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AI Summit 2026: बिहार ने पेश किया मोबाइल रिमोट ई-वोटिंग सिस्टम, अब फोन से वोट कर सकेंगे लोग, जानिए क्या होगा प्रोसेस

Bihar in AI Summit 2026: बिहार राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, पहली बार बिहार ने एक सिक्योर मोबाइल बेस्ड ई-वोटिंग सिस्टम पेश किया है. इसका मकसद उन लोगों की समस्या को कम करना था जो किसी कारण से वोट नहीं डाल पाते.

AI Summit 2026: बिहार ने पेश किया मोबाइल रिमोट ई-वोटिंग सिस्टम, अब फोन से वोट कर सकेंगे लोग, जानिए क्या होगा प्रोसेस
AI Summit 2026
File Photo

AI Summit 2026: दुनिया जैसे‑जैसे AI को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अपना रही है, वैसे ही बिहार भी AI के साथ कदम‑से‑कदम मिलाकर चलने की तैयारी कर रहा है. बिहार राज्य कई क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर रहा है. दिल्ली में लगे 'AI के महाकुंभ' यानी AI Impact Summit 2026 में NDTV बिहार के पवेलियन में पहुंचा और देखा कि बिहार किस तरह AI का उपयोग कर रहा है. डिजिटल डेमोक्रेसी की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में, बिहार राज्य चुनाव आयोग ने अर्बन लोकर बॉडीपोल्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ई‑वोटिंग का इस्तेमाल किया है. अब आयोग अगली विधानसभा चुनाव के लिए भी इस मॉडल को और बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रहा है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं...

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बिहार ने पेश किया ई-वोटिंग सिस्टम

बिहार राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, पहली बार बिहार ने एक सिक्योर मोबाइल बेस्ड ई-वोटिंग सिस्टम पेश किया है. इसका मकसद उन लोगों की समस्या को कम करना था जो किसी कारण से वोट नहीं डाल पाते. इस सिस्टम की मदद से जो राज्य से बाहर रहते हैं, वे स्मार्टफोन से वोट डाल सकेंगे. ऐसे में लेबर जो बाहर काम करते हैं, अपने क्षेत्र से बाहर पढ़ने वाले छात्र, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, दिव्यांगजन इसका फायदा उठा सकेंगे.

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कैसे काम करता है ई-वोटिंग का प्रोसेस?

राज्य चुनाव आयोग ने ई-वोटिंग के लिए एक खास मोबाइल ऐप पेश किया है, जिसके जरिए वोटर रजिस्ट्रेशन से लेकर वोट डालने तक की पूरा प्रोसेस डिजिटल तरीके से पूरा कर सकते हैं. इसके लिए वोटर को ऑफिशियल ऐप डाउनलोड करनी होगी और फिर मोबाइल नंबर की OTP से वेरिफिकेशन करना होगा. इसके बाद EPIC (वोटर आईडी) से जुड़ी जानकारी भरकर लाइव फेशियल रिकॉग्निशन के जरिए अपनी पहचान वेरिफाई करनी होगी. बिहार के इस मॉडल में पहचान की पुष्टि के लिए वोटर आईडी डेटाबेस में मौजूद फोटो का उपयोग किया गया है. इस सिस्टम में फेशियल रिकॉग्निशन, लाइवनेस डिटेक्शन, डिवाइस लेवल वेरिफिकेशन और ब्लॉकचेन‑आधारित एन्क्रिप्शन को जोड़ा गया है.

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