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बिना इंटरनेट और बिना SIM के कैसे काम करता है Bitchat? जानें क्यों जैक डॉर्सी के ऐप को बैन करना चाहती है सरकार

Bitchat के लिए किसी अलग डिवाइस की ज़रूरत नहीं होती है, बस आपका फ़ोन ही काफ़ी है. इसके लिए न वाई-फ़ाई चाहिए, न मोबाइल डेटा और न ही सिम कार्ड. इसके लिए बस ब्लूटूथ चाहिए.

बिना इंटरनेट और बिना SIM के कैसे काम करता है Bitchat? जानें क्यों जैक डॉर्सी के ऐप को बैन करना चाहती है सरकार
कैसे Bitchat करता है काम

जंतर-मंतर पर विरोध के दौरान इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया था. लेकिन विरोध कर रहे छात्रों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया. उन्होंने कम्युनिकेशन के लिए Bitchat का इस्तेमाल किया था. वहीं अब इस Bitchat को बंद करवाना चाहती है, क्योंकि सरकार का कहना है कि इसका इस्तेमाल गैर कानूनी कामों के लिए किया जा सकता है. एक नोटिस के अनुसार, गृह मंत्रालय के साइबर क्राइम विभाग, 'इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर' ने Microsoft की सब्सिडियरी GitHub को Bitchat को हटाने का आदेश दिया.

बता दें, Twitter (अब X) के पूर्व को-फ़ाउंडर जैक डॉर्सी, जिन्होंने इस ऐप को बनाने में मदद की थी, उन्होंने एक पोस्ट में कहा, "भारत सरकार को Bitchat जैसी टेक्नोलॉजी पसंद नहीं है और वह इसे हटवाना चाहती है."

कैसे बिना इंटरनेट और बिना सिम के Bitchat करता है काम

इस ऐप को आप मैसेजिंग वाले वॉकी-टॉकी की तरह समझें. इसके लिए किसी अलग डिवाइस की ज़रूरत नहीं होती है, बस आपका फ़ोन ही काफ़ी है. इसके लिए न वाई-फ़ाई चाहिए, न मोबाइल डेटा और न ही सिम कार्ड. इसके लिए बस ब्लूटूथ चाहिए. आपको किसी के नंबर या कोड वगैरह की भी ज़रूरत नहीं है. बस दोनों डिवाइस एक-दूसरे के आस-पास यानी रेंज (10 मीटर) में होना काफ़ी है. जबकि नेटवर्किंग के जरिए इसे काफी दूर तक फैलाया जा सकता है. इससे आप टेक्स्ट मैसेज भेज सकते हैं - भले ही इंटरनेट या नेटवर्क बंद हो. 

इसमें आपके फ़ोन को उस व्यक्ति से सीधे कनेक्ट होने की ज़रूरत नहीं होती जिसे आप मैसेज भेज रहे हैं, बल्कि यह ऐप उस इलाके के हर फ़ोन को एक छोटे रिले स्टेशन में बदल देता है.

सरकार क्यों है इस ऐप से परेशान?

क्योंकि यह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड है, इसलिए चैट्स को आसानी से इंटरसेप्ट नहीं किया जा सकता. और चूंकि इसमें कोई सेंट्रल सर्वर, कोई रजिस्ट्रेशन और कोई सेंट्रल डेटाबेस नहीं है जिस पर कानून लागू करने वाली एजेंसियां ​​निर्भर हो सकें, इसलिए सरकार परेशान है. आम तौर पर मोबाइल ब्लूटूथ की रेंज लगभग 10 मीटर होती है, लेकिन यह खास टेक्नोलॉजी 'ब्लूटूथ मेश नेटवर्किंग' का इस्तेमाल करती है, जो नेटवर्क को लगभग 300 मीटर या उससे भी ज़्यादा दूर तक बढ़ा सकती है.

इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन की आलोचना

सरकार द्वारा ऐप को बंद करने के कदम की इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (आईएफएफ) ने कड़ी आलोचना की है. डिजिटल अधिकारों के संगठन ने तर्क दिया है कि ऐप बंद करने का आदेश कई मायनों में कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण है और सरकार से नोटिस वापस लेने का आह्वान किया है. साथ ही, उसने जंतर-मंतर के आसपास निर्बाध इंटरनेट कनेक्टिविटी बहाल करने की भी मांग की है.

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