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पुराने चेक अब नहीं करेंगे काम, जल्द बदलवा लें अपनी चेकबुक; जानें क्यों बदला नियम

बैंक ऑफ इंडिया समेत कई बैंकों ने चेक भुगतान के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. 31 दिसंबर 2026 के बाद बिना अल्फा-न्यूमेरिक कोड वाले चेक स्वीकार नहीं किए जाएंगे. जानिए क्यों बदला गया यह नियम, चेक के प्रकार और इसके फायदे के बारे में पूरी जानकारी. 

पुराने चेक अब नहीं करेंगे काम, जल्द बदलवा लें अपनी चेकबुक; जानें क्यों बदला नियम
बदल गई चेकबुक! अब 31 दिसंबर 2026 के बाद अल्फा-न्यूमेरिक कोड वाली चेकबुक ही चलेगी
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Cheque Book New Rules: अगर आप भी बैंकिंग लेन-देन के लिए चेक बुक का इस्तेमाल करते हैं, तो यह आपके लिए बहुत ही काम की खबर है. दरअसल, बैंक ऑफ इंडिया (BOI) सहित कई सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों ने अपने ग्राहकों को नई अल्फा-न्यूमेरिक कोड (Alphanumeric Code) वाली चेक बुक जारी करना शुरू कर दिया है.

बैंकों की ओर से ग्राहकों को इस संबंध में बाकायदा ईमेल और एसएमएस भेजकर नई चेकबुक के लिए आवेदन करने की सलाह दी जा रही है, ताकि भविष्य में किसी भी बड़े भुगतान के दौरान रुकावट न आए.

 क्यों बदला गया नियम? 

  • नए दिशानिर्देशों के तहत 31 दिसंबर 2026 के बाद 50,000 या उससे ज्यादा की राशि के ऐसे चेक स्वीकार नहीं किए जाएंगे, जिन पर अल्फा-न्यूमेरिक कोड अंकित नहीं होगा.
  • इस कोड में अक्षरों और अंकों का एक विशेष संयोजन होता है. इससे चेक की पहचान और वेरिफिकेशन करना पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित हो जाएगी. 
  • चेक में किसी भी तरह की हेराफेरी या फर्जी चेक के जरिए होने वाले धोखाधड़ी के जोखिम को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है.
  • भारतीय रिजर्व बैंक चेक क्लीयरिंग व्यवस्था को तेज बनाने पर जोर दे रहा है. ऐसे में चेक ट्रंकेशन सिस्टम के जरिए फिजिकल पेपर चेक को डिजिटल रूप देकर क्लीयरेंस का समय काफी घटा दिया है. 

नई चेक बुक का शुल्क और बैंक नियम

अलग-अलग बैंकों में खाते के प्रकार के हिसाब से नई चेक बुक जारी करने का शुल्क अलग-अलग हो सकता है. 

  • बैंक ऑफ इंडिया (BOI): बचत खाते के लिए 1 साल में 25 पन्नों की एक चेक बुक बिल्कुल मुफ्त दी जाती है. इसके बाद अतिरिक्त चेक पन्नों के लिए 5 रुपये प्रति पेज का शुल्क लिया जाता है.
  • अन्य बैंक: अन्य सरकारी व प्राइवेट बैंकों में यह शुल्क उनके अपने नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है.

चेक (Cheque) क्या है और इसके प्रमुख प्रकार

चेक बुक बैंक की ओर से खाताधारकों को दी जाने वाली एक लिखित कागजी पुस्तिका (Booklet) होती है. इसका उपयोग कैश साथ ले जाए बिना सुरक्षित तरीके से लेन-देन या खुद पैसे निकालने के लिए किया जाता है. इस पर पेमेंट करने वाले के बैंक अकाउंट के साथ ही पूरी जानकारी होती है. इसके अलावा, जिसके फेवर में चेक जारी किया जाता है, उसका नाम चेक पर लिखना पड़ता है. इस पर एक डेट भी डालनी पड़ती है, जो तीन महीने तक वैलिड रहती है. साथ ही चेक पर पेमेंट करने वाले का हस्ताक्षर भी होता है, जो खाते में दर्ज हस्ताक्षर के जैसा होना जरूरी होता है. 

  1. बेयरर चेक (Bearer): जो चेक लेकर बैंक पहुंचेगा, उसे तुरंत नकद मिलेगा.
  2. ऑर्डर चेक (Order): चेक पर लिखे नाम वाले व्यक्ति को पहचान पुष्टि के बाद भुगतान.
  3. क्रॉस चेक (Crossed): ऐसे चेक पर ऊपर दो तिरछी लाइनें होती है. इस चेक का पैसा सिर्फ बैंक खाते में जाता है. 

चेक से पेमेंट करने के 5 बड़े फायदे

  • भारी मात्रा में नकद साथ ले जाने पर चोरी का डर रहता है, जबकि चेक चोरी होने पर भी कोई आसानी से पैसे नहीं निकाल सकता. 
  • चेक से किया गया हर लेन-देन बैंक स्टेटमेंट में दर्ज होता है, जो भुगतान का ठोस प्रमाण है. 
  • यदि कोई दिया गया चेक बाउंस हो जाता है, तो Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 के तहत उस पर दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. 
  • चेक पेमेंट पूरी तरह पारदर्शी होते हैं, जिससे बिजनेस ऑडिट और इनकम टैक्स में कोई समस्या नहीं आती. 
  • भारत में 2 लाख  रुपये या उससे ज्यादा का नकद लेन-देन प्रतिबंधित है, इसलिए बड़े पेमेंट्स के लिए चेक एक जरूरी माध्यम है. 

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