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भगवाकरण VS भारतीय संस्कृति का प्रतीक... MP पुलिस की ट्रेनिंग में जोड़ा गीता पाठ, शुरू हुआ सियासी संग्राम
- Saturday November 8, 2025
- Reported by: अनुराग द्वारी, Edited by: अभिषेक पारीक
मध्यप्रदेश पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में अब हर रात जवान ध्यान करने से पहले गीता के श्लोक सुनते हैं. एडीजी ट्रेनिंग राजाबाबू सिंह के आदेश के बाद भर्ती आरक्षकों को श्रीमद्भगवद्गीता का एक अध्याय पढ़ाया जा रहा है. हालांकि इस मुद्दे पर प्रदेश में सियासी संग्राम तेज हो गया है.
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देश की आन-बान-शान है तिरंगा, पढ़िए इसकी रोचक कहानी...
- Saturday August 2, 2025
- Written by: मेघा शर्मा
स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया ने बेजवाड़ा (अब विजयवाड़ा) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में महात्मा गांधी को तिरंगे झंडे का डिजाइन भेंट किया था. शुरुआत में, इसमें हिंदू और मुस्लिम समुदायों के लिए लाल और हरे रंग की पट्टियां थीं.
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New Rules: पगड़ी-बिंदी और कलावा पहन कर दे सकेंगे रेलवे परीक्षा, नए नियम लागू
- Monday July 14, 2025
- Reported by: पल्लव मिश्रा
रेलवे बोर्ड के प्रवक्ता दिलीप कुमार ने बताया कि धार्मिक प्रतीकों की सही तरीके से जांच होने के बाद ही छात्र इन्हें पहनकर परीक्षा दे सकेंगे. इस पहल को 'सेक्युलर गाइडलाइन' नाम दिया गया है, जिसमें आस्था और सुरक्षा दोनों का संतुलन रखा गया है.
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चुनाव आयोग ने 345 दलों को दिखाया बाहर का रास्ता, जानें क्यों उठाना पड़ा इतना सख्त कदम
- Thursday June 26, 2025
- Reported by: अखिलेश शर्मा
चुनाव आयोग ने 345 ऐसे दलों को डीलिस्ट कर दिया है, जिन्होंने 2019 के बाद से एक भी लोकसभा या विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा है. इन राजनीतिक दलों का खोजने पर भी कोई कार्यालय नहीं मिला है.
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Explainer: शांति का प्रतीक और संदेश वाहक, लेकिन बीमारियां भी फैलाता है कबूतर
- Saturday January 4, 2025
- Written by: सुशील बहुगुणा, Edited by: सूर्यकांत पाठक
कुदरत यानी प्रकृति का अपना एक डिज़ाइन है, काम करने का नैसर्गिक तरीका जो लाखों करोड़ों साल में विकसित होता रहा. कुदरत के इस डिज़ाइन के साथ जाने-अनजाने हम जो छेड़छाड़ करते हैं वो देर सबेर पलटकर हमें ही परेशान करती है. इसके हज़ारों उदाहरण भरे पड़े हैं. हम ज़िक्र कर रहे हैं ऐसे ही एक उदाहरण का जिससे शायद ही कोई अनजान हो, ये हैं कबूतर. नीली आभा लिए स्लेटी रंग के कबूतर जिन्हें रॉक पीजन (Rock Pigeon) या वैज्ञानिक भाषा में Columba livia कहा जाता है.
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न्याय की देवी के नए प्रतीक: कहां हुआ था लेडी ऑफ जस्टिस का जन्म, कहां से आई भारत? जानिए सब कुछ
- Wednesday October 16, 2024
- Written by: सूर्यकांत पाठक
न्याय सबके लिए है और न्याय की देवी के सामने सभी बराबर हैं. इस दार्शनिक सिद्धांत की प्रतीक न्याय की देवी (Lady of Justice) भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों की अदालतों, कानून से जुड़े संस्थानों में सदियों से मौजूद है. आंखों पर पट्टी बांधे, एक हाथ में तराजू और दूसरे हाथ में तलवार लिए न्याय की देवी के प्रतीकों में भारत में बदलाव की पहल की गई है. न्याय की देवी की आंखों की पट्टी खोल दी गई है और उनके एक हाथ में तलवार की जगह संविधान आ गया है. हम आपको बताते हैं कि न्याय की देवी का क्या अर्थ है, इसमें क्या संदेश और प्रतीक हैं? न्याय की देवी का जन्म कहां हुआ और इसे दुनिया भर में क्यों अपना लिया गया?
