा में इस फंड में 'एक्चुअरी घाटा' (Actuarial Deficit) पाया गया है. सरकार का कहना है कि अगर अचानक पेंशन को 7.5 गुना बढ़ा दिया गया, तो फंड की स्टेबिलिटी पर संकट आ सकता है.
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