'Bhopal gas tragedy'

- 34 न्यूज़ रिजल्ट्स
  • Bollywood | Edited by: नरेंद्र सैनी |गुरुवार दिसम्बर 2, 2021 10:53 AM IST
    The Railway Men: 'द रेलवे मैन' 2 दिसंबर, 2022 को स्ट्रीम करेगी. बता दें कि 2 दिसंबर, 1984 की आधी रात के बाद, अमेरिकन यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन की एक कीटनाशक फैक्ट्री से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हो गया.
  • India | Reported by: अनुराग द्वारी |गुरुवार सितम्बर 9, 2021 03:31 PM IST
    Bhopal Gas Tragedy: भोपाल गैस त्रासदी को झेल चुकी करीब 5 हजार विधवा महिलाओं की पेंशन एक बार फिर से शुरू हो गई है. हालांकि पिछले 20 माह से बंद पेंशन में से महिलाओं को सिर्फ पांच माह की ही राशि जारी की गई है.
  • MP-Chhattisgarh | Reported by: अनुराग द्वारी |सोमवार जुलाई 12, 2021 11:01 PM IST
    मध्यप्रदेश सरकार यूनियन कार्बाइड में फैला 337 मीट्रिक टन जहरीला कचरा हटाना चाहती है, यहां मेमोरियल बनाना चाहती है.
  • India | Reported by: अनुराग द्वारी |मंगलवार जून 29, 2021 09:15 PM IST
    पीड़ित विधवाओं ने कहा कि 18 महीने में मंत्री जी ने 3 बार कैमरे पर गैस पीड़ित विधवाओं की पेंशन शुरू करने का वादा किया, कांग्रेस को जमकर कोसा लेकिन पेंशन अब तक शुरू नहीं हुई. लेकिन दिसंबर 2019 से पेंशन बंद है. 18 महीने हो गए.
  • MP-Chhattisgarh | Reported by: अनुराग द्वारी, Edited by: सूर्यकांत पाठक |मंगलवार मार्च 2, 2021 10:17 PM IST
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में भोपाल की गैस पीड़ित विधवाओं के लिए बजट में खुशखबरी है. सरकार ने उनको मिलने वाली पेंशन के लिए बजट में प्रावधान कर दिया है. वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने जब मंगलवार को बजट पेश किया तो बताया कि गैस पीड़ितों को प्रतिमाह दी जाने वाली केन्द्रीय पेंशन योजना समाप्त हो जाने पर अब राज्य सरकार स्वयं के स्रोतों से पेंशन उपलब्ध कराएगी. इस हेतु बजट में आवश्यक प्रावधान रखा गया है.
  • MP-Chhattisgarh | Reported by: अनुराग द्वारी, Edited by: सूर्यकांत पाठक |सोमवार मार्च 1, 2021 11:46 PM IST
    भोपाल गैस त्रासदी  (Bhopal Gas tragedy) ने सालों पहले कई लोगों के अपने छीन लिए, सालों बाद सरकार ने गैस त्रासदी में जो महिलाएं विधवा हुईं उनसे उनकी पेंशन छीन ली. भूख मिटाने के लिए कई बूढ़ी विधवाओं को खाना मांगना पड़ रहा है. सरकार ने कई बार आश्वासन दिया, पूरा नहीं किया. दिसंबर 2019 से पेंशन बंद है. इस बीच कांग्रेस (Congress) की सरकार के मुख्यमंत्री चले गए, कमल की सरकार के शिवराज मुख्यमंत्री बन गए इन महिलाओं ने हर स्तर पर आवेदन दिया, विरोध दर्ज कराया लेकिन पेंशन नहीं मिली.
  • Bollywood | Edited by: ख़बर न्यूज़ डेस्क |शुक्रवार दिसम्बर 4, 2020 01:03 PM IST
    भोपाल के प्राचीन शहर में 1984 में स्थापित, एक अमेरिकी कीटनाशक संयंत्र से निकले जहरीले गैस के बादल से  हजारों लोग मारे गए और घायल हो गए - भोपाल गैस त्रासदी. "फाइव पास्ट मिडनाइट इन भोपाल" में लैपिएरे और मोरो ने सैकड़ों पात्रों, गवाहों और एक रोमांचकारी मानव त्रासदी का किताब में उल्लेख किया है
  • India | Reported by: अनुराग द्वारी, Edited by: आनंद नायक |सोमवार अगस्त 10, 2020 03:30 PM IST
    रिश्तेदार शहजादी बताती हैं कि सफिया बी के पति नहीं हैं. पेंशन ही सहारा था वो भी खत्म हो गया. बीमार रहती हैं दवा की परेशानी है. आंखों से नहीं दिखता पहले पेंशन मिलती थी तो थोड़ा खर्चा चला लेती थीं अब वो बहुत परेशान हैं. उन्‍होंने बताया‍ कि पेंशन लेने गये थे तो कहा गया कि पेंशन बंद हो गई अब नहीं मिलेगी.
  • India | Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सूर्यकांत पाठक |शनिवार जनवरी 25, 2020 06:04 PM IST
    भोपाल गैस त्रासदी मामले में केंद्र की क्यूरेटिव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ सुनवाई करेगी. सुनवाई 28 जनवरी से होगी. दरअसल केंद्र सरकार ने 2011 में सुप्रीम कोर्ट में भोपाल गैस त्रासदी पीड़ितों के लिए अतिरिक्त मुआवजे के लिए क्यूरेटिव याचिका दाखिल की थी. केंद्र ने कहा है कि अमेरिका की यूनियन कार्बाइड कंपनी, जो अब डॉव केमिकल्स के स्वामित्व में है, को 7413 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने के निर्देश दिए जाएं. दिसंबर 2010 में दायर याचिका में शीर्ष अदालत के 14 फरवरी, 1989 के फैसले की फिर से जांच करने की मांग की गई है जिसमें 470 मिलियन अमेरिकी डॉलर (750 करोड़ रुपये) का मुआवजा तय किया गया था.
  • India | Reported by: अनुराग द्वारी, Edited by: सूर्यकांत पाठक |मंगलवार दिसम्बर 3, 2019 08:00 PM IST
    सन 1984 में गैस रिसी और एक शहर तबाह हो गया...तीन दशक से ज्यादा वक्त बीत गया.. लेकिन लाखों लोगों के लिए वक्त 84 में ही ठहर गया. हजारों लोगों को मौत के मुंह में धकेलने वाली भोपाल गैस त्रासदी दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक है, लेकिन अब इस पर कोई बहस नहीं होती. आरोप लगते रहे हैं कि केन्द्र और राज्य सरकारें आज भी पीड़ितों के बजाए यूनियन कार्बाइड और उसके वर्तमान मालिक डाव केमिकल के हितों की रक्षा कर रही हैं. इन सबके बीच इन पीड़ितों की दमदार आवाज़ अब्दुल जब्बार कुछ दिनों पहले गुजर गए. इस बीच गैस पीड़ितों के लिए काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक और बड़ा आरोप लगाया है कि शोध के ऐसे नतीजे को दबा दिया, जिससे कंपनियों से पीड़ितों को अतिरिक्त मुआवजा देने के लिए दायर सुधार याचिका को मजबूती मिल सकती थी.
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