Debit Card का इस्तेमाल रोजमर्रा की जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा बन चुका है. किराने के सामान की खरीदारी से लेकर कैश निकालना हो या ऑनलाइन शॉपिंग. यहां तक की एयरपोर्ट के लाउंज में भी इसका इस्तेमाल आसानी से किया जा सकता है. लेकिन अगर आप किसी जरूरी का से घर से निकलें हैं या यात्रा कर रहे हैं, और इस दौरान आप कोई पेमेंट कर रहे हैं या कैश के लिए ATM पहुंच रहे हैं, तब आपको पता चलता है कि आपका डेबिट कार्ड बैंक द्वारा ब्लॉक कर दिया गया है. बैंक ने पहले इसकी किसी तरह की सूचना भी नहीं दी और कार्ड ब्लॉक कर दिया है. जबकि आपका बैंक अकाउंट चल रहा है.
ऐसे वक्त में आपको तनाव से गुजरना पड़ता है. यात्रा के दौरान ऐसा होना और भी ज्यादा परेशान करने वाला होता है. फेडरल बैंक के एक ग्राहक के साथ ठीक ऐसा ही हुआ. बैंक ने बिना किसी सूचना के उनका कार्ड ब्लॉक कर दिया, जिससे वे और उनका परिवार कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर फँस गए, जबकि उनके अकाउंट में पर्याप्त पैसे थे.
इस मामले में क्या हुआ?
ग्राहक का फेडरल बैंक में 2015 से अकाउंट था. 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक, 2 सितंबर 2021 को कुवैत से कोच्चि की यात्रा के दौरान वह इंटरनेशनल डेबिट कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे. जब उन्होंने कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एयरपोर्ट लाउंज में जाने की कोशिश की, तो कार्ड काम नहीं किया. एयरपोर्ट की दुकानों पर भी कार्ड इस्तेमाल करने की कोशिशें नाकाम रहीं. कोच्चि पहुँचने पर भी समस्या बनी रही और एक ड्यूटी-फ्री शॉप और फिर एक ATM पर कार्ड 'इनवैलिड' दिखाया.
बाद में ग्राहक को पता चला कि बैंक ने उन्हें बिना बताए उनका डेबिट कार्ड ब्लॉक कर दिया था और एक नया कार्ड जारी कर दिया था. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नया कार्ड महीनों तक बैंक ब्रांच में ही पड़ा रहा, जबकि उन्हें और उनके परिवार को अपनी इंटरनेशनल यात्रा के दौरान परेशानी उठानी पड़ी.
इसके बाद उन्होंने केरल में एर्नाकुलम ज़िला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Ernakulam District Consumer Disputes Redressal Commission) का दरवाज़ा खटखटाया और आरोप लगाया कि बैंक ने बिना किसी पूर्व सूचना के उनका डेबिट कार्ड ब्लॉक कर दिया था.
14 जुलाई के अपने आदेश में, आयोग ने ग्राहक को सूचित किए बिना उनका इंटरनेशनल डेबिट कार्ड ब्लॉक करने के लिए बैंक को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार (unfair trade practice) का दोषी ठहराया.
'ToI' की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने फेडरल बैंक को मुआवज़े और कानूनी खर्च के तौर पर 1.25 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया. आयोग ने कहा कि हालाँकि बैंक धोखाधड़ी रोकने के लिए कार्ड ब्लॉक कर सकते हैं, लेकिन ग्राहकों को पहले से सूचित न करना सेवा में कमी माना जाता है.
बैंक ने क्या तर्क दिया?
फेडरल बैंक ने तर्क दिया कि मास्टरकार्ड से ग्राहक के कार्ड से जुड़े डेटा के संभावित रूप से लीक होने का अलर्ट मिलने के बाद कार्ड को ब्लॉक कर दिया गया था. एहतियात के तौर पर, बैंक ने कार्ड ब्लॉक कर दिया और उसकी जगह नया कार्ड जारी किया. बैंक ने यह भी कहा कि उसने SMS के ज़रिए ग्राहक को सूचित करने की कोशिश की थी, लेकिन तकनीकी वजह से मैसेज डिलीवर नहीं हो सका.
कमीशन ने क्या आदेश दिया?
एर्नाकुलम ज़िला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग को दी गई सफाई विश्वसनीय नहीं लगी. आयोग ने पाया कि मास्टरकार्ड अलर्ट मिलने और रिप्लेसमेंट कार्ड जारी होने के समय बैंक के रिकॉर्ड में विसंगतियां थीं. आयोग ने माना कि हालांकि धोखाधड़ी रोकने के लिए ब्लॉक लगाना कानूनी है, लेकिन ग्राहक को पहले से सूचित न करना अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी है. इसलिए, आयोग ने बैंक को आदेश दिया कि वह ग्राहक और उनके परिवार को हुई मानसिक पीड़ा, परेशानी और सदमे के लिए 1 लाख रुपये और कानूनी कार्यवाही के खर्च के लिए 25,000 रुपये का भुगतान करे.
आयोग ने आगे कहा कि बैंक को 45 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा; ऐसा न करने पर, भुगतान होने तक इस राशि पर 9% सालाना ब्याज लगेगा.
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