दशहरा, दुर्गा पूजा और दीपावली के त्योहार पर राज्यों के बीच सफर करने वाले यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे ने मुंबई और बेंगलुरु के बीच एक नई साप्ताहिक विशेष ट्रेन चलाने का ऐलान किया है. यह स्पेशल ट्रेन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनस के बीच चलाई जाएगी. दोनों शहरों के बीच का सफर लगभग 23 घंटे 30 मिनट का होगा, जिसमें कुल 24 रेलवे स्टेशनों पर ठहराव दिया गया है.
- मुंबई से बेंगलुरु : 10 अक्टूबर से 21 नवंबर तक हर शनिवार को चलेगी.
- बेंगलुरु से मुंबई : 11 अक्टूबर से 22 नवंबर तक हर रविवार को वापस रवाना होगी.
- कुल फेरे: दोनों दिशाओं में यह ट्रेन 10 अक्टूबर से 22 नवंबर तक 77 फेरे लगाएगी.
अगर आप भी इस रूट पर सफर कर रहे हैं और यात्रा के दौरान नए शहरों की संस्कृति, खानपान और प्राकृतिक खूबसूरती का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो इस ट्रेन रूट के रास्ते में पड़ने वाले 6 प्रमुख पर्यटन स्थलों को अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल कर सकते हैं.
लोनावला पश्चिमी घाट की मखमली वादियां
इस ट्रेन के रूट में मुंबई से रवाना होने के बाद पहला बड़ा हिल स्टेशन लोनावला है. सह्याद्रि की पहाड़ियों में बसा यह हिल स्टेशन झरने, धुंध भरे पहाड़ों और ऐतिहासिक किलों के लिए मशहूर है. लोहागढ़ किला, राजमाची किला, टाइगर्स लीप, भुशी डैम और कार्ला भाजा की गुफाएं. यहां की मुख्य आकर्षण के केंद्र हैं. इसके साथ ही इस सफर के दौरान लोनावला की मशहूर चिक्की का स्वाद लेना बिल्कुल न भूलें.
पुणे का इतिहास, संस्कृति और खानपान
ट्रेन का अगला प्रमुख पड़ाव पुणे है, जो मराठा साम्राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों और आधुनिक कैफे कल्चर का यह शहर एक बेहतरीन संगम है. शनिवार वाड़ा, आगा खान पैलेस, लाल महल और सिंहगढ़ किला, यहां के मुख्य आकर्षण के केंद्र हैं. वहीं, पुणे के पारंपरिक महाराष्ट्रीयन स्नैक्स जैसे मिसल पाव, बाकरवड़ी और वैरायटी कैफे कल्चर बेहद पसंद आएगा.
सतारा का प्राकृतिक झरने और कास पठार
प्रकृति प्रेमियों और ट्रैकर्स के लिए सतारा स्टेशन पर उतरना एक बेहतरीन अनुभव हो सकता है. दरअसल, यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल कास पठार इसी जिले में स्थित है. यहां के कास पठार फूलों की वैरायटी, थोसेघर वॉटरफॉल, अजिंक्यतारा किला और सज्जनगढ़ के लिए मुख्य आकर्षण के केंद्र हैं. सफर के दौरान यहां का मशहूर कांडी पेड़ा और महाबलेश्वर की ताजी स्ट्रॉबेरी जरूर ट्राई करें.
कोल्हापुर का समृद्ध विरासत और तीखा स्वाद
हालांकि यह ट्रेन कोल्हापुर स्टेशन पर सीधे नहीं रुकती, लेकिन मिरज स्टेशन से डिटूर कर आसानी से कोल्हापुर पहुंचा जा सकता है. प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर, छत्रपति शाहू महाराज का नया महल और पारंपरिक कोल्हापुरी चप्पल यहां मुख्य आकर्षण हैं. यहां के सफर के दौरान प्रसिद्ध कोल्हापुरी तांबड़ा और पांढरा रस्सा यानी मसालेदार करी और मिर्ची भज्जी का आनंद जरूर लें.
बेलगावी दो संस्कृतियों का अनोखा संगम
महाराष्ट्र की सीमा पार कर जैसे ही ट्रेन कर्नाटक में प्रवेश करती है, बेलगावी पहला प्रमुख पड़ाव बनता है. गोवा और महाराष्ट्र के पास होने के की वजह से यहां कन्नड़ और मराठी संस्कृति का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है. बेलगावी किला, मिलिट्री महादेव मंदिर और गोकक फॉल्स यहां के मुख्य आकर्षण हैं.
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दावणगेरे के बेन्ने डोसा का बेमिसाल जायका
अगर प दक्षिण भारतीय व्यंजनों के शौकीन हैं, तो दावणगेरे को अपनी लिस्ट में जरूर रखें. यह शहर अपने कुरकुरे और मक्खन से भरपूर बेन्ने डोसा के लिए देशभर में मशहूर है. यह ट्रेन यहां से तुमकुरु होते हुए अपने अंतिम स्टेशन SMVT बेंगलुरु पहुंचती है.
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