After PM-Kisan: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली NDA सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में से किसानों के लिए PM-Kisan यानी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना सबसे ज्यादा चर्चा में रहती है. पिछले महीने पीएम मोदी ने तमिलनाडु के कोयंबटूर से देश के लाखों किसानों के खाते में PM-Kisan योजना की 21वीं किस्त जारी की थी. अब उसी राज्य तमिलनाडु के किसानों ने 3 मांगें की हैं. ये तीनों मांगें जीआई टैगिंग से जुड़ी हैं. दरअसल, तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले के तीन मशहूर कृषि उत्पादों, थूथुकुडी नमक, ऑथूर पूवन केला और विल्लिसेरी नींबू की खेती करने वाले किसानों ने कानूनी सुरक्षा पाने के लिए GI टैग यानी भौगोलिक संकेत के लिए आवेदन किया है.
नाबार्ड(NABARD) यानी राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक , चेन्नई और NABARD मदुरै कृषि व्यवसाय इनक्यूबेशन फोरम (एमएबीआईएफ) की मदद से ये आवेदन किए गए, जिन्होंने उत्पादक किसानों को डॉक्युमेंटेशन और फाइलिंग में सहायता दी.
ऑथूर पूवन केले की खासियत क्या है?
ऑथूर पूवन केले के लिए GI आवेदन ऑथूर पूवन वलाई उरपथियायलारगल संगम ने दायर किया था. तमिरापरानी नहर सिंचाई बेल्ट के किनारे ऑथूर गांव और आस-पास के गांवों में उगाया जाने वाला यह केला अपने खास स्वाद के लिए जाना जाता है, जिसका श्रेय खनिज युक्त सिंचाई के पानी को जाता है.
विल्लीसरी नींबू की खासियत क्या है?
एक और GI एप्लीकेशन, विल्लीसरी लेमन उरपथियायलारगल संगम की ओर से जमा किया गया, जिसमें कोविलपट्टी के विल्लीसरी नींबू के लिए जीआई स्टेटस मांगा गया है. नींबू की यह पारंपरिक किस्म अपनी तेज खुशबू, ज्यादा रस, तेज खटास, कम बीज और अन्य नींबू किस्मों की तुलना में स्वाभाविक रूप से लंबी शेल्फ लाइफ के लिए जानी जाती है.
सफेद क्रिस्टल वाले खास नमक के बारे में भी जान लीजिए
थूथुकुडी नमक के लिए आवेदन थूथुकुडी उप्पु उरपत्तियालारगल संगम ने जमा किया है. इस क्षेत्र में नमक पारंपरिक सौर वाष्पीकरण विधि से बनाया जाता है, जिसमें समुद्र के पानी या जमीन के नीचे के खारे पानी को बड़े नमक के क्यारियों में डालकर तेज धूप में सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है. इस प्राकृतिक प्रक्रिया से बड़े, सफेद क्रिस्टल वाला नमक बनता है जो अपनी उच्च शुद्धता और गुणवत्ता के लिए जाना जाता है.
थूथुकुडी भारत के कुल नमक उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान देता है, जिसमें वेपलोदाई, थारूवैकुलम, मुट्टायापुरम और ओट्टापिडारम जैसे गांवों में लगभग 25,000 से 30,000 एकड़ में नमक की क्यारियां फैली हुई हैं. यहां उत्पादित खाने योग्य और औद्योगिक ग्रेड का नमक घरों के साथ-साथ रसायन, चमड़ा, कपड़ा रंगाई और फार्मास्युटिकल उद्योगों को भी सप्लाई किया जाता है.
11वीं सदी के चोल समुद्री रिकॉर्ड तूतीकोरिन को एक प्रमुख निर्यात बंदरगाह के रूप में पहचानते हैं, जहां मोती और मसालों के साथ नमक भी भेजा जाता था. 19वीं सदी की ब्रिटिश नमक राजस्व रिपोर्ट शहर को मद्रास प्रेसीडेंसी के एक प्रमुख नमक उत्पादक केंद्र के रूप में वर्णित करती हैं.
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