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Budget 2025: इनकम टैक्स में कटौती की उम्मीद, जानें नए और पुरानी टैक्स सिस्टम के तहत मौजूदा स्लैब और रेट्स

Income tax cut in Union Budget 2025: इस बजट में सालाना 15 लाख रुपये तक की इनकम वाले लोगों के लिए इनकम टैक्स में थोड़ी राहत दी जा सकती है.

Budget 2025: इनकम टैक्स में कटौती की उम्मीद, जानें नए और पुरानी टैक्स सिस्टम के तहत मौजूदा स्लैब और रेट्स
Old Vs New Tax Regime: नई और पुरानी कर व्यवस्था में से किसका चुनाव करना आपके लिए फायदेमंद होगा यह आपके फाइनेंशियल प्रोफाइल पर निर्भर करता है.
नई दिल्ली:

New Tax Regime Vs Old Tax Regime: 1 फरवरी को पेश होने वाले वाले आम बजट में लोगों को सबसे ज्यादा इंतजार इनकम टैक्स से जुड़ी घोषणाओं पर होगा. खबरों की मानें तो इस बजट में सालाना 15 लाख रुपये तक की इनकम वाले लोगों के लिए इनकम टैक्स में थोड़ी राहत दी जा सकती है. चलिए जानते हैं कि न्यू टैक्स रिजीम और ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत मौजूदा इनकम टैक्स रेट्स और स्लैब क्या हैं.

फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के लिए नए टैक्स रिजीम के तहत मौजूदा टैक्स स्लैब
बजट 2020 में पेश की गई नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) लोअर टैक्स रेट के साथ कम छूट और कटौती की पेशकश करती है.

  • 3,00,000 रुपये तक की इनकम के लिए: शून्य (Nil)
  • 3,00,001 रुपये से 7,00,000 रुपये तक की इनकम के लिए : 5%
  • 7,00,001 रुपये से 10,00,000 रुपये तक की इनकम के लिए: 10%
  • 10,00,001 रुपये से 12,00,000 रुपये तक की इनकम के लिए: 15%
  • 12,00,001 रुपये से 15,00,000 रुपये तक की इनकम के लिए: 20%
  • 15,00,000 रुपये से ऊपर की इनकम पर: 30%


यह डिफॉल्ट टैक्स रिजीम है. इस रिजीम यानी व्यवस्था के तहत, टैक्सपेयर कम दरों का विकल्प चुन सकते हैं, लेकिन उन्हें HRA, LTA जैसी छूट और सेक्शन 80C, 80D और अन्य के तहत मिलने वाली कटौतियों को छोड़ना होगा.

स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट बढ़कर 75,000 रुपये

हालांकि, टैक्सपेयर्स स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा उठा सकते हैं. बजट 2024-25 में सैलरीड एम्प्लॉई के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दी गई. वहीं फैमिली  पेंशनर्स के लिए इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया.

पुरानी कर व्यवस्था के तहत मौजूदा टैक्स स्लैब (फाइनेंशियल 2024-25 के लिए)
पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime), ज्यादा दरों को बरकरार रखते हुए, टैक्सपेयर्स को विभिन्न छूटों और कटौतियों का दावा करने की इजाजत देती है.

  • 2,50,000 रुपये तक की इनकम के लिए: शून्य (Nil)
  • 2,50,001 रुपये से 7,00,000 रुपये तक की इनकम के लिए: 5%
  • 7,00,001 रुपये से 10,00,000 रुपये तक की इनकम के लिए: 10%
  • 10,00,001 रुपये से 12,00,000 रुपये तक की इनकम के लिए: 15%
  • 12,00,001 रुपये से 15,00,000 रुपये तक की इनकम के लिए: 20%
  • 15,00,000 रुपये से ऊपर की इनकम के लिए: 30%

60-80 साल की उम्र के सीनियर सिटीजन (Senior Citizen) के लिए, बेसिक एग्जेंप्शन लिमिट (basic exemption limit) 3,00,000 रुपये है. वहीं सुपर सीनियर सिटीजन यानी 80 साल से अधिक के लिए यह 5,00,000 रुपये है.

  • पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) विभिन्न धाराओं के तहत टैक्स में कटौती की इजाजत देती है, जैसे:
  • सेक्शन 80C के तहत PPF, ELSS और LIC प्रीमियम जैसे निवेश के जरिये आप 1.5 लाख रुपये तक की रकम पर टैक्स बचा सकते हैं.
  • सेक्शन 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर छूट
  • सेक्शन 24(b) के तहत होम लोन पर चुकाए गए ब्याज पर 2,00,000 रुपये  तक की कटौती का दावा किया जा सकता है.
  • HRA और LTA जैसी अन्य छूटें

सही टैक्स रिजीम कैसे चुनें

नई और पुरानी कर व्यवस्था में से किसका चुनाव करना आपके लिए फायदेमंद होगा यह आपके फाइनेंशियल प्रोफाइल पर निर्भर करता है. नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) उन लोगों के लिए ज्यादा सही है जो बहुत कम निवेश करते हैं. इसके उलट, पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) उन टैक्सपेयर्स के लिए सही है जो समझदारी से निवेश करके उस पर मिलने वाली छूट और कटौतियों का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाना जानते हैं.

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