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चंडीगढ़ में असम टेनेंसी एक्ट होगा लागू, रेंट एग्रीमेंट जरूरी, किरायेदारों और मकान मालिक को मिलेगी कानूनी सुरक्षा

Chandigarh 1949 Rent Law: चंडीगढ़ प्रशासन आजादी के बाद बने पुराने रेंट कंट्रोल कानून की जगह अब एक नया कानून लाने की तैयारी कर रहा है, जो असम टेनेंसी एक्ट, 2021 के मॉडल पर होगा. नया कानून लागू होने के बाद ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रेस्ट्रिक्शन एक्ट, 1949 हट जाएगा.

चंडीगढ़ में असम टेनेंसी एक्ट होगा लागू, रेंट एग्रीमेंट जरूरी, किरायेदारों और मकान मालिक को मिलेगी कानूनी सुरक्षा
Assam Tenancy Act 2021 Chandigarh Rent Agreement Rules
file photo

Chandigarh 1949 Rent Law: केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को प्रशासनिक और कानूनी रूप से और अधिक आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है. गृह मंत्रालय (MHA) ने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 87 का इस्तेमाल करते हुए पंजाब और हरियाणा जैसे पड़ोसी राज्यों के पांच अहम कानूनों को चंडीगढ़ में लागू करने का फैसला किया है. इस फैसले का मकसद चंडीगढ़ के प्रशासनिक ढांचे को समय के अनुरूप बनाना, कानूनों में स्पष्टता लाना और शासन व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी और पारदर्शी बनाना है.

असम टेनेंसी एक्ट, 2021 होगा लागू

चंडीगढ़ प्रशासन आजादी के बाद बने पुराने रेंट कंट्रोल कानून की जगह अब एक नया कानून लाने की तैयारी कर रहा है, जो असम टेनेंसी एक्ट, 2021 के मॉडल पर होगा. नया कानून लागू होने के बाद ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रेस्ट्रिक्शन एक्ट, 1949 हट जाएगा. यह पुराना कानून उस समय बनाया गया था, जब देश में घरों की भारी कमी थी. नए सिस्टम में लिखित रेंट एग्रीमेंट अनिवार्य होंगे, किराया मार्केट रेट से जुड़ा होगा. मकान मालिक और किरायेदार के बीच विवादों का तेजी से निपटारा होगा.

किरायेदारों और मकान मालिक को मिलेगी कानूनी सुरक्षा

पुराने कानून के तहत किराया बढ़ाना मुश्किल था और किरायेदार को निकालने पर सख्त पाबंदियां थीं. शुरू में इन नियमों से कमजोर परिवारों को सुरक्षा मिली, लेकिन समय के साथ इससे किराया बाजार बेहद नियंत्रित और काफी हद तक अनौपचारिक हो गया. अब प्रशासन का मानना है कि नया कानून लाने से किराए का सिस्टम ज्यादा पारदर्शी, आधुनिक और व्यावहारिक बनेगा.

दरअसल, चंडीगढ़ में करीब आधी आबादी किराए के मकानों में रहती है. अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा किराया कानून के कारण इसके नकारात्मक असर साफ दिख रहे हैं. कई मामलों में देखा गया है कि किराएदार दशकों तक मकान पर कब्जा बनाए रखते हैं और कानून की आड़ में बहुत कम, पुराने किराए पर रहते हैं, जो आज के बाजार भाव से काफी कम होता है. जब ऐसे विवाद सामान्य सिविल अदालतों में जाते हैं, तो मामलों का निपटारा सालों तक लटक जाता है. इससे अदालतों पर बोझ बढ़ता है और मकान मालिक व किराएदार दोनों के बीच भरोसा भी कमजोर होता है. इसके अलावा, कई जगहों पर लिखित किराया अनुबंध नहीं होते, जिससे किराया कितना होगा, मकान की मरम्मत कौन कराएगा और सिक्योरिटी डिपॉजिट का क्या होगा. इन बातों पर साफ‑साफ जानकारी नहीं रहती.

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नया कानून क्या बदलाव लाएगा?

नया किराया कानून इन समस्याओं को दूर करने की कोशिश करता है. इसके तहत हर किराएदारी का लिखित समझौता जरूरी होगा यानी रेंट एग्रीमेंट होगा. इस एग्रीमेंट को रेंट अथॉरिटी में रजिस्टर कराना होगा, जिससे किराया, समय सीमा और शर्तों का रिकॉर्ड रहेगा. सिक्योरिटी डिपॉजिट की भी सीमा तय की जाएगी. आमतौर पर रिहायशी मकानों के लिए यह दो महीने के किराए तक ही सीमित होगी. किराएदार के मकान खाली करने पर यह राशि उचित कटौती के बाद वापस करनी होगी. सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि किराया विवाद अब सामान्य अदालतों में नहीं जाएंगे. इसके लिए एक तीन‑स्तरीय अलग व्यवस्था होगी.

  • रेंट अथॉरिटी- रजिस्ट्रेशन और शुरुआती मामलों के लिए
  • रेंट कोर्ट- विवादों का फैसला करने के लिए
  • रेंट ट्रिब्यूनल- अपील के लिए

नए कानून में मकान मालिक और किराएदार के बीच रोजाना के व्यवहार के नियम भी तय किए गए हैं. मकान मालिक या उसके मैनेजर को किराए के घर में कम से कम 24 घंटे पहले सूचना देकर ही प्रवेश करना होगा, ताकि किराएदार की निजता बनी रहे. सबलेटिंग किराए पर दिया घर आगे किसी और को किराए पर देना तभी संभव होगी, जब मकान मालिक की अनुमति हो और इसकी जानकारी पहले रेंट अथॉरिटी को दी जाए. इसका मकसद अवैध पीजी और भीड़भाड़ को रोकना है.
 

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