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अब कानून अंधा नहीं रहेगा, जानिए हाल के सालों में देश में अंग्रेजों के जमाने का क्या-क्या बदला?
- Wednesday October 16, 2024
- Written by: विजय शंकर पांडेय
British Era Symbols Changed: हाल के सालों में भारत गुलामी की मानसिकता से निकलते हुए नई सोच पर चल पड़ा है. कानून की आंखों पर बंधी पट्टी हट चुकी है. जानिए और क्या-क्या हटा...
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दशहरे पर बहू ने फूंका पति, सास-ससुर और ननद का पुतला, ससुराल वालों को बताया असली रावण
- Tuesday October 15, 2024
- Written by: शालिनी सेंगर
हाल ही में एक बहू ने दशहरा मनाने का एक अनोखा तरीका अपनाया है, जो अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है. महिला ने दशहरे के मौके पर ससुराल के सामने ही अपने पति, सास-ससुर और ननद का पुतला फूंक दिया.
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भारत की अदालतों को मिली औपनिवेशिक मानसिकता से आज़ादी
- Thursday September 5, 2024
- हरीश चंद्र बर्णवाल
पिछले एक दशक से देश ने एक नई अंगड़ाई ली है, और अपने आपको गुलामी के कालखंड के प्रतीकों और विचारों से मुक्त कर रहा है. इस दौर में 1500 ऐसे कानून खत्म हो चुके हैं, जो देश को सिर्फ़ गुलाम बनाए रखने की मानसिकता से बनाए गए थे.
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भगवाकरण VS भारतीय संस्कृति का प्रतीक... MP पुलिस की ट्रेनिंग में जोड़ा गीता पाठ, शुरू हुआ सियासी संग्राम
- Saturday November 8, 2025
- Reported by: अनुराग द्वारी, Edited by: अभिषेक पारीक
मध्यप्रदेश पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में अब हर रात जवान ध्यान करने से पहले गीता के श्लोक सुनते हैं. एडीजी ट्रेनिंग राजाबाबू सिंह के आदेश के बाद भर्ती आरक्षकों को श्रीमद्भगवद्गीता का एक अध्याय पढ़ाया जा रहा है. हालांकि इस मुद्दे पर प्रदेश में सियासी संग्राम तेज हो गया है.
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देश की आन-बान-शान है तिरंगा, पढ़िए इसकी रोचक कहानी...
- Saturday August 2, 2025
- Written by: मेघा शर्मा
स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया ने बेजवाड़ा (अब विजयवाड़ा) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में महात्मा गांधी को तिरंगे झंडे का डिजाइन भेंट किया था. शुरुआत में, इसमें हिंदू और मुस्लिम समुदायों के लिए लाल और हरे रंग की पट्टियां थीं.
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New Rules: पगड़ी-बिंदी और कलावा पहन कर दे सकेंगे रेलवे परीक्षा, नए नियम लागू
- Monday July 14, 2025
- Reported by: पल्लव मिश्रा
रेलवे बोर्ड के प्रवक्ता दिलीप कुमार ने बताया कि धार्मिक प्रतीकों की सही तरीके से जांच होने के बाद ही छात्र इन्हें पहनकर परीक्षा दे सकेंगे. इस पहल को 'सेक्युलर गाइडलाइन' नाम दिया गया है, जिसमें आस्था और सुरक्षा दोनों का संतुलन रखा गया है.
