दिल्ली में हवा की गुणवत्ता (AQI) बिगड़ने और सर्दियों में जहरीली धुंध (Smog) की आशंका को देखते हुए सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए कड़े उपायों की घोषणा की है. पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा की उच्चस्तरीय बैठक के बाद राजधानी में गाड़ियों की आवाजाही, निर्माण गतिविधियों और दफ्तरों के कामकाजी घंटों से जुड़े बड़े फैसले लिए गए. अगर आप भी दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं या बाहर से अपनी गाड़ी लेकर दिल्ली आने का प्लान बना रहे हैं, तो 1 नवंबर से लागू होने वाले इन नए नियमों को ध्यान से समझ लें.
ये है पाबंदी से जुड़ी महत्वपूर्ण तारीख
एक नवंबर से दिल्ली के बाहर यानी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान आदि वगैरह में रजिस्टर्ड ऐसे सभी वाहनों के दाखिल होने पर प्रतिबंध रहेगा, जो BSVI मानकों को पूरा नहीं करते हैं.
- बिजली (EV), सीएनजी (CNG) और एलएनजी (LNG) से चलने वाले वाहनों को इस प्रतिबंध से पूरी तरह मुक्त रखा गया है.
- सरकार ने इस पाबंदी के खत्म होने की अंतिम तारीख तय नहीं की है; स्थिति सामान्य होने तक यह रोक जारी रहेगी.
पार्किंग फीस दोगुनी और 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम
- निजी वाहनों की आवाजाही को कम करने और सड़कों पर ट्रैफिक कम करने के लिए बड़े प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं, जिनकी पूरी जानकारी नीचे दी गई है.
- एक नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना कर दिया जाएगा. हालांकि, DMRC की पार्किंग में पुरानी दरें ही लागू रहेंगी.
- सरकारी और निजी दफ्तरों में एक नवंबर से 28 फरवरी तक केवल 50 प्रतिशत कर्मचारी ही दफ्तर आकर काम करेंगे, जबकि 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम जरूरी रहेगा.
- सड़कों पर एक साथ ट्रैफिक का दबाव न बढ़े, इसके लिए एमसीडी (MCD) दफ्तर सुबह 8:30 से शाम 5:00 बजे तक और दिल्ली सरकार (GNCTD) के दफ्तर सुबह 10:00 से शाम 6:30 बजे तक खुलेंगे.
निर्माण और तोड़फोड़ पर रोक
- 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक धूल पैदा करने वाली डिमोलिशन और आउटडोर सिविल कंस्ट्रक्शन गतिविधियों पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी.
- 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 के बीच सभी प्रकार के निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर पूरी तरह रोक रहेगी.
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एआई कमांड सेंटर से होगी सख्त निगरानी
प्रदूषण नियंत्रण नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ग्राउंड टीमों का सहारा लिया जाएगा. इसके तहत 256 वार्ड टीमें और 78 डीपीसीसी टीमें जिओटैग और टाइमस्टैम्प्ड कैमरों के साथ मैदान में उतरेंगी.इस दौरान अगर किसी सरकारी संपत्ति, दफ्तर परिसर, बस स्टैंड या ट्रांसपोर्ट डिपो के आसपास प्रदूषण या धूल पाई जाती है, तो संबंधित विभाग के अधिकारियों को सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा. वहीं, CAQM के तहत वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों की संख्या 47 से बढ़ाकर 60 कर दी गई है.
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