कल (16 जुलाई) से जगन्नाथ रथ यात्रा शुरू होने जा रही है. देशभर से लाखों श्रद्धालु पुरी में भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के दिव्य रथों के दर्शन लिए पहुंच रहे हैं. भगवान जगन्नाथ के मंदिर की आस्था बेहद गहरी है. हर साल की तरह इस साल भी 16 जुलाई को रथ यात्रा का आयोजन किया जा रहा है. अगर आप भी रथ यात्रा के दर्शन के लिए आ रहे हैं तो इन जगहों को घूमना बिलकुल मिस ना करें. आइए जानते हैं कि जगनाथ मंदिर से कितनी दूरी पर है जगह सभी जगह.
यात्रा के बाद इन जगहों पर जरूर घूमे यात्री
जानकारी के अनुसार, अगर आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ पुरी जानी की योजना बना रहे हैं तो केवल जगन्नाथ भगवान के दर्शन तक ही अपनी यात्रा को सीमित न रहने दें. भगवान जगन्नाथ मंदिर के पास कई ऐसे पर्टटन स्थल हैं जहां आप घूम सकते हैं. भगवान जगन्नाथ के दर्शन के बाद आप सबसे पहले शांत समुद्र तट, हस्तशिल्प गांव, विश्व प्रसिद्ध मंदिर और एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झील पर भी सैर कर सकते हैं. इन जगहों पर घूमने में आपको काफी अच्छा लगेगा.
जगन्नाथ मंदीर से महज 1.5 किमी है गोल्डन बीच
भगवान जगन्नाथ यात्रा के दौरान हम आपको ऐसी 8 जगहों के बारे में बता रहे हैं. जिन्हें आप रथ यात्रा के बाद अपनी ट्रैवल सूची में शामिल कर सकते हैं. बता दें कि जगन्नाथ मंदिर से गोल्डन बीच की दूरी लगभग 1.5 से दो किमी है. आप यहां पर ऑटो या रिक्शा के जरिए बड़ी ही आसानी से पहुंच सकते हैं. यहां पर साथ सुथरा समुद्र तट आपको काफी पसंद आएगा. अगर आप यहा सुबह या शाम को आते हैं तो आपोक सूर्योदय और सूर्यास्त का शानदार नजारा देख सकते हैं.
यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित है ये मंदिर
इसके अलावा, आप कोणार्क सूर्य मंदिर घूम सकते हैं. यह मंदीर जगन्नाथ मंदिर से लगभग 35-36 किमी दूर है. यहा पर पहुंचने के लिए आप मरीन ड्राइव रोड से होते हुए यहां बड़ी ही आसानी से पहुंच सकते हैं. यहां पर आपको प्राचीन वास्तुकला, इंजीनियरिंग और खगोल विज्ञान का बेजोड़ संगम देखने को मिलेगा. साथ ही मंदिर परिसर को ऐसे बनाया गया है कि गर्भगृह तक सूर्य की किरणें सीधे पहुंचती हैं. अगर मंदिर की बनावट की बात करें तो यह सूर्य भगवान के रथ के आकार का बना है, जिसे 7 शक्तिशाली घोड़े खींचते प्रतीत हो रहे हैं. इस मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है.
चिलिका झील देखने दूरदराज से आते हैं लोग
पुरी में चिलिका झील एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झील और लैगून है. यह भारत में एकमात्र ऐसी जगह है जहां इरावदी डॉल्फिन अपने प्राकृतिक आवास में देखने को मिलती है. साथ ही झील के बीच में एक द्वीप भी है जिस पर कालीजय माता मंदिर मौजूद है. ज्यादातर लोग यहां डॉल्फिन और बोटिंग देखने के लिए पहुंचते है.
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पुरी में कहां स्थित है गुंडिचा मंदिर
इसके अलावा, पुरी स्थित गुंडिया मंदिर को भगवान भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर कहते है. भगवान जगन्नाथ मंदिर से यह मंदिर महज 3 किमी की दूरी पर है.
क्यों खास है रघुराजपुर हेरिटेज विलेज
पुरी के रघुराजपुर हेरिटेज विलेज में पत्ताचित्र कला और पारंपरिक ओडिशी संस्कृति का शानदार केंद्र बना हुआ है. यह स्थान अपनी पारंपरिक पट्टाचित्र पेंटिंग, ताड़ के पत्तों पर नक्काशी और ओडिसी नृत्य के लिए जाना जाता है. यहां की सबसे खास बात यह है कि यह हर घर में एक कलाकार रहता है.
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