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चुनाव आयोग ने 345 दलों को दिखाया बाहर का रास्ता, जानें क्यों उठाना पड़ा इतना सख्त कदम
- Thursday June 26, 2025
- Reported by: अखिलेश शर्मा
चुनाव आयोग ने 345 ऐसे दलों को डीलिस्ट कर दिया है, जिन्होंने 2019 के बाद से एक भी लोकसभा या विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा है. इन राजनीतिक दलों का खोजने पर भी कोई कार्यालय नहीं मिला है.
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Explainer: शांति का प्रतीक और संदेश वाहक, लेकिन बीमारियां भी फैलाता है कबूतर
- Saturday January 4, 2025
- Written by: सुशील बहुगुणा, Edited by: सूर्यकांत पाठक
कुदरत यानी प्रकृति का अपना एक डिज़ाइन है, काम करने का नैसर्गिक तरीका जो लाखों करोड़ों साल में विकसित होता रहा. कुदरत के इस डिज़ाइन के साथ जाने-अनजाने हम जो छेड़छाड़ करते हैं वो देर सबेर पलटकर हमें ही परेशान करती है. इसके हज़ारों उदाहरण भरे पड़े हैं. हम ज़िक्र कर रहे हैं ऐसे ही एक उदाहरण का जिससे शायद ही कोई अनजान हो, ये हैं कबूतर. नीली आभा लिए स्लेटी रंग के कबूतर जिन्हें रॉक पीजन (Rock Pigeon) या वैज्ञानिक भाषा में Columba livia कहा जाता है.
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न्याय की देवी के नए प्रतीक: कहां हुआ था लेडी ऑफ जस्टिस का जन्म, कहां से आई भारत? जानिए सब कुछ
- Wednesday October 16, 2024
- Written by: सूर्यकांत पाठक
न्याय सबके लिए है और न्याय की देवी के सामने सभी बराबर हैं. इस दार्शनिक सिद्धांत की प्रतीक न्याय की देवी (Lady of Justice) भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों की अदालतों, कानून से जुड़े संस्थानों में सदियों से मौजूद है. आंखों पर पट्टी बांधे, एक हाथ में तराजू और दूसरे हाथ में तलवार लिए न्याय की देवी के प्रतीकों में भारत में बदलाव की पहल की गई है. न्याय की देवी की आंखों की पट्टी खोल दी गई है और उनके एक हाथ में तलवार की जगह संविधान आ गया है. हम आपको बताते हैं कि न्याय की देवी का क्या अर्थ है, इसमें क्या संदेश और प्रतीक हैं? न्याय की देवी का जन्म कहां हुआ और इसे दुनिया भर में क्यों अपना लिया गया?
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अब कानून अंधा नहीं रहेगा, जानिए हाल के सालों में देश में अंग्रेजों के जमाने का क्या-क्या बदला?
- Wednesday October 16, 2024
- Written by: विजय शंकर पांडेय
British Era Symbols Changed: हाल के सालों में भारत गुलामी की मानसिकता से निकलते हुए नई सोच पर चल पड़ा है. कानून की आंखों पर बंधी पट्टी हट चुकी है. जानिए और क्या-क्या हटा...
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दशहरे पर बहू ने फूंका पति, सास-ससुर और ननद का पुतला, ससुराल वालों को बताया असली रावण
- Tuesday October 15, 2024
- Written by: शालिनी सेंगर
हाल ही में एक बहू ने दशहरा मनाने का एक अनोखा तरीका अपनाया है, जो अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है. महिला ने दशहरे के मौके पर ससुराल के सामने ही अपने पति, सास-ससुर और ननद का पुतला फूंक दिया.
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भारत की अदालतों को मिली औपनिवेशिक मानसिकता से आज़ादी
- Thursday September 5, 2024
- हरीश चंद्र बर्णवाल
पिछले एक दशक से देश ने एक नई अंगड़ाई ली है, और अपने आपको गुलामी के कालखंड के प्रतीकों और विचारों से मुक्त कर रहा है. इस दौर में 1500 ऐसे कानून खत्म हो चुके हैं, जो देश को सिर्फ़ गुलाम बनाए रखने की मानसिकता से बनाए गए थे.